कन्याकुमारी में ‘डिवाइन चिट फंड्स’ चलाने वाले 57 वर्षीय पॉलराज पर रकम लौटाने के बजाय फरार होने का आरोप; एक शिकायत के बाद जांच में सामने आया बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा

₹9 करोड़ के चिटफंड घोटाले का आरोपी गिरफ्तार, 90 से ज्यादा लोगों से ठगी का आरोप

Roopa
By Roopa
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नागरकोइल: कन्याकुमारी जिले में करीब ₹9 करोड़ के कथित चिटफंड घोटाले का मामला सामने आया है। जिला अपराध शाखा (DCB) ने चिटफंड संचालक 57 वर्षीय पॉलराज को चेन्नई से गिरफ्तार किया है। उस पर 90 से अधिक लोगों से चिटफंड के नाम पर रकम लेने और अवधि पूरी होने के बाद पैसा वापस नहीं करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, मामले में कथित धोखाधड़ी की कुल रकम करीब ₹9 करोड़ आंकी गई है।

जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता 47 वर्षीय सतीश कुमार कन्याकुमारी जिले के तिरपरप्पु इलाके के रहने वाले हैं। उन्होंने 11 अप्रैल 2022 को कडायलुमूडु में पॉलराज द्वारा संचालित ‘डिवाइन चिट फंड्स’ की ₹10 लाख की नीलामी चिट में हिस्सा लिया था। सतीश कुमार ने चिट की रकम के रूप में अलग-अलग किस्तों में कुल ₹8.83 लाख का भुगतान किया।

चिट की अवधि पूरी होने के बाद जब उन्होंने अपनी जमा रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर पॉलराज ने भुगतान टालना शुरू कर दिया। शिकायत के अनुसार, कुछ समय बाद पॉलराज अपने परिवार के साथ इलाके से फरार हो गया। इसके बाद सतीश कुमार ने मामले की शिकायत जिला अपराध शाखा से की।

DCB पुलिस ने 10 दिसंबर 2025 को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि यह मामला केवल एक निवेशक तक सीमित नहीं था। पुलिस के अनुसार, पॉलराज ने इलाके में इसी तरह की कई चिट योजनाएं संचालित की थीं और बड़ी संख्या में लोगों से रकम जुटाई थी।

जांच में 90 से अधिक लोगों के कथित तौर पर प्रभावित होने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि चिट योजनाओं की अवधि पूरी होने के बाद निवेशकों को उनकी रकम वापस नहीं की गई। पुलिस ने अलग-अलग निवेशकों से जुड़े दावों और लेनदेन की जानकारी जुटाने के बाद घोटाले की अनुमानित रकम करीब ₹9 करोड़ बताई है।

चेन्नई से हुई गिरफ्तारी

कथित चिटफंड घोटाले की जांच के दौरान पुलिस ने पॉलराज की तलाश शुरू की। कई स्तरों पर जानकारी जुटाने के बाद DCB की टीम ने उसे रविवार को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस अब मामले में कथित रूप से जमा की गई रकम, निवेशकों की संख्या, चिट योजनाओं के संचालन और रकम के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना भी है कि निवेशकों से प्राप्त रकम कहां और किस तरह इस्तेमाल की गई।

अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अभी और शिकायतें सामने आ सकती हैं। DCB ने उन लोगों से भी शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, जिन्होंने इस कथित चिटफंड योजना में पैसा लगाया था लेकिन उन्हें उनकी रकम वापस नहीं मिली।

शिकायतों की संख्या बढ़ने की आशंका

जांच एजेंसी का मानना है कि एक शिकायत के आधार पर शुरू हुई जांच के दौरान 90 से अधिक प्रभावित लोगों का सामने आना मामले की व्यापकता को दर्शाता है। पुलिस अब संभावित पीड़ितों से जानकारी जुटाकर कथित वित्तीय लेनदेन का मिलान कर रही है।

चिटफंड योजनाओं में नियमित किस्तों के जरिए रकम जमा कराई जाती है और निर्धारित अवधि या नीलामी प्रक्रिया के आधार पर भुगतान किया जाता है। ऐसे मामलों में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न या आसान भुगतान व्यवस्था का भरोसा देकर रकम जुटाने के बाद भुगतान में देरी या रकम हड़पने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

कन्याकुमारी के इस मामले में भी पुलिस जांच का फोकस निवेशकों की रकम, कथित चिट योजनाओं और भुगतान के रिकॉर्ड पर है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने इस योजना में पैसा लगाया था और उन्हें रकम वापस नहीं मिली, वे आगे आकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इससे घोटाले में प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या और वित्तीय नुकसान का आकलन करने में मदद मिलेगी।

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