1984 में तीन नाबालिग किशोरियों को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में दोषी ठहराया गया था आरोपी; हुलिया बदलकर वर्षों तक पुलिस से बचता रहा, वोटर आईडी रिकॉर्ड और तकनीकी जांच से मिला सुराग

40 वर्ष से फरार सजायाफ्ता आरोपी गिरफ्तार, हाई कोर्ट में जवाब दाखिल होने से एक दिन पहले पुलिस को मिली सफलता

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By Roopa
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कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में चार दशक से फरार चल रहे एक सजायाफ्ता आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी वर्ष 1984 में तीन नाबालिग किशोरियों को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में दोषी ठहराया गया था और न्यायालय से राहत मिलने के बाद फरार हो गया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी लगातार अपना हुलिया बदलकर पहचान छिपाता रहा और अलग-अलग स्थानों पर रहकर गिरफ्तारी से बचता रहा। लगभग 40 वर्ष बाद पुलिस ने तकनीकी जांच, पुराने अभिलेखों और मतदाता पहचान पत्र से मिले सुरागों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रदीप कुमार के रूप में हुई है। उसके खिलाफ वर्ष 1984 में जूही थाने में तीन नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर ले जाने का मामला दर्ज किया गया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया और निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, वर्ष 1987 में आरोपी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दायर की, जहां से उसे अंतरिम राहत मिली। इसके बाद उसने अदालत में पेश होना बंद कर दिया और अपना ठिकाना बदलकर फरार हो गया।

पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ समय-समय पर वारंट जारी किए गए, लेकिन वह लगातार पहचान बदलकर और स्थान बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा। जांच में सामने आया कि वह कभी लंबे बाल और दाढ़ी रखता था, तो कभी सिर मुंडवाकर पूरी तरह अलग पहचान बना लेता था। इस कारण वर्षों तक उसकी सही पहचान स्थापित करना पुलिस के लिए चुनौती बना रहा।

मामले में नया मोड़ तब आया जब लगभग दो महीने पहले हाई कोर्ट ने लंबित प्रकरण में पुलिस आयुक्त से जवाब तलब किया। अदालत में जवाब 7 अगस्त तक दाखिल किया जाना था। इसके बाद दक्षिण जोन पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड दोबारा खंगालने शुरू किए और जूही थाना प्रभारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर आरोपी की तलाश तेज कर दी। अधिकारियों ने पुराने दस्तावेज, न्यायालयी रिकॉर्ड और उपलब्ध तकनीकी सूचनाओं का मिलान करते हुए आरोपी तक पहुंचने की रणनीति बनाई।

जांच के दौरान पुलिस को पुराने मतदाता पहचान पत्र से महत्वपूर्ण सुराग मिला। अधिकारियों ने पुराने वोटर आईडी का विवरण ऑनलाइन रिकॉर्ड में खोजकर उसका ईपीआईसी (EPIC) नंबर प्राप्त किया और संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से सत्यापन कराया। जांच में पता चला कि उक्त मतदाता पहचान पत्र हाल के वर्षों में किदवई नगर क्षेत्र की अंबेडकर बस्ती के पते पर अपडेट कराया गया था। इसके बाद पुलिस ने स्थानीय स्तर पर गुप्त सूचना तंत्र सक्रिय किया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की।

पुलिस के अनुसार, पर्याप्त पुष्टि मिलने के बाद टीम ने जूही क्षेत्र के साईंपुरवा कच्ची मड़ैया तथा किदवई नगर थाना क्षेत्र की अंबेडकर बस्ती में कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पहचान की औपचारिक पुष्टि के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी फगुनी उर्फ राजकुमारी, जो इस मामले में सह-आरोपी थी, की अप्रैल 2024 में मृत्यु हो चुकी है। उसने पुलिस को मृत्यु प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया। पुलिस ने यह भी बताया कि वर्ष 1984 के इस मामले से जुड़ी तीन पीड़ित किशोरियों में से एक की भी अब मृत्यु हो चुकी है। शेष तथ्यों का सत्यापन संबंधित अभिलेखों के आधार पर किया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी मूल रूप से लखनऊ का निवासी है और वर्षों तक लगातार अपना ठिकाना तथा पहचान बदलकर फरारी काटता रहा। अधिकारियों का कहना है कि पुराने मामलों में भी आधुनिक डिजिटल रिकॉर्ड, मतदाता डाटाबेस और स्थानीय खुफिया सूचनाओं का प्रभावी उपयोग कर फरार आरोपियों तक पहुंचा जा सकता है। मामले में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर आरोपी को जेल भेज दिया गया है तथा आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशानुसार की जाएगी।

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