“चौकाघाट डिविजन में बीएलएस इंटरनेशनल के काउंटर पर गड़बड़ी उजागर, 22 से अधिक फर्जी रसीदें बरामद; जांच तेज”

“बिजली बिल वसूली में बड़ा फर्जीवाड़ा: फिंटेक एजेंसी के एजेंटों ने उपभोक्ताओं से डकारे पैसे, थमाई नकली रसीदें”

Roopa
By Roopa
5 Min Read

वाराणसी। पूर्वांचल डिस्कॉम के चौकाघाट डिविजन में बिजली बिल भुगतान व्यवस्था को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। फिंटेक एजेंसी बीएलएस इंटरनेशनल के एजेंटों पर आरोप है कि उन्होंने उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि वसूलने के बाद उसे विभागीय खाते में जमा नहीं किया और बदले में फर्जी भुगतान रसीदें थमा दीं। मामला काशी विद्यापीठ उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद उजागर हुआ, जिसके बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उपभोक्ताओं ने मार्च महीने में अपने बकाया बिजली बिल का भुगतान किया था, लेकिन अप्रैल में जब नया बिल आया तो उसमें बढ़ी हुई राशि दर्ज थी। इससे उपभोक्ताओं को संदेह हुआ और उन्होंने संबंधित काउंटर पर पूछताछ की। जवाब में तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देकर उन्हें नई रसीदें जारी कर दी गईं, लेकिन मामला तब गंभीर हुआ जब उपभोक्ताओं ने अधिशासी अभियंता से शिकायत दर्ज कराई। जांच में 22 से अधिक संदिग्ध फर्जी भुगतान पावती रसीदें बरामद हुईं।

अधिकारियों के अनुसार, फिंटेक एजेंसी बीएलएस इंटरनेशनल को बिजली बिल वसूली और जमा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके तहत एजेंसी ने विभिन्न उपकेंद्रों और डिविजन कार्यालयों में काउंटर स्थापित किए थे, जहां एजेंटों की तैनाती की गई थी। आरोप है कि इन्हीं एजेंटों ने उपभोक्ताओं से नकद राशि लेकर उसे विभागीय खाते में जमा नहीं किया और निजी रूप से रकम हड़प ली। उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाया गया कि उनका भुगतान सिस्टम में अपडेट हो चुका है, जबकि वास्तविकता में कोई भी राशि जमा नहीं की गई थी। इस गड़बड़ी से उपभोक्ताओं में नाराजगी फैल गई है।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

मामले की शिकायत अधिशासी अभियंता कुमार सौरभ के पास पहुंचने के बाद विभाग ने तत्काल जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आई अनियमितताओं ने पूरी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई उपकेंद्रों से भी इसी तरह की शिकायतें मिलने की बात सामने आई है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि यह गड़बड़ी एक सीमित क्षेत्र तक नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर फैली हो सकती है। विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड और लेनदेन की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

उधर इस पूरे मामले के सामने आने के बाद चौकाघाट डिविजन सहित आसपास के क्षेत्रों में उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई उपभोक्ताओं ने कहा कि वे समय पर बिल भुगतान करने के बावजूद अनावश्यक रूप से परेशान हो रहे हैं और अब उन्हें आशंका है कि उनकी जमा की गई राशि का सही हिसाब नहीं रखा जा रहा है। कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी मांग की है कि पूरी बिल वसूली व्यवस्था की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। वहीं विभागीय स्तर पर भी अब सभी काउंटरों की समीक्षा की जा रही है और पुराने लेनदेन रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही एजेंसी के संचालन और एजेंटों की तैनाती प्रक्रिया पर भी पुनर्विचार किया जा सकता है ताकि भुगतान प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सके। यह मामला अब सिर्फ एक डिविजन तक सीमित नहीं रहकर पूरी बिजली बिल वसूली प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल सभी संबंधित रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। मामले को लेकर उपभोक्ताओं में लगातार चर्चा बनी हुई है।

हमसे जुड़ें

Share This Article