नई दिल्ली। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच राजधानी में एक चौंकाने वाला डिलीवरी फ्रॉड सामने आया है। ₹35 लाख मूल्य के हाई-एंड स्मार्टफोन्स को ‘डिलीवर’ दिखाकर गायब करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बड़ी संख्या में ऑर्डर किए गए iPhone अब भी लापता हैं।
मामला तब सामने आया जब शास्त्री नगर निवासी एक व्यक्ति ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए 50 iPhone 16 (128GB) यूनिट्स का ऑर्डर दिया। 12 अप्रैल से 16 अप्रैल के बीच किए गए इन ऑर्डर्स को ऐप पर ‘डिलीवर’ दिखाया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें एक भी पार्सल प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई।
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प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डिलीवरी प्रक्रिया के दौरान ही गड़बड़ी की गई। आरोप है कि डिलीवरी एजेंट ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर ऑर्डर्स को सिस्टम में ‘डिलीवर’ मार्क कर दिया, जबकि असल में सामान ग्राहक तक पहुंचाया ही नहीं गया। इस तरह पूरे कंसाइनमेंट को रास्ते में ही हड़प लिया गया।
जांच के दौरान ट्रैकिंग डिटेल्स की पड़ताल में एक अहम सुराग मिला। जिन 32 ट्रैकिंग आईडी की जांच की गई, उनमें से 26 डिलीवरी एक ही एजेंट के जिम्मे थीं। इसी आधार पर संदिग्ध की पहचान कर उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने अपने साथी के साथ मिलकर इस पूरे खेल को अंजाम देने की बात स्वीकार की।
इसके बाद दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों की निशानदेही पर की गई तलाशी में 14 सीलबंद iPhone 16 बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब ₹10 लाख बताई जा रही है। हालांकि, बाकी मोबाइल फोन अब भी बरामद नहीं हो सके हैं, जिन्हें लेकर जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह जल्दी पैसा कमाने के लालच में इस तरह के फ्रॉड में शामिल हुआ। शुरुआती जांच में दोनों आरोपियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, लेकिन यह आशंका जताई जा रही है कि वे इसी तरह के अन्य मामलों में भी शामिल हो सकते हैं।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल है, और क्या इसमें किसी बड़े नेटवर्क या अंदरूनी साजिश की भूमिका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कॉमर्स सेक्टर में इस तरह के फ्रॉड नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं, जहां डिलीवरी चैन के भीतर से ही सेंध लगाई जा रही है। इससे न केवल ग्राहकों का भरोसा प्रभावित होता है, बल्कि कंपनियों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती निर्भरता के साथ अपराधी अब सप्लाई चेन के अंदर कमजोर कड़ियों को निशाना बना रहे हैं। यह केवल ऑनलाइन फ्रॉड नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियों को अपने लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सिस्टम में सख्त निगरानी और मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन लागू करना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना उपभोक्ताओं के लिए भी एक चेतावनी है। महंगे उत्पाद ऑर्डर करते समय डिलीवरी की पुष्टि, OTP शेयरिंग और पैकेज रिसीविंग के दौरान सतर्कता बेहद जरूरी है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत प्लेटफॉर्म और पुलिस को सूचित करना चाहिए।
राजधानी में सामने आया यह मामला साफ संकेत देता है कि साइबर और ई-कॉमर्स फ्रॉड अब नए रूप ले रहे हैं, जहां तकनीक के साथ-साथ मानव तंत्र की कमजोरियों का भी फायदा उठाया जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त निगरानी और जागरूकता दोनों जरूरी होंगे।
