कानपुर: कंपनियों, अस्पतालों और संस्थानों के पास मौजूद लोगों के निजी डेटा की सुरक्षा अब वित्तीय ऑडिट के साथ-साथ विशेष डेटा प्रोटेक्शन ऑडिट के जरिए भी जांची जाएगी। उत्तर प्रदेश में इस जिम्मेदारी के लिए 25 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें कानपुर, लखनऊ, आगरा, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी और प्रयागराज समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों के CA शामिल हैं। इन विशेषज्ञों की भूमिका संस्थानों में व्यक्तिगत डेटा के संग्रह, इस्तेमाल, भंडारण और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने की होगी।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) की ओर से 10 अगस्त तक कानपुर में डेटा सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण पूरा करने वाले CA अब सामान्य वित्तीय ऑडिट की तरह संस्थानों की डेटा सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण कर सकेंगे। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि किसी संस्था के सिस्टम में निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं या नहीं और डेटा के इस्तेमाल में निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
डेटा सुरक्षा में CA की नई भूमिका
डिजिटल दौर में संस्थानों के पास ग्राहकों और कर्मचारियों से जुड़ी बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी मौजूद रहती है। इसमें नाम, मोबाइल नंबर, पता और पहचान से जुड़ी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। ऐसे डेटा का गलत इस्तेमाल या लीक होने पर संबंधित व्यक्ति की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।
डेटा प्रोटेक्शन ऑडिट के जरिए यह देखा जाएगा कि संस्थान किस तरह व्यक्तिगत जानकारी एकत्र कर रहे हैं, उसे कहां और कितने समय तक सुरक्षित रख रहे हैं तथा किन परिस्थितियों में उसका इस्तेमाल या साझा किया जा रहा है। इसके साथ ही डेटा तक अनधिकृत पहुंच रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा की जाएगी।
₹250 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान
ICAI के पूर्व सेंट्रल काउंसिल सदस्य CA मन्नू अग्रवाल के अनुसार, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर संस्थानों की जिम्मेदारी तय की गई है। यदि किसी कंपनी, संस्थान या अस्पताल की ओर से डेटा सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए जाते या डेटा लीक की स्थिति सामने आती है, तो कानून के तहत भारी जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर उल्लंघन की स्थिति में यह राशि ₹250 करोड़ तक हो सकती है।
बच्चों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को भी विशेष महत्व दिया गया है। इससे जुड़े नियमों के उल्लंघन पर ₹200 करोड़ तक की पेनल्टी का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में स्कूल, अस्पताल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य संस्थानों के लिए बच्चों से संबंधित डेटा की सुरक्षा महत्वपूर्ण होगी।
डेटा सुरक्षा को कानूनी जिम्मेदारी से आगे ले जाने पर जोर
ICAI चेयरमैन CA अंकुर गोयल के अनुसार, डिजिटल अर्थव्यवस्था में डेटा एक महत्वपूर्ण संपत्ति बन चुका है। इसलिए इसकी सुरक्षा केवल कानूनी औपचारिकता नहीं बल्कि संस्थानों की नैतिक जिम्मेदारी भी है। प्रशिक्षित CA उद्योग और संस्थानों को सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था विकसित करने तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डेटा सुरक्षा प्रणाली तैयार करने में मार्गदर्शन दे सकते हैं।
कानून के प्रावधान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ प्रावधान 13 नवंबर 2025 से प्रभावी हैं, जबकि मुख्य प्रावधान 14 मई 2027 से लागू होने हैं। ऐसे में संस्थानों को पूरी व्यवस्था लागू होने से पहले अपनी डेटा सुरक्षा प्रणाली मजबूत करने का समय मिलेगा।
ऑडिट से सामने आएंगी कमजोर कड़ियां
नियमित डेटा प्रोटेक्शन ऑडिट से IT सिस्टम की कमजोरियां समय रहते पहचानी जा सकती हैं। इससे यह पता चल सकता है कि डेटा तक अनधिकृत पहुंच की संभावना कहां है, कौन सी जानकारी जरूरत से ज्यादा संग्रहित की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था में किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
व्यक्तिगत जानकारी की निगरानी और सुरक्षित प्रबंधन से डेटा चोरी तथा लीक की आशंका कम हो सकती है। साथ ही ग्राहकों और कर्मचारियों का संस्थानों पर भरोसा भी बढ़ेगा। आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ने वाली है। ऐसे में प्रशिक्षित CA की भूमिका वित्तीय जांच से आगे बढ़कर संस्थानों की डिजिटल सुरक्षा और अनुपालन व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
