कानपुर: कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (KESCo) में अनुपयोगी बिजली खंभों और उपकरणों की स्क्रैप के रूप में बिक्री में कथित गड़बड़ी की जांच तेज हो गई है। मामले की जांच कर रहे अधीक्षण अभियंता (प्रोजेक्ट) अनुराग कटियार ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं। गुजरात की स्क्रैप खरीदने वाली कंपनी एमए एसोसिएट्स को भी नोटिस जारी कर उसके प्रतिनिधि को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अब तक स्टोर डिवीजन के तत्कालीन अधिशासी अभियंता श्रीकांत रंगीला और अवर अभियंता रमेश के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
10 टन के बजाय 22 टन स्क्रैप भेजने का आरोप
मामला 30 जुलाई को सामने आया, जब गुजरात की कंपनी के लिए स्क्रैप लेकर एक वाहन रवाना हुआ। टेंडर के अनुसार कंपनी को ₹54 प्रति किलो की दर से 10 टन स्क्रैप भेजा जाना था। आरोप है कि वाहन में करीब 22 टन स्क्रैप लाद दिया गया। इस तरह निर्धारित मात्रा से लगभग 12 टन अधिक स्क्रैप भेजने की कोशिश हुई। अतिरिक्त 12 टन स्क्रैप की अनुमानित कीमत करीब ₹6 लाख बताई जा रही है।
अधिक स्क्रैप लदा वाहन काकादेव में पकड़ा गया
मामले के अनुसार, JE रमेश को वाहन में निर्धारित मात्रा से अधिक स्क्रैप लदे होने की जानकारी हुई। वाहन के परिसर से निकलने के बाद उन्होंने डायल-112 पर सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने काकादेव क्षेत्र में वाहन को रोक लिया। घटना के संबंध में पुलिस को शिकायत भी दी गई थी।
मामला सामने आने के बाद KESCo प्रबंधन ने विभागीय जांच शुरू कराई। जांच अधिकारी अब उपलब्ध दस्तावेजों और अधिकारियों के बयानों का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अतिरिक्त स्क्रैप वाहन में किसके निर्देश पर लादा गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ।
गुजरात की कंपनी के जवाब पर भी सवाल
अतिरिक्त 12 टन स्क्रैप से जुड़े मामले में गुजरात की कंपनी को पहले भी नोटिस दिया गया था। जांच के अनुसार, कंपनी ने अपने जवाब में टेंडर मिलने की शर्तों और उसकी कीमत का उल्लेख किया, लेकिन जांच अधिकारी की ओर से मांगी गई लोडिंग और डिस्पैच से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
इसके बाद जांच अधिकारी ने कंपनी के प्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से KESCo कार्यालय में उपस्थित होकर पूछताछ में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया है। अब कंपनी से यह जानने की कोशिश होगी कि उसे कितनी मात्रा में स्क्रैप मिलना था और अतिरिक्त माल की जानकारी उसे किस स्तर पर थी।
JE रमेश के बयान में सामने आया पेंच
जांच में JE रमेश का बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कथित तौर पर वाहन में अतिरिक्त स्क्रैप होने की जानकारी पुलिस को दी थी और डायल-112 के माध्यम से वाहन पकड़े जाने में मदद की थी। हालांकि, विभागीय जांच अधिकारी के सामने दिए गए उनके बयान में पुलिस को दी गई तहरीर का उल्लेख नहीं होने की बात सामने आई है।
पहले रमेश द्वारा ग्वालटोली थाने में तहरीर देने और डायल-112 पर सूचना देने की जानकारी सामने आई थी। अब जांच अधिकारी इस अंतर की वजह जानने के साथ घटनाक्रम की पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और विभागीय दस्तावेजों से करने की तैयारी में हैं।
पुराने स्क्रैप सौदों की भी होगी जांच
जांच का दायरा अब 30 जुलाई की घटना से आगे बढ़ सकता है। KESCo प्रबंधन पुराने वर्षों में स्टोर से हुई स्क्रैप बिक्री के रिकॉर्ड भी खंगालने की तैयारी कर रहा है। पूर्व अभियंताओं के कार्यकाल में किन कंपनियों को कितना स्क्रैप बेचा गया, इसकी जानकारी जुटाई जा सकती है।
जांच में टेंडर प्रक्रिया, स्क्रैप का वजन, लोडिंग, डिस्पैच, भुगतान और संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। प्रबंधन ने अधीनस्थ कर्मचारियों को पुराने दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए हैं। स्क्रैप से जुड़े ठेकेदारों से भी पूछताछ की जा सकती है।
अब जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि अतिरिक्त स्क्रैप लोड करने की अनुमति किसने दी, रिकॉर्ड में इसकी स्थिति क्या थी और इससे KESCo को कोई वित्तीय नुकसान हुआ या नहीं। अधिकारियों, कर्मचारियों और गुजरात की कंपनी के प्रतिनिधि के बयानों का दस्तावेजी साक्ष्यों से मिलान करने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी।
