कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले कथित गिरोह के सरगना अखिलेश शुक्ला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

फर्जी डिग्री गिरोह का सरगना अखिलेश शुक्ला गिरफ्तार, 5 बैंक खातों में ₹50 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन

Team The420
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कानपुर: फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार करने वाले कथित गिरोह के सरगना अखिलेश शुक्ला को फीलखाना पुलिस ने उर्सला अस्पताल रोड से गिरफ्तार किया है। उन्नाव निवासी अखिलेश पर ₹25 हजार का इनाम घोषित था और वह करीब एक महीने से फरार चल रहा था। पुलिस के अनुसार, वह अदालत में आत्मसमर्पण करने की तैयारी में था और इसी सिलसिले में अपने वकील से मिलने आया था। गिरफ्तारी के बाद जांच में उसके और उसके भाई से जुड़े पांच बैंक खातों में वर्ष 2015 से अब तक ₹50 करोड़ से अधिक के लेनदेन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

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पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान अखिलेश नेपाल के एक होटल में करीब 32 दिन तक छिपा रहा। उसके पकड़े जाने के बाद अब पुलिस कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और उसके संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज किन लोगों के लिए तैयार किए गए और उनके जरिए किन संस्थानों या नौकरियों में लाभ लिया गया।

किदवईनगर से शुरू हुई कार्रवाई में खुला नेटवर्क

फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत किदवईनगर क्षेत्र से हुई थी। पुलिस ने साकेतनगर स्थित एक संस्था पर छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान नौ राज्यों की 14 यूनिवर्सिटी और माध्यमिक शिक्षा परिषद के नाम पर तैयार की गई एक हजार से अधिक संदिग्ध फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद होने की बात सामने आई थी।

इसके बाद पुलिस कमिश्नर की ओर से गठित एसआईटी ने मामले की जांच आगे बढ़ाई और छह आरोपियों को जेल भेजा। जांच के दौरान 8 जून को बेकनगंज के हीरामन का पुरवा क्षेत्र में छापा मारकर फर्जी डिग्री छापने वाली मशीन के साथ चार लोगों को पकड़ा गया। पूछताछ और बरामद दस्तावेजों के आधार पर पुलिस को कथित नेटवर्क से जुड़े नए लोगों की जानकारी मिली।

जांच में अखिलेश और उसके भाई का नाम सामने आया

पुलिस ने इसके बाद अमित सक्सेना और गोपालजी गुप्ता को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर गिरोह के संचालन में अखिलेश शुक्ला और उसके भाई निखिलेश की भूमिका के बारे में जानकारी दी। इसके बाद अखिलेश पुलिस की जांच के केंद्र में आ गया था।

पुलिस के अनुसार, अखिलेश ने एमएससी के बाद एमफिल किया है और निजी तथा सरकारी कॉलेजों में बीएससी छात्रों को गणित पढ़ा चुका है। उसने कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में भी सेल्फ-फाइनेंस व्यवस्था के तहत काम किया था। जांच एजेंसी अब उसके शैक्षणिक और पेशेवर संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।

कोचिंग बंद होने के बाद फर्जी डिग्री का आरोप

जांच में सामने आया कि अखिलेश वर्ष 2003 से 2022 तक उन्नाव में उत्कृष्ट कोचिंग सेंटर चलाता था। कोरोना महामारी के दौरान कोचिंग बंद होने के बाद उसने कथित तौर पर फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार कराने का काम शुरू किया।

पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में इस कारोबार से जुड़ा पैसा अखिलेश के बैंक खाते में आता था। लेनदेन बढ़ने के बाद उसके भाई के नाम से ‘डीपीएस फाउंडेशन’ नाम की फर्म और बैंक खाता खोला गया। कथित तौर पर ग्राहकों से मिलने वाली रकम इस खाते में भेजी जाती थी, जबकि फर्जी डिग्री तैयार करने वाले लोगों को नकद भुगतान किया जाता था।

घर पर छापे से पहले जला दिए गए दस्तावेज

पुलिस के अनुसार, 5 जुलाई को जब फीलखाना पुलिस अखिलेश के उन्नाव स्थित घर पर दबिश देने पहुंची, उससे पहले वह और उसका भाई वहां से फरार हो चुके थे। आरोप है कि अखिलेश की पत्नी ने पुलिस से दस्तावेज बचाने के प्रयास में कई फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तसले में डालकर जला दी थीं। हालांकि पुलिस ने जले हुए दस्तावेज भी बरामद किए और उन्हें जांच का हिस्सा बनाया।

कई यूनिवर्सिटी के नाम पर दस्तावेज बनाने का दावा

पूछताछ में अखिलेश ने कथित तौर पर बताया कि वर्ष 2013 से वह कई विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी डिग्री तैयार कराने के नेटवर्क से जुड़ा था। इनमें सुभारती यूनिवर्सिटी, हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, एफएस यूनिवर्सिटी, जेएस यूनिवर्सिटी, वाईबीएन यूनिवर्सिटी, ग्लोकल यूनिवर्सिटी, प्रीति ग्लोबल यूनिवर्सिटी, मंगलायतन यूनिवर्सिटी, सिक्किम एल्पाइन यूनिवर्सिटी, सिक्किम ग्लोबल यूनिवर्सिटी, आईएसबीएम यूनिवर्सिटी, नीलम यूनिवर्सिटी और संस्कृति यूनिवर्सिटी समेत अन्य संस्थानों के नाम सामने आए हैं।

अब पुलिस इन विश्वविद्यालयों से संबंधित दस्तावेजों की सत्यता, कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। ₹50 करोड़ से अधिक के बैंक लेनदेन की जानकारी भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम किन स्रोतों से आई, किन लोगों तक पहुंची और फर्जी डिग्री नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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