रांची: झारखंड में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID की पूछताछ में अब स्वास्थ्य विभाग की अनुबंध आधारित भर्तियों में भी कमीशन के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान दावा किया है कि उसने JSR एजेंसी के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर भर्तियां कराने के बदले करीब ₹9 लाख कमीशन कमाया था। इससे पहले JPSC और JSSC में परीक्षा एजेंसियों के इंपैनलमेंट से जुड़े कथित लेनदेन की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
CID के अनुसार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और अभय तिवारी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण कड़ियों का पता चला है। अभय ने दावा किया कि दिल्ली के शैंटी ने रामवीर सिंह और सत्यपाल सिंह से उसका संपर्क कराया था। इसके बाद अधिकारियों से अपने कथित संपर्कों का हवाला देते हुए TDPL की ओर से काम दिलाने के बदले बिलिंग पर 10 प्रतिशत कमीशन देने का वादा किया गया था।
JSSC में इंपैनलमेंट के बदले कमीशन का दावा
पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर बताया कि JSSC के असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर प्रेम कुमार से उसके अच्छे संबंध थे। इन संबंधों का इस्तेमाल कर उसने TDPL का JSSC में इंपैनलमेंट कराने में मदद की। आरोप है कि इस प्रक्रिया के बदले अभय तिवारी और प्रेम कुमार को ₹5-₹5 लाख दिए गए।
CID की जांच में यह भी सामने आया है कि TDPL के निदेशक रामवीर सिंह ने अभय द्वारा JSSC में कंपनी का इंपैनलमेंट कराने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इंपैनलमेंट की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका थी और कथित भुगतान किस माध्यम से किया गया।
बायोमेट्रिक्स से लेकर वेबेल कंपनी तक जांच
अभय के बयान के अनुसार, एक कंपनी को JSSC में बायोमेट्रिक्स का काम मिला था, लेकिन दर कम होने के कारण कंपनी ने काम नहीं किया। इसके बाद उसे JSSC से डी-इंपैनल कर दिया गया। अभय ने JSSC में वेबेल कंपनी का भी इंपैनलमेंट कराने का दावा किया है।
जांच एजेंसी अब यह देख रही है कि संबंधित कंपनियों को इंपैनल करने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं। वेबेल कंपनी की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है, खासकर CGL परीक्षा से जुड़े मामलों के संदर्भ में।
स्वास्थ्य विभाग में ₹9 लाख कमीशन का आरोप
पूछताछ के दौरान अभय ने कथित तौर पर बताया कि वह वर्ष 2023 में JSR एजेंसी से जुड़ा था। उसके अनुसार, इस एजेंसी के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध आधारित भर्तियां कराई गईं और इस प्रक्रिया से उसने करीब ₹9 लाख कमीशन कमाया।
CID अब इन दावों का दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के जरिए सत्यापन कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किन पदों पर नियुक्तियां कराई गईं, अभ्यर्थियों से किसी तरह की रकम ली गई या नहीं और कमीशन का भुगतान किसके माध्यम से हुआ।
डॉ. अनिमा हांस्डा से भी पूछताछ
CID ने शुक्रवार को JPSC की तत्कालीन सदस्य डॉ. अनिमा हांस्डा से भी पूछताछ की। उन्होंने कथित संदिग्ध गतिविधियों में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। CID के अनुसार, उनसे तत्कालीन चेयरमैन ख्यांते के कार्यकाल में TDPL को परीक्षा एजेंसी के रूप में चयनित किए जाने, 14वीं JPSC परीक्षा के परिणाम को लेकर उठे विवाद और अन्य संबंधित बिंदुओं पर सवाल किए गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक, अब तक किसी आरोपी के बयान में डॉ. हांस्डा का नाम संदिग्ध के तौर पर सामने नहीं आया है। इसलिए उनकी भूमिका को लेकर जांच उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
अरुण शर्मा की कंपनी का 15 राज्यों तक नेटवर्क
जांच में बिजनेस कंपनी के निदेशक अरुण कुमार शर्मा के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। बताया गया है कि उनकी कंपनी का नेटवर्क झारखंड तक सीमित नहीं है और 15 से अधिक राज्यों में परीक्षा आयोजित कराने वाले आयोगों में कंपनी लंबे समय से इंपैनल रही है।
अरुण कुमार शर्मा, जो IIT से स्नातक बताए जाते हैं, वर्ष 2006 से अपने भाई के साथ परीक्षा क्रियान्वयन एजेंसी का संचालन कर रहे हैं। उनके खिलाफ बिहार में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े विवादों में भी कंपनी की भूमिका पर सवाल उठ चुके हैं।
JSSC से ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद कंपनी को JPSC में JTET परीक्षा के क्रियान्वयन का काम मिलने का मामला भी जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CID अब कंपनियों के इंपैनलमेंट, परीक्षा संचालन, भुगतान और अधिकारियों से कथित संपर्कों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी है।
