बेंगलुरु। विदेशी फंडिंग के कथित अवैध उपयोग और वित्तीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े एक बड़े मामले में अमेरिकी आधारित एक धार्मिक संगठन समेत सात आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि विदेशी मूल के डेबिट कार्डों के माध्यम से करोड़ों रुपये की रकम भारत में निकाली और खर्च की गई, जिसकी प्रकृति और उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
मामले की शुरुआत प्रवर्तन एजेंसी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से हुई, जिसके आधार पर बेंगलुरु के कोथनूर पुलिस स्टेशन में 11 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में अमेरिकी संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) तथा उससे जुड़े कई व्यक्तियों के नाम शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि विदेशी स्रोतों से प्राप्त धनराशि का उपयोग भारतीय कानूनों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किया गया।
एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं उनमें जोनाथन एस. राजन, माइका मार्क, अजीत वर्गीज मथाई, वर्गीज चाको, बबलू कुर्मी, सुप्रीम जॉय तथा अमेरिकी संगठन टीटीआई का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन व्यक्तियों और संगठन के बीच वित्तीय गतिविधियों का एक ऐसा नेटवर्क संचालित किया गया, जिसके माध्यम से विदेश से धनराशि भारत में लाई गई और विभिन्न स्थानों पर खर्च की गई।
शिकायत के अनुसार अप्रैल 2026 में आयकर अधिनियम और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के प्रावधानों के तहत की गई तलाशी और जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सामने आए। जांच एजेंसियों का आरोप है कि विदेशी बैंक द्वारा जारी डेबिट कार्डों का इस्तेमाल कर भारत में विभिन्न स्थानों से नकदी निकाली गई। इन लेनदेन के माध्यम से प्राप्त धनराशि का उपयोग कथित तौर पर विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) और FEMA के नियमों के विपरीत किया गया।
प्रारंभिक जांच में यह दावा किया गया है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच लगभग छह महीनों में करीब ₹92.55 करोड़ की राशि का उपयोग किया गया। एजेंसियों का कहना है कि यह रकम लगभग 99.95 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर है। जांच का फोकस इस बात पर है कि धनराशि का वास्तविक स्रोत क्या था, इसका उपयोग किन गतिविधियों में किया गया और क्या सभी वित्तीय लेनदेन नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप थे।
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मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जांच एजेंसियों ने कुछ गतिविधियों के देश के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की आशंका जताई है। इसी वजह से मामले को केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित न मानकर व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। हालांकि इस स्तर पर जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि होना अभी बाकी है।
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 18 अप्रैल को सामने आया, जब माइका मार्क को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रोका गया। शिकायत के अनुसार उनके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि ये कार्ड कथित वित्तीय नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बरामद सामग्री की फोरेंसिक और वित्तीय जांच की जा रही है ताकि धन के प्रवाह और उसके अंतिम उपयोग का पता लगाया जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार UAPA के तहत मामला दर्ज होने से जांच का दायरा और गंभीरता दोनों बढ़ जाती हैं। वहीं वित्तीय अपराधों से जुड़े प्रावधानों के तहत भी अलग-अलग एजेंसियां समानांतर रूप से तथ्य जुटा रही हैं। आने वाले दिनों में बैंकिंग रिकॉर्ड, विदेशी लेनदेन, डिजिटल उपकरणों और संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्कों की गहन पड़ताल की जा सकती है।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं। आरोपियों की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित विदेशी फंडिंग नेटवर्क की वास्तविक प्रकृति और उसका प्रभाव कितना व्यापक था।
