डायग्नोस्टिक सेंटर, बिचौलियों और कथित रूप से कुछ चिकित्सकों के गठजोड़ से करोड़ों रुपये के क्लेम उठाने का आरोप; बिना मरीज देखे MRI, CT स्कैन और महंगी जांचें लिखे जाने के दावे, जांच का दायरा लगातार बढ़ा

सीकर के RGHS घोटाले में बड़ा खुलासा: महंगी जांचों के फर्जी क्लेम का नेटवर्क बेनकाब, छह और डॉक्टर जांच के घेरे में

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By Roopa
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सीकर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में कथित फर्जीवाड़े के मामले ने नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। करोड़ों रुपये के संदिग्ध क्लेम उठाने से जुड़े इस प्रकरण में जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका मजबूत हुई है। अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एसके अस्पताल के छह और डॉक्टरों को जांच के दायरे में लिया गया है। विशेष जांच दल ने इन चिकित्सकों द्वारा लिखी गई जांच पर्चियों और संबंधित रिकॉर्ड को खंगालना शुरू कर दिया है। मामले में पहले हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ के बाद कई नए सुराग मिलने का दावा किया जा रहा है।

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। इन सूचनाओं और जब्त दस्तावेजों के आधार पर अधिकारियों ने यह पड़ताल शुरू की कि किन-किन चिकित्सकों की पर्चियों के आधार पर बड़ी संख्या में महंगी जांचों का क्लेम उठाया गया। जांच एजेंसियों ने RGHS पोर्टल से संबंधित रिकॉर्ड जुटाकर संदिग्ध लेनदेन और जांच अनुमोदनों का विश्लेषण शुरू कर दिया है।

प्रारंभिक जांच में यह आशंका व्यक्त की गई है कि कुछ मामलों में मरीजों की वास्तविक चिकित्सीय आवश्यकता के बिना ही महंगी जांचें लिखी गईं। आरोप है कि MRI, CT स्कैन, विशेष पैथोलॉजी प्रोफाइल और अन्य उच्च लागत वाली जांचों के माध्यम से योजना से भुगतान प्राप्त करने का प्रयास किया गया। जांचकर्ता अब यह सत्यापित कर रहे हैं कि जिन मरीजों के नाम पर जांचें दर्ज की गईं, वे वास्तव में अस्पताल पहुंचे भी थे या नहीं।

मामले में गिरफ्तार किए गए डायग्नोस्टिक सेंटर कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर कुछ कर्मचारी डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटर के बीच संपर्क सूत्र के रूप में काम कर रहे थे। आरोप है कि वे महंगी जांचों के बदले कथित कमीशन व्यवस्था तय करने और संबंधित दस्तावेजों को प्रोसेस कराने में भूमिका निभाते थे। पूछताछ में मिले बयानों के आधार पर अधिकारियों ने वित्तीय लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों की गहन समीक्षा शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि कुछ मामलों में RGHS कार्ड धारकों की जानकारी का उपयोग उनकी प्रत्यक्ष मौजूदगी के बिना किया गया। आरोप है कि कार्ड नंबरों के आधार पर परामर्श पर्चियां तैयार कराई गईं और बाद में उन पर महंगी जांचें दर्ज कर दी गईं। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजना के दुरुपयोग और पहचान संबंधी धोखाधड़ी के गंभीर पहलू भी सामने आ सकते हैं।

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जांच के दौरान अस्पताल रिकॉर्ड, डायग्नोस्टिक सेंटर के दस्तावेज और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज का भी मिलान किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में जिन तारीखों और समय पर जांच पर्चियां जारी दिखाई गईं, उन समयावधियों में संबंधित मरीज अस्पताल परिसर में मौजूद नहीं थे। हालांकि इन दावों की अंतिम पुष्टि विस्तृत तकनीकी और दस्तावेजी जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले में सामने आए कथित तौर-तरीकों से संकेत मिलता है कि योजना के अंतर्गत अधिकतम आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई गई हो सकती है। जांचकर्ता यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या इस नेटवर्क में अन्य निजी संस्थान, एजेंट या तकनीकी सहयोगी भी शामिल थे। कई डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि डेटा में किसी प्रकार की हेरफेर, ओवरराइटिंग या रिकॉर्ड में बदलाव के प्रमाण जुटाए जा सकें।

स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि RGHS जैसी योजनाएं सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को चिकित्सा सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई जाती हैं। ऐसे में यदि किसी संगठित नेटवर्क द्वारा फर्जी क्लेम के जरिए धन निकाले जाने के आरोप सही साबित होते हैं तो इससे न केवल सरकारी संसाधनों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों के हित भी प्रभावित होते हैं।

फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे और पूछताछ, गिरफ्तारियां तथा कानूनी कार्रवाई संभव है। जैसे-जैसे डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और चिकित्सा दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ेगी, इस कथित घोटाले की परतें और खुलने की संभावना जताई जा रही है।

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