मुजफ्फरनगर में कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के सहारे फर्म बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग करने का आरोप; ₹10.68 करोड़ की कर चोरी की जांच के बीच आर्थिक अपराध शाखा की कार्रवाई, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में

फर्जी फर्म, नकली बिल और ₹10.68 करोड़ का खेल: GST घोटाले में बड़ा एक्शन, टैक्स चोरी के आरोपी की गिरफ्तारी से खुलीं नई परतें

Roopa
By Roopa
5 Min Read

लखनऊ/मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था के दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े मामले में आर्थिक अपराध जांच एजेंसी ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए ₹10.68 करोड़ की कथित कर चोरी से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार मामला केवल टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म का पंजीकरण, नकली बिलों का इस्तेमाल और अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

मामले की जांच के दौरान सामने आया कि मुजफ्फरनगर में संचालित एक फर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर GST नियमों को दरकिनार कर वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि फर्म को जाली दस्तावेजों और भ्रामक जानकारियों के आधार पर पंजीकृत कराया गया था। बाद में उसी इकाई का उपयोग ऐसे लेनदेन दिखाने के लिए किया गया, जिनके आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया जा सके।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी फर्म का संचालक बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज और बिल तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न संस्थाओं को ऐसा कर लाभ उपलब्ध कराया गया, जिसके लिए वे पात्र नहीं थीं। साथ ही वास्तविक कर देनदारियों को भी कथित तौर पर छिपाया गया। प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया के कारण सरकार को लगभग ₹10.68 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ।

मामले की शुरुआत तब हुई जब कर अधिकारियों को कुछ लेनदेन और व्यावसायिक गतिविधियों में असामान्यताएं दिखाई दीं। रिकॉर्ड की जांच के दौरान यह संदेह मजबूत हुआ कि संबंधित फर्म वास्तविक कारोबारी गतिविधियों की तुलना में कागजी लेनदेन के जरिए अधिक सक्रिय दिखाई जा रही थी। इसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई, जिसमें दस्तावेजों, कर रिटर्न, बैंकिंग लेनदेन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों से संकेत मिला है कि फर्जी बिलिंग के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ एक से अधिक संस्थाओं तक पहुंचाया गया हो सकता है। यही कारण है कि अब जांच केवल एक फर्म या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रखी गई है। वित्तीय लेनदेन की श्रृंखला और उससे जुड़े संभावित लाभार्थियों की पहचान की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित कर धोखाधड़ी का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार GST प्रणाली में इनपुट टैक्स क्रेडिट एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य करों के दोहरे प्रभाव को कम करना है। हालांकि जब फर्जी कंपनियां और नकली बिलिंग नेटवर्क इस व्यवस्था का दुरुपयोग करते हैं, तो इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है और ईमानदार कारोबारियों के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल भी प्रभावित होता है। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में फर्जी ITC नेटवर्क के खिलाफ देशभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

वित्तीय अपराधों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में डिजिटल ट्रेल सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होते हैं। बैंक खातों की गतिविधियां, ई-वे बिल, GST रिटर्न, मोबाइल संचार और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज अक्सर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में मदद करते हैं। जांच एजेंसियां इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए कथित नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों की पहचान करने में जुटी हैं।

फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल जारी है। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां तथा अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस मामले को राज्य में GST धोखाधड़ी से जुड़े प्रमुख मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसकी जांच आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण खुलासे कर सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article