हैदराबाद। ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) के कर्मचारी को फर्जी निवेश योजना में फंसाकर ₹2.22 करोड़ की ठगी कर ली गई। साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया पर आकर्षक निवेश विज्ञापनों के जरिए पीड़ित को अपने जाल में फंसाया, फिर कथित वित्तीय सलाहकारों और शेयर बाजार विशेषज्ञों के नाम पर चलाए जा रहे व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से उसका भरोसा जीता। कई महीनों तक सुनियोजित तरीके से चलाए गए इस खेल में पीड़ित को नकली निवेश ऐप पर करोड़ों रुपये का मुनाफा दिखाया गया, लेकिन जब उसने रकम निकालने की कोशिश की तो पूरा धोखाधड़ी नेटवर्क बेनकाब हो गया।
मामले की जानकारी के अनुसार, हैदराबाद के सनतनगर क्षेत्र में रहने वाले पीड़ित की नजर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रहे कुछ निवेश संबंधी विज्ञापनों पर पड़ी। इन विज्ञापनों में कम समय में आकर्षक रिटर्न और सुरक्षित निवेश का दावा किया गया था। बेहतर मुनाफे की संभावना देखकर पीड़ित ने विज्ञापन में रुचि दिखाई, जिसके बाद कथित निवेश सलाहकारों ने उससे संपर्क किया।
प्रारंभिक बातचीत के दौरान आरोपियों ने स्वयं को अनुभवी वित्तीय विशेषज्ञ और स्टॉक मार्केट विश्लेषक बताया। इसके बाद पीड़ित को कई व्हाट्सएप समूहों में जोड़ा गया, जहां बड़ी संख्या में सदस्य दिखाई दे रहे थे। समूहों में नियमित रूप से निवेश सलाह, शेयर बाजार विश्लेषण और कथित सफल निवेशकों के अनुभव साझा किए जाते थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन समूहों का उद्देश्य संभावित निवेशकों के बीच विश्वसनीयता का माहौल तैयार करना था।
धीरे-धीरे साइबर अपराधियों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और उसे विभिन्न निवेश योजनाओं में धन लगाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में अपेक्षाकृत छोटी रकम निवेश कराई गई और बाद में बड़े निवेश के लिए प्रोत्साहित किया गया। अपराधियों ने दावा किया कि निवेश विशेष ट्रेडिंग अवसरों और उच्च प्रतिफल देने वाली योजनाओं में लगाया जा रहा है।
विश्वास बढ़ाने के लिए आरोपियों ने पीड़ित को एक कथित निवेश एप्लीकेशन का एक्सेस दिया। इस ऐप में निवेश की गई राशि लगातार बढ़ती हुई दिखाई जाती थी। कुछ समय बाद ऐप पर लगभग ₹3.1 करोड़ की कुल राशि और भारी लाभ प्रदर्शित होने लगा। स्क्रीन पर दिखाई देने वाले आंकड़ों को देखकर पीड़ित को विश्वास हो गया कि उसका निवेश सफल रहा है और उसे असाधारण मुनाफा प्राप्त हुआ है।
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हालांकि असली सच्चाई तब सामने आई जब पीड़ित ने अपने खाते से धन निकालने का प्रयास किया। आरोपियों ने निकासी प्रक्रिया शुरू करने के बदले अतिरिक्त भुगतान की मांग की। कभी टैक्स, कभी प्रोसेसिंग शुल्क और कभी अन्य प्रशासनिक शुल्क के नाम पर और रकम जमा कराने को कहा गया। जब लगातार नई-नई मांगें सामने आने लगीं और भुगतान के बावजूद निकासी संभव नहीं हुई, तब पीड़ित को संदेह हुआ कि वह एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार बन चुका है।
इसके बाद पीड़ित ने साइबर अपराध शाखा से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल वॉलेट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की पड़ताल कर रही हैं जिनका उपयोग धन एकत्र करने और लेनदेन छिपाने के लिए किया गया।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि निवेश आधारित साइबर ठगी में अपराधी सबसे पहले भरोसा बनाने की रणनीति अपनाते हैं। वे सोशल मीडिया विज्ञापन, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप ग्रुप और नकली विशेषज्ञों के माध्यम से निवेशकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि वे वैध वित्तीय संस्थानों से जुड़े हैं। इसके बाद नकली डैशबोर्ड पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाकर लोगों को अधिक धन निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता है। जब निवेशक रकम निकालना चाहता है, तब टैक्स, कमीशन या प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर अतिरिक्त भुगतान मांगकर उसे और नुकसान पहुंचाया जाता है।
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले संबंधित संस्था की वैधता की जांच करें, केवल सोशल मीडिया विज्ञापनों के आधार पर निवेश न करें और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न के दावों से सतर्क रहें। अधिकारियों ने भी नागरिकों से अपील की है कि किसी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव या साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
