टोंक/भीलवाड़ा: साइबर अपराध की गंभीर जांच में, टोंक पुलिस की जिला विशेष टीम ने शनिवार को ₹90 लाख की ऑनलाइन ठगी के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि आरोपियों ने फेक ट्रेड और इंश्योरेंस लिंक का इस्तेमाल कर पीड़ितों को फंसाया और 100 से अधिक फेक मोबाइल सिम कार्डों के माध्यम से रकम हड़पी।
गिरफ्तार आरोपी हैं—नमो नरायण मीणा और आकाश मीणा, जो टोंक के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए कई फेक लिंक भेजकर लोगों को ठगा। इस मामले में राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल (NCRP) पर 21 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं।
तलाशी के दौरान अधिकारियों को बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, कई मोबाइल फोन और दो हाई-एंड पावर बाइक बरामद हुए। ये वस्तुएं साइबर ठगी से प्राप्त धन के रूप में मिलीं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन हंटर पुलिस मुख्यालय द्वारा साइबर अपराध की रोकथाम के लिए चलाया जा रहा है। आरोपी पुरानी टोंक पुलिस थाना क्षेत्र से हिरासत में लिए गए। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
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पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग पहचान पर कई फेक मोबाइल सिम चला रहे थे। “उन्होंने ठगी के लिए फेक सिम बनाए और व्हाट्सएप के माध्यम से लिंक भेजकर आम नागरिकों को फर्जी ट्रेड और इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म से धोखा दिया,” पुलिस सूत्र ने बताया। अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों से अन्य स्थानों पर हुई साइबर ठगी के संबंध में भी पूछताछ जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे साइबर फ्रॉड अब अधिक परिष्कृत हो गए हैं और किसी भी सामान्य इंटरनेट उपयोगकर्ता को निशाना बना सकते हैं। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीक और फेक खातों का इस्तेमाल करके लोगों को आसानी से बहका लेते हैं। ज्यादातर लोग लिंक या प्लेटफॉर्म की प्रमाणिकता जाँचने के बजाय अपने बैंकिंग डिटेल्स साझा कर देते हैं।”
प्रो. सिंह ने कहा कि कई सिम कार्ड का इस्तेमाल करके अपराधी अपनी पहचान और स्थान छिपा सकते हैं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। “ये नेटवर्क कई शहरों और राज्यों में काम करते हैं, इसलिए पीड़ितों को तुरंत संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करनी चाहिए।”
पुलिस ने बताया कि जांच अभी भी जारी है और अन्य सहयोगियों की पहचान हो सकती है। “हालांकि ये दो मुख्य आरोपी हैं, लेकिन हम मोबाइल और बैंकिंग डेटा का विश्लेषण कर अन्य सहयोगियों का पता लगा रहे हैं,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।
यह मामला जनता के लिए चेतावनी भी है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश या कमाई के अवसर को बिना जांचे-परखे स्वीकार न करें। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें, OTP या बैंकिंग जानकारी साझा न करें और ऑनलाइन ट्रेडिंग या इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहें।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि प्रभावी पुलिसिंग और साइबर इंटेलिजेंस बड़े वित्तीय फ्रॉड को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकारियों ने राज्य और राष्ट्रीय साइबर क्राइम विभागों के साथ सहयोग कर जांच और डेटा साझा किया।
पुलिस ने कहा कि जैसे-जैसे अन्य शिकायतों की जांच होगी, और गिरफ्तारी हो सकती है। जिला टीम अब भी बरामद उपकरणों और खातों का विश्लेषण कर पूरे फ्रॉड नेटवर्क का नक्शा तैयार कर रही है।
यह मामला कानून प्रवर्तन और साइबर विशेषज्ञों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता को दर्शाता है, ताकि वित्तीय साइबर अपराधों को रोककर नागरिक सुरक्षित और जागरूक रह सकें।
