पिंपरी-चिंचवड़ में पहली बार साइबर अपराधियों पर सख्त कानून लागू; अंतरराज्यीय नेटवर्क और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन का खुलासा

“₹11 करोड़ के साइबर रैकेट पर MCOCA का शिकंजा: फर्जी ट्रेडिंग ऐप गिरोह के 9 आरोपी गिरफ्तार”

Roopa
By Roopa
5 Min Read

साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच पिंपरी-चिंचवड़ में एक ऐतिहासिक कार्रवाई सामने आई है, जहां पहली बार संगठित साइबर ठगी के मामले में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाया गया है। करीब ₹11.13 करोड़ की ठगी को अंजाम देने वाले फर्जी शेयर मार्केट ट्रेडिंग ऐप गिरोह के 9 आरोपियों को इस सख्त कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई को देश में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा कदम माना जा रहा है।

मामला फरवरी महीने का है, जब एक वरिष्ठ नागरिक को शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी का शिकार बनाया गया। आरोपियों ने एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश का झांसा दिया और धीरे-धीरे पीड़ित से ₹11 करोड़ से अधिक की रकम ठग ली। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ।

जांच के दौरान सामने आया कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए थे। आरोपियों की पहचान अभय पाटिल, शिवतेज पोटे, युवराज उर्फ संतोष मुदालियार, रॉनी उर्फ पंकज गिरिगोसवामी, प्रल्हाद गदारी, उमेश भट्ट, महेश उदचने, राहुल मौर्य और शेख अब्दुल रईस के रूप में हुई है। ये सभी मिलकर निवेशकों को फर्जी ऐप के जरिए लुभाते थे और उन्हें अधिक रिटर्न का भरोसा देकर बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित करते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह द्वारा ठगी की गई रकम को सीधे बैंक खातों में रखने के बजाय पहले विभिन्न खातों के जरिए घुमाया जाता था और बाद में उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज दिया जाता था। इस प्रक्रिया से न केवल पैसे के स्रोत को छिपाया जाता था, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना भी मुश्किल हो जाता था।

अधिकारियों को जब इस गिरोह के संगठित नेटवर्क और लगातार हो रही ठगी की जानकारी मिली, तो आरोपियों पर MCOCA लगाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे मंजूरी मिलने के बाद यह मामला संगठित अपराध की श्रेणी में दर्ज किया गया। इसके बाद कई राज्यों में छापेमारी की गई, जिसमें महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान और अन्य स्थानों से भी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने विभिन्न बैंक खातों में जमा ₹2.65 करोड़ की राशि को फ्रीज किया, जिसे बाद में अदालत के आदेश पर पीड़ित को लौटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह भी सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों तक फैला हुआ था और इसके कुछ अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी हो सकते हैं।

इस पूरे ऑपरेशन में तकनीकी जांच और फील्ड एक्शन का संयोजन देखने को मिला, जिसके जरिए आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल डेटा के आधार पर पूरे नेटवर्क को ट्रैक किया गया। जांच अभी भी जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला इस बात का संकेत है कि अब साइबर ठगी पारंपरिक अपराधों जितनी ही संगठित और खतरनाक हो चुकी है। ऐसे मामलों में अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर न केवल लोगों को ठगते हैं, बल्कि पैसे को कई स्तरों पर छिपाकर कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं।

प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर अपराधी अब “सोशल इंजीनियरिंग और तकनीकी हेरफेर का मिश्रण” इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार, फर्जी निवेश ऐप और हाई-रिटर्न के वादे सबसे आम हथियार बन चुके हैं, जिनसे आम नागरिक आसानी से जाल में फंस जाते हैं।

यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है कि अब साइबर अपराध को हल्के में नहीं लिया जाएगा और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त से सख्त कानून लागू किए जाएंगे। साथ ही, यह आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे किसी भी निवेश या ऑनलाइन ऑफर के प्रति सतर्क रहें और बिना सत्यापन के किसी भी प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से बचें।

हमसे जुड़ें

Share This Article