बेंगलुरु। साइबर ठगी के बदलते तरीकों के बीच अब ‘म्यूल अकाउंट’ का जाल आम लोगों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। बेंगलुरु के विजयनगर इलाके में रहने वाली 50 वर्षीय एक दर्जी महिला के साथ ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां ₹2,000 महीने की मामूली आय के लालच में खुलवाया गया बैंक खाता साइबर अपराधियों के बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन गया। इस खाते के जरिए करीब ₹60.93 लाख के संदिग्ध लेनदेन किए गए, जिसका खुलासा बैंक द्वारा खाते को फ्रीज किए जाने के बाद हुआ।
पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी कर्णा ने उसे एक परिचित महिला अंजनम्मा के माध्यम से संपर्क किया। आरोप है कि कर्णा ने खुद को एक कारोबारी बताते हुए महिला को समझाया कि उसे अपने व्यापारिक लेनदेन के लिए एक अतिरिक्त बैंक खाते की आवश्यकता है। उसने महिला को भरोसा दिलाया कि खाते का उपयोग केवल वैध लेनदेन के लिए किया जाएगा और इसके बदले उसे हर महीने ₹2,000 दिए जाएंगे।
आर्थिक तंगी और अतिरिक्त आमदनी की उम्मीद में महिला इस प्रस्ताव के लिए तैयार हो गई। आरोपी के कहने पर उसने अपने पहचान पत्र, फोटो और अन्य जरूरी दस्तावेज व्हाट्सऐप के जरिए साझा किए। इसके बाद 4 मार्च 2024 को उसने डोड्डाबल्लापुर स्थित एक बैंक शाखा में अपने नाम से बचत खाता खुलवाया और उसमें अपना मोबाइल नंबर लिंक किया। आरोप है कि इसके बाद खाते का नियंत्रण पूरी तरह आरोपी को सौंप दिया गया।
कुछ दिनों तक जब उसे कोई भुगतान नहीं मिला, तो महिला को संदेह हुआ। इसी बीच बैंक अधिकारियों ने उसे सूचित किया कि उसके खाते में असामान्य और संदिग्ध गतिविधियां पाई गई हैं, जिसके चलते खाता फ्रीज कर दिया गया है। जब वह बैंक पहुंची, तो उसे बताया गया कि उसके खाते के माध्यम से ₹60,93,780 की बड़ी राशि का लेनदेन हुआ है, जो कथित रूप से साइबर अपराध से जुड़ा है।
जांच में यह सामने आया कि महिला का खाता ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसका उपयोग अपराधी गिरोह अवैध पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं, ताकि असली स्रोत को छुपाया जा सके। इस तरह के खातों का इस्तेमाल अक्सर ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और निवेश घोटालों से प्राप्त रकम को सुरक्षित रूप से निकालने में किया जाता है।
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पीड़िता ने अपनी शिकायत में कर्णा और अंजनम्मा पर धोखाधड़ी और विश्वासघात का आरोप लगाया है। उसने कहा कि दोनों ने जानबूझकर उसे गुमराह किया और उसके बैंक खाते का गलत इस्तेमाल किया। उसने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
प्रारंभिक जांच के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि आरोपी किसी बड़े साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा है, जो भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाता है और उन्हें अवैध लेनदेन के लिए इस्तेमाल करता है। फिलहाल आरोपी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध प्रस्ताव के तहत बैंक खाता खोलना या अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराधी अब सीधे ठगी करने के बजाय आम नागरिकों को अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाकर अपराध को अंजाम दे रहे हैं, जिससे जांच प्रक्रिया भी जटिल हो जाती है।
साइबर सुरक्षा जानकारों का कहना है कि ‘म्यूल अकाउंट’ से जुड़े मामलों में अक्सर खाता धारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ जाता है, भले ही वह अनजाने में इसका हिस्सा बना हो। ऐसे में लोगों को जागरूक रहने और किसी भी वित्तीय गतिविधि में पूरी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
