महिला बनकर ऊंचे रिटर्न का झांसा देने का आरोप; लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और सिम कार्ड बरामद, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जांच तेज

₹1.26 करोड़ के ऑनलाइन निवेश घोटाले का पर्दाफाश: तमिलनाडु के तीन आरोपी गिरफ्तार, 100 से अधिक साइबर शिकायतों से जुड़े तार

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By Roopa
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पुडुचेरी। ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक कथित साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुडुचेरी साइबर क्राइम पुलिस ने तमिलनाडु के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला एक ऐसे निवेश घोटाले से जुड़ा है जिसमें एक व्यक्ति से ₹1.26 करोड़ का निवेश करवाया गया, लेकिन बाद में उसे अपनी रकम वापस निकालने की अनुमति नहीं दी गई। प्रारंभिक जांच में आरोपियों के तार देशभर में दर्ज अनेक साइबर शिकायतों से जुड़ते दिखाई दिए हैं।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नवनीत कृष्णन, संतोष कुमार और सतीश कुमार के रूप में की है। तीनों तमिलनाडु के विभिन्न जिलों से संबंधित बताए गए हैं। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, पांच बैंक पासबुक और तीन सिम कार्ड बरामद किए गए। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन उपकरणों में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद हो सकते हैं।

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक पीड़ित ने साइबर पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई कि उसने ऑनलाइन निवेश योजना के तहत ₹1.26 करोड़ जमा किए थे, लेकिन बाद में वह अपनी रकम निकालने में असफल रहा। शिकायत के अनुसार एक महिला कॉलर ने उससे संपर्क कर निवेश पर अत्यधिक और आकर्षक रिटर्न का वादा किया था। लगातार संपर्क और भरोसा कायम करने के बाद पीड़ित ने बड़ी धनराशि निवेश कर दी।

शिकायत मिलने के बाद साइबर अपराध इकाई ने विशेष जांच दल का गठन किया और डिजिटल ट्रेल, बैंकिंग रिकॉर्ड तथा संचार माध्यमों की जांच शुरू की। जांच के दौरान अधिकारियों ने धन के प्रवाह और तकनीकी गतिविधियों का विश्लेषण किया, जिसके आधार पर संदिग्धों का पता तमिलनाडु के करूर, नमक्कल और तिरुपुर जिलों तक पहुंचा। इसके बाद समन्वित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में इसी प्रकार की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित 100 से अधिक शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है। हालांकि इन मामलों की स्वतंत्र रूप से जांच की जा रही है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि आरोपियों का नेटवर्क व्यापक स्तर पर सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इन मामलों के बीच कोई संगठित संबंध मौजूद है।

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अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप और फर्जी निवेश वेबसाइटों के माध्यम से लोगों को ऊंचे मुनाफे का लालच देते हैं। शुरुआती चरण में छोटे निवेश पर लाभ दिखाकर विश्वास हासिल किया जाता है और बाद में बड़ी रकम जमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। जब निवेशक अपनी राशि निकालने का प्रयास करता है, तब विभिन्न बहानों से भुगतान रोक दिया जाता है या संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े साइबर अपराधों में सोशल इंजीनियरिंग सबसे प्रभावी हथियार बन चुकी है। उनके अनुसार अपराधी पहले भरोसा पैदा करते हैं, फिर लालच और मनोवैज्ञानिक दबाव का उपयोग कर पीड़ितों से बड़ी रकम निवेश करवाते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले कंपनी, प्लेटफॉर्म और दावों की स्वतंत्र रूप से जांच अवश्य करें।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया या अज्ञात व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले असामान्य रिटर्न के वादों पर भरोसा न करें। अधिकारियों ने कहा कि बैंक खाते, ओटीपी, केवाईसी दस्तावेज या अन्य संवेदनशील जानकारी अजनबियों के साथ साझा करने से बचना चाहिए। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर दी जानी चाहिए।

गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब बरामद डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच से और महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

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