महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पुलिस ने एक बड़े अवैध अंडाणु तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को लालच देकर बार-बार अंडाणु दान के लिए मजबूर करता था और उन्हें IVF केंद्रों में ले जाकर सर्जरी के जरिए अंडाणु निकालकर लाखों रुपये में बेचता था।
अधिकारियों के अनुसार अब तक कम से कम 20 महिलाओं के इस रैकेट का शिकार होने की आशंका है। पीड़ितों को प्रत्येक चक्र के लिए ₹25,000 से ₹30,000 दिए जाते थे, जबकि उनके अंडाणु ऊंची कीमत पर बेचे जाते थे। बार-बार हार्मोनल इंजेक्शन और प्रक्रियाओं के कारण कई महिलाओं को शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा।
आवासीय फ्लैट और सोनोग्राफी सेंटर से संचालन
पुलिस ने बताया कि यह अवैध कारोबार बदलापुर पूर्व के जोवेली इलाके में एक आवासीय अपार्टमेंट और एक सोनोग्राफी केंद्र से संचालित किया जा रहा था। एक पीड़िता द्वारा ठाणे उप-जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दी गई सूचना के बाद छापेमारी की गई।
छापे के दौरान हार्मोन इंजेक्शन की तस्वीरें, सोनोग्राफी रिपोर्ट, फर्जी नामों वाले शपथपत्र, नकली दस्तावेज और मोबाइल फोन में वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्य बरामद किए गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि इन दस्तावेजों का उपयोग पीड़ितों की पहचान छिपाने और अवैध प्रक्रियाओं को वैध दिखाने के लिए किया जाता था।
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बार-बार दान के लिए दबाव
जांच में सामने आया है कि महिलाओं को अंडाणु उत्पादन बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे और नियमित अंतराल पर सोनोग्राफी कराई जाती थी। अंडाणु तैयार होने पर उन्हें IVF केंद्रों में ले जाकर सर्जिकल प्रक्रिया से निकाला जाता था।
पुलिस के मुताबिक कई पीड़ितों को बार-बार दान के लिए तैयार किया गया, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा। अधिकारियों ने इसे शारीरिक शोषण का मामला बताया है।
रैकेट का स्थानांतरण और नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पहले वांगनी क्षेत्र में सक्रिय था और हाल ही में बदलापुर में स्थानांतरित हुआ था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और क्या इसमें IVF केंद्रों, डॉक्टरों या अस्पतालों की भूमिका थी।
अधिकारियों ने कहा कि इस अवैध कारोबार का कुल लेनदेन करोड़ों रुपये में हो सकता है और जांच के दौरान कई प्रभावशाली नाम सामने आने की संभावना है।
कानूनी कार्रवाई और जांच
मामले में भारतीय न्याय संहिता और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (नियमन) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुलक्षणा गाडेकर (44), अश्विनी चाबुकस्वर (29) और मंजुषा वानखेड़े (46) के रूप में हुई है।
पुलिस ने कहा कि पीड़ित महिलाओं की पहचान कर उन्हें चिकित्सा सहायता और परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही जब्त मोबाइल फोन और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
मानव तस्करी जैसे पैटर्न की आशंका
जांचकर्ताओं का कहना है कि रैकेट की कार्यप्रणाली मानव तस्करी से मिलती-जुलती है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाकर उन्हें बार-बार शारीरिक प्रक्रियाओं के लिए मजबूर किया जाता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अनियंत्रित और अवैध अंडाणु दान से महिलाओं के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं।
पुलिस ने संकेत दिया है कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और इस अवैध प्रजनन नेटवर्क में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
