देशभर में तेजी से फैल रहा एक नया ऑनलाइन फ्रॉड अभियान लोगों को फर्जी OTT सब्सक्रिप्शन ऑफर के जरिए निशाना बना रहा है। इसमें Netflix, Amazon Prime Video, JioHotstar, Zee5 और Sony LIV जैसे प्रीमियम प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस सिर्फ ₹299 में देने का दावा किया जा रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी ऑफर पूरी तरह फर्जी हैं और इनका उद्देश्य लोगों से पैसे और निजी बैंकिंग जानकारी चुराना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबर अपराधी WhatsApp और Telegram पर फर्जी ग्रुप और चैनल बनाकर “OTT कॉम्बो पैक” के नाम से बेहद सस्ते ऑफर प्रचारित कर रहे हैं। ये स्कीम्स दावा करती हैं कि एक ही पैकेज में कई OTT प्लेटफॉर्म्स की सदस्यता दी जाएगी, वह भी बाजार दर से बहुत कम कीमत पर, जिससे लोग आसानी से आकर्षित हो जाते हैं।
जैसे ही कोई व्यक्ति इन ऑफर्स में रुचि दिखाता है, ठग उससे सीधे संपर्क करते हैं और निजी जानकारी जुटाना शुरू कर देते हैं। पीड़ितों से मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, UPI डिटेल्स और कई बार बैंकिंग जानकारी तक मांगी जाती है, यह कहकर कि सब्सक्रिप्शन एक्टिव करना है। इसके बाद QR कोड या पेमेंट लिंक भेजे जाते हैं, जो असली लगते हैं लेकिन असल में पैसे ठगों के खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, भुगतान के बाद पीड़ितों के सामने तीन स्थितियां बनती हैं—या तो कोई सब्सक्रिप्शन एक्टिव नहीं होता, या ठग गायब हो जाते हैं, या फिर पीड़ित का डेटा भविष्य के फिशिंग और अन्य फ्रॉड में इस्तेमाल किया जाता है। कई मामलों में “एक्टिवेशन फीस”, “सिक्योरिटी डिपॉजिट” और “वेरिफिकेशन चार्ज” के नाम पर बार-बार पैसे वसूले जाते हैं।
भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता इस तरह के फ्रॉड को और आसान बना रही है। अलग-अलग सब्सक्रिप्शन की बढ़ती कीमतों के कारण लोग सस्ते कॉम्बो ऑफर्स की ओर आकर्षित हो जाते हैं। ठग इसी मांग का फायदा उठाकर फर्जी लाइफटाइम प्लान, स्टूडेंट डिस्काउंट और लिमिटेड टाइम ऑफर्स के नाम पर जाल बिछाते हैं।
अधिकारियों ने साफ किया है कि Netflix, Prime Video, JioHotstar, Sony LIV और Zee5 जैसी सेवाएं केवल आधिकारिक ऐप्स और वेबसाइट्स के माध्यम से ही उपलब्ध होती हैं। किसी भी तीसरे पक्ष द्वारा बेहद सस्ते दाम में दिए जा रहे बंडल ऑफर्स पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
साइबर एजेंसियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही OTP, UPI PIN या बैंक डिटेल्स साझा करें। ऐसा करने से तुरंत आर्थिक नुकसान हो सकता है।
किसी भी संदिग्ध धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत बैंक से संपर्क कर ट्रांजैक्शन ब्लॉक करने, UPI बंद करने और पासवर्ड बदलने की सलाह दी गई है। साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करने को कहा गया है।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम तेजी से बढ़ा है, जिससे सुविधा तो बढ़ी है लेकिन साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ गया है। OTT स्कैम अब बड़े डिजिटल फ्रॉड पैटर्न का हिस्सा बन चुके हैं, जहां लोगों को आकर्षक ऑफर्स और दबाव के जरिए तुरंत भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है।
साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार, ऐसे फ्रॉड संगठित नेटवर्क के जरिए चलाए जाते हैं, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। पैसे को कुछ ही मिनटों में कई खातों और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए आगे ट्रांसफर कर दिया जाता है।
इस संदर्भ में फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन ने भी चेतावनी दी है कि ऐसे स्कैम अब और अधिक उन्नत हो गए हैं, जहां सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी इंटरफेस और तेज़ी से फंड ट्रांसफर तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। संस्था के अनुसार, साइबर अपराधी अब तकनीक से ज्यादा मानव मनोविज्ञान का उपयोग कर रहे हैं।
इस बीच, प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने भी ऐसे मामलों पर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि साइबर ठग भरोसा जीतने के लिए बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करते हैं और फर्जी डैशबोर्ड, नकली प्रॉफिट और आकर्षक ऑफर्स के जरिए लोगों को फंसाते हैं। उनके अनुसार, “ऐसे अपराधी तकनीक से ज्यादा मानव व्यवहार और लालच का फायदा उठाते हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।”
अधिकारियों और विशेषज्ञों ने दोहराया है कि कोई भी असली OTT सेवा इतनी कम कीमत में मल्टी-प्लेटफॉर्म प्रीमियम एक्सेस नहीं देती। इसलिए किसी भी अनजान या अविश्वसनीय ऑफर से दूर रहना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
