हैदराबाद में एक बड़ा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें 74 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर से ₹3.26 करोड़ की ठगी कर ली गई। यह पूरा मामला फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए रची गई एक सुनियोजित साइबर साजिश से जुड़ा बताया जा रहा है।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित हैदराबाद के हाइडरगुडा इलाके के निवासी हैं और उन्होंने अगस्त 2025 में इस धोखाधड़ी की शुरुआत का सामना किया। 9 अगस्त 2025 को फेसबुक पर उन्हें एक महिला ने संपर्क किया, जिसने अपना नाम ‘कल्कि रिषिता रेड्डी’ बताया। उसने खुद को चाय ट्रेडिंग कंपनी की सीईओ और क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग व माइनिंग की विशेषज्ञ बताया।
इसके बाद 22 अगस्त 2025 को आरोपी महिला ने पीड़ित को एक निवेश प्लेटफॉर्म का लिंक भेजा और उसमें रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहा। उसने यह भी दावा किया कि उसने पहले क्रिप्टोकरेंसी में हुए ₹7 करोड़ के नुकसान को सफलतापूर्वक रिकवर किया है, जिससे पीड़ित का भरोसा और मजबूत हुआ।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने पीड़ित को स्टेप-बाय-स्टेप अकाउंट बनवाने में मदद की और अपने रेफरेंस नंबर के जरिए उसे प्लेटफॉर्म पर जोड़ दिया। इसके बाद प्लेटफॉर्म पर पीड़ित को लगातार “माइनिंग प्रॉफिट” और बढ़ते हुए रिटर्न दिखाए जाते रहे, जिससे उसे यह सिस्टम पूरी तरह वास्तविक और लाभदायक लगा।
आरोपियों ने कथित तौर पर प्लेटफॉर्म के इंटरफेस में हेरफेर कर फर्जी मुनाफा दिखाया। एक समय पर पीड़ित को बताया गया कि वह लगभग 1 लाख अमेरिकी डॉलर निकाल सकता है, जिससे उसका विश्वास और बढ़ गया। लेकिन जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उससे अलग-अलग बहानों से अतिरिक्त भुगतान मांगा जाने लगा।
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इन चार्जेस में टैक्स क्लियरेंस फीस, पेपाल प्रोसेसिंग चार्ज, कंप्लायंस फीस और अन्य “स्टैच्यूटरी वेरिफिकेशन फीस” शामिल थीं। हर बार कहा गया कि यह भुगतान उसके मुनाफे को रिलीज करने के लिए जरूरी है।
धीरे-धीरे पीड़ित से बड़ी रकम वसूली जाती रही। 16 मार्च 2026 को उससे अंतिम “विदड्रॉल ऑथराइजेशन फीस” के नाम पर 8,000 अमेरिकी डॉलर की मांग की गई। इसी दौरान उसे शक हुआ और उसने प्लेटफॉर्म की स्वतंत्र जांच शुरू की, जिसके बाद ठगी का पूरा खुलासा हुआ।
तब तक वह कुल ₹3.26 करोड़ का नुकसान उठा चुका था। इसके बाद उसने तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला उन बढ़ते निवेश फ्रॉड्स का हिस्सा है, जिनमें सोशल मीडिया के जरिए वरिष्ठ नागरिकों और पेशेवरों को निशाना बनाया जाता है। इनमें फर्जी प्रॉफिट डैशबोर्ड, नकली ट्रेडिंग गतिविधियां और बार-बार शुल्क वसूली जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसे मामलों में अक्सर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल होते हैं, जिससे धन की ट्रैकिंग और रिकवरी बेहद कठिन हो जाती है। रकम को कई बैंक खातों और डिजिटल चैनलों के जरिए तुरंत आगे ट्रांसफर कर दिया जाता है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी निवेश ऑफर पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा न करें। खासकर क्रिप्टोकरेंसी और हाई-रिटर्न स्कीम्स से जुड़े मामलों में अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के डिजिटल फुटप्रिंट, बैंक खातों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटी हुई हैं। यह भी जांच की जा रही है कि क्या यह एक अकेले आरोपी का काम था या इसके पीछे कोई संगठित साइबर फ्रॉड गिरोह सक्रिय है।
