भारत में 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर केंद्र सरकार की चिंताएं और गहरी हो गई हैं। गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की एक आंतरिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्लेटफॉर्म का उपयोग बड़े पैमाने पर बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार, साइबर धोखाधड़ी, फर्जी नौकरी घोटालों और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संबंधित एजेंसियां टेलीग्राम पर संचालित संदिग्ध समूहों और चैनलों की सक्रिय निगरानी कर रही हैं।
करीब 35 पन्नों की यह रिपोर्ट हाल ही में एक अदालत में सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई थी। यह दस्तावेज उस कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा था जिसमें टेलीग्राम पर लगाए गए एक सप्ताह के प्रतिबंध का बचाव किया गया। यह प्रतिबंध उस समय लगाया गया था जब आरोप लगे थे कि NEET परीक्षा का प्रश्नपत्र प्लेटफॉर्म के माध्यम से लीक किया गया था। हालांकि बाद में प्रतिबंध हटा लिया गया, लेकिन कुछ सुविधाओं पर सीमित नियंत्रण जारी रखा गया।
रिपोर्ट में टेलीग्राम की गोपनीयता संरचना को भी चिंता का विषय बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ता बिना अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए संवाद कर सकते हैं, जिससे संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान और ट्रैकिंग अधिक कठिन हो जाती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही विशेषता साइबर अपराधियों को आकर्षित करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 से अब तक टेलीग्राम से जुड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों को लेकर 6.88 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों से जुड़े कथित वित्तीय नुकसान का अनुमान लगभग 75 करोड़ अमेरिकी डॉलर, यानी ₹6,400 करोड़ से अधिक बताया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि साइबर अपराधी बंद समूहों और निजी चैनलों का उपयोग कर निवेश घोटाले, नौकरी धोखाधड़ी, फर्जी लोन ऑफर और अन्य वित्तीय अपराधों को अंजाम देते हैं।
जांच एजेंसियों ने रिपोर्ट में ऐसे स्क्रीनशॉट भी शामिल किए हैं जिनमें कथित तौर पर फर्जी नौकरी विज्ञापन, बाल यौन शोषण और शोषण संबंधी सामग्री तथा पायरेटेड फिल्में साझा किए जाने के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि जनवरी से मई 2026 के बीच ही टेलीग्राम से संबंधित 1,556 शिकायतें ऑनलाइन उत्पीड़न और बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार से जुड़ी दर्ज की गईं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि टेलीग्राम की संरचना अन्य लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से अलग है। बड़े सार्वजनिक चैनल और हजारों सदस्यों वाले समूहों की सुविधा के कारण सामग्री का प्रसार तेज़ी से होता है। जांचकर्ताओं का मानना है कि यही व्यवस्था कई बार अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
टेलीग्राम ने अदालत में अपने बचाव में कहा है कि उसकी आंतरिक समीक्षा के अनुसार अवैध सामग्री प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली कुल सामग्री का 0.1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है। कंपनी का यह भी दावा है कि उसने वर्षों से स्वचालित पहचान प्रणाली और अन्य तकनीकी उपायों के जरिए बाल यौन शोषण सामग्री के सार्वजनिक प्रसार को लगभग समाप्त कर दिया है। हालांकि सरकार और कंपनी के दावों के बीच मतभेद बना हुआ है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि एन्क्रिप्टेड और बड़े समूह आधारित प्लेटफॉर्म साइबर अपराधियों के लिए आकर्षक माध्यम बन सकते हैं, यदि उन पर पर्याप्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था न हो। उनके अनुसार फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी घोटाले, डिजिटल अरेस्ट, म्यूल अकाउंट नेटवर्क और डेटा लीक जैसे अपराधों में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने उपयोगकर्ताओं को किसी भी अनजान चैनल, निवेश प्रस्ताव या नौकरी ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करने की सलाह दी।
फिलहाल सरकार, जांच एजेंसियां और टेलीग्राम के बीच जवाबदेही, गोपनीयता और उपयोगकर्ता सुरक्षा को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े कानूनी और नियामकीय कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालन के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकते हैं।
