चेन्नई। तमिलनाडु में कथित ₹20 करोड़ के गोल्ड कॉइन निवेश घोटाले ने नया मोड़ ले लिया है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर सहित दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि निवेश योजना को लोकप्रिय बनाने और निवेशकों को जोड़ने में पुलिस अधिकारी की भूमिका हो सकती है। मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग और निवेशकों के बीच व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार, यह मामला एक बैंक कर्मचारी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने एक निवेश योजना में धन लगाया था, लेकिन बाद में उसे न तो वादा किए गए लाभ मिले और न ही निवेश की गई राशि वापस मिली। शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई, जिसके बाद योजना के कथित प्रमोटर प्रभुमणि और रॉयापुरम ऑल वुमन पुलिस स्टेशन में तैनात इंस्पेक्टर शीला मैरी को प्राथमिकी में नामजद किया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 2023 में एक व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से इस निवेश योजना का प्रचार-प्रसार किया गया था। निवेशकों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर सोने के सिक्के उपलब्ध कराने का दावा किया गया। इसके साथ ही हर महीने आकर्षक रिटर्न देने का भी वादा किया गया। योजना को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए कथित तौर पर एक कंपनी का गठन किया गया था, जिसके जरिए पूरे निवेश मॉडल को संचालित किया गया।
जांच अधिकारियों का मानना है कि इस योजना को विश्वसनीयता इसलिए मिली क्योंकि इसका प्रचार पुलिस महकमे से जुड़े लोगों के बीच भी किया गया। सूत्रों के अनुसार, कई सेवारत और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों, उनके परिजनों तथा कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस योजना में निवेश किया था। बड़ी संख्या में निवेशकों के शामिल होने से योजना तेजी से फैलती चली गई और करोड़ों रुपये जुटा लिए गए।
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पुलिस के अनुसार, शुरुआत में कुछ निवेशकों को वास्तव में सोने के सिक्के वितरित किए गए थे। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा और अधिक निवेशक इस योजना से जुड़ते गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि शुरुआती चरण में लाभ और उत्पाद उपलब्ध कराकर योजना को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की गई, जिससे निवेशकों को यह विश्वास हो गया कि कारोबार वास्तविक और लाभदायक है।
हालांकि समय बीतने के साथ स्थिति बदलने लगी। आरोप है कि आयोजकों ने बड़ी मात्रा में धन एकत्र करने के बाद निवेशकों को वादा किए गए सोने के सिक्के और रिटर्न देना बंद कर दिया। कई निवेशकों ने जब अपने निवेश और लाभ के बारे में जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ और मामला आर्थिक अपराध शाखा तक पहुंच गया।
मामले में मुख्य आरोपी प्रभुमणि को गिरफ्तार कर लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि उससे पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि योजना कैसे संचालित की गई, निवेशकों से कितनी राशि जुटाई गई और धन का उपयोग किस प्रकार किया गया। दूसरी ओर, इंस्पेक्टर शीला मैरी से भी पूछताछ की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि उनकी भूमिका केवल निवेशक तक सीमित थी या उन्होंने योजना के प्रचार और निवेशकों को जोड़ने में कोई सक्रिय भूमिका निभाई थी।
इस बीच, चेन्नई पुलिस आयुक्त ने महिला इंस्पेक्टर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए अलग से विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। विभागीय जांच में यह देखा जाएगा कि क्या अधिकारी ने अपने पद का उपयोग निवेश योजना को बढ़ावा देने या लोगों का विश्वास जीतने के लिए किया था।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में निवेश घोटाले लगातार अधिक परिष्कृत होते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में अपराधी पहले विश्वसनीयता स्थापित करते हैं, शुरुआती निवेशकों को लाभ दिखाते हैं और फिर बड़ी संख्या में लोगों से धन जुटाकर भुगतान बंद कर देते हैं। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी योजना में निवेश करने से पहले उसकी वैधता, नियामकीय स्थिति और कारोबारी मॉडल की स्वतंत्र रूप से जांच अवश्य करें।
फिलहाल आर्थिक अपराध शाखा धन के प्रवाह, निवेशकों की संख्या और कथित घोटाले की वास्तविक राशि का आकलन कर रही है। जांच जारी है और आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
