सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बकाया ई-चालान वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने और कुछ वाहन तथा लाइसेंस सेवाओं पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

ट्रैफिक चालान नहीं भरा तो वाहन बेचने-ट्रांसफर करने पर रोक; ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण भी अटक सकता है

Team The420
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नई दिल्ली। ट्रैफिक नियम तोड़ने के बाद ई-चालान का भुगतान नहीं करने वाले वाहन मालिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि बकाया ट्रैफिक जुर्माने वाले वाहनों और उनके मालिकों को कई ऑनलाइन तथा वाहन संबंधी सेवाओं का लाभ न दिया जाए। इनमें वाहन पंजीकरण का नवीनीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र, वाहन का स्वामित्व हस्तांतरण और ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि देशभर में करीब ₹49,194.05 करोड़ के ई-चालान अब भी बकाया हैं। इनमें से ₹26,175.05 करोड़ की राशि अब तक वसूल की जा चुकी है। अदालत ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की वसूली और प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीक के अधिक प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने निर्देश दिया कि जिन वाहनों पर ई-चालान की राशि बकाया है, उन्हें केंद्रीय परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाए। इसका सीधा असर वाहन की बिक्री या स्वामित्व हस्तांतरण पर पड़ेगा। जब तक बकाया चालान का भुगतान नहीं किया जाता, संबंधित वाहन का ट्रांसफर रोका जा सकेगा।

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अदालत ने उन मामलों में भी सख्ती के निर्देश दिए हैं, जहां किसी वाहन या चालक के खिलाफ कई यातायात उल्लंघन दर्ज हैं। ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण को रोके जाने और पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है। इससे बार-बार यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा बढ़ेगा।

अदालत के निर्देशों का उद्देश्य केवल बकाया जुर्माने की वसूली तक सीमित नहीं है। इसमें वाहन पंजीकरण और लाइसेंस से जुड़ी सेवाओं को बकाया चालान से जोड़कर यातायात नियमों के पालन को प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है। अभी अलग-अलग राज्यों में चालान की निगरानी और वसूली की प्रक्रिया में अंतर होने के कारण कई मामलों में जुर्माना लंबे समय तक लंबित रहता है।

केंद्रीय परिवहन पोर्टल पर वाहन को ब्लैकलिस्ट करने की व्यवस्था के जरिए बकाया चालान वाले वाहनों की पहचान और उन पर कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है। वाहन बेचने या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया के दौरान बकाया सामने आने से पहले जुर्माना चुकाना जरूरी होगा। इससे ऐसे वाहनों के स्वामित्व में बदलाव पर भी प्रभाव पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यातायात प्रवर्तन में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। ई-चालान प्रणाली के जरिए वाहन, चालक और उल्लंघन से संबंधित रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच बेहतर समन्वय तथा ऑनलाइन सेवाओं को आपस में जोड़ने से बकाया मामलों की निगरानी आसान हो सकती है।

देश में यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में ई-चालान व्यवस्था का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। कैमरों, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान और अन्य डिजिटल माध्यमों से नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान की जा रही है। इसके बाद वाहन मालिक के पंजीकृत विवरण के आधार पर ई-चालान जारी किया जाता है। हालांकि, चालान जारी होने के बाद उसकी वसूली लंबे समय तक लंबित रहना प्रवर्तन व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद बकाया ई-चालान वाले वाहन मालिकों को वाहन संबंधी जरूरी सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर वाहन बेचने, स्वामित्व बदलने, पंजीकरण नवीनीकरण या फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र से जुड़े काम के समय लंबित चालान सामने आ सकता है।

अदालत के निर्देश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बकाया चालानों की वसूली के लिए एक अधिक सख्त और तकनीक आधारित व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कहते हैं। कई उल्लंघनों वाले मामलों में लाइसेंस पर कार्रवाई का प्रावधान यातायात नियमों के बार-बार उल्लंघन को रोकने के उद्देश्य से लागू किया जाएगा।

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