सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में बैंक और आयकर विभाग के फर्जी अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने वाले एक दंपती को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अलग-अलग राज्यों में पहचान और ठिकाने बदलकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कन्नौज जिले के भगवान मकरंद नगर निवासी रोहित वाजपेयी और उसकी पत्नी अन्नू के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि दोनों फिल्मी किरदार ‘बंटी-बबली’ की तर्ज पर लंबे समय से ठगी कर रहे थे और उनके खिलाफ पांच राज्यों के कई जिलों में 10 से अधिक प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों अगस्त में सीतापुर शहर के प्रेमनगर मोहल्ले में किराए का मकान लेकर रहने आए थे। यहां रोहित ने खुद को पंजाब नेशनल बैंक की मिश्रिख शाखा का प्रबंधक बताया, जबकि उसकी पत्नी अन्नू ने खुद को वित्त मंत्रालय में आयकर निरीक्षक बताया। कथित फर्जी पहचान और अधिकारी होने का प्रभाव दिखाकर दोनों ने मकान मालिक और स्थानीय लोगों के बीच भरोसा कायम किया।
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इसके बाद दंपती ने लोगों को नीलामी में मिलने वाला सस्ता सोना दिलाने और पुराने नोट बदलवाने का झांसा दिया। पुलिस के मुताबिक, इसी बहाने उन्होंने करीब ₹27 लाख की रकम जुटाई और इसके बाद दोनों वहां से फरार हो गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और उनके संभावित ठिकानों तथा आवाजाही से जुड़ी जानकारी जुटाई।
पुलिस के मुताबिक, 14 सितंबर को आरोपी ठगी की रकम लेकर इटावा से बुलाई गई एक कार में सीतापुर से भागे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने लगातार शहर और वाहन बदले। जांच के दौरान उनके आगरा, कोटा, बैतूल और चेन्नई जैसे शहरों में रहने की जानकारी सामने आई। पुलिस का दावा है कि दोनों अलग-अलग जगहों पर ठहरते और जरूरत के मुताबिक वाहन बदलते रहे, ताकि उनकी पहचान और लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो।
लगातार पीछा करने और तकनीकी जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से ₹14 लाख नकद, 38.740 ग्राम सोने के आभूषण, फर्जी पहचान पत्र और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद रकम कथित ठगी से जुड़ी है और आभूषण भी उसी रकम से खरीदे गए थे।
पूछताछ में पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बताया कि उन्होंने कथित ठगी के पैसे से बिना बिल के करीब ₹6 लाख के सोने के जेवर खरीदे थे। इसके अलावा करीब ₹50 हजार में दो मोबाइल फोन भी खरीदे गए। पुलिस के अनुसार, बची हुई रकम दोनों ने अलग-अलग शहरों की यात्राओं, होटलों में ठहरने और रोजमर्रा के खर्च में इस्तेमाल कर दी।
जांच में पुलिस को आरोपियों के कथित पुराने नेटवर्क की भी जानकारी मिली है। पुलिस का दावा है कि दोनों वर्ष 2005 से धोखाधड़ी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। वे बड़े और पॉश रिहायशी इलाकों में महंगे मकान किराए पर लेते थे। वहां रहकर खुद को अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति बताने के बाद स्थानीय लोगों से संपर्क बनाते और फिर अलग-अलग तरीकों से उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के झांसी, गाजियाबाद, वाराणसी, कुशीनगर और सीतापुर के अलावा मध्य प्रदेश के उज्जैन, रीवा और शिवपुरी, ओडिशा के भुवनेश्वर, राजस्थान के बीकानेर और बिहार के पूर्णिया में भी मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कथित ठगी की रकम करोड़ों रुपये बताई जा रही है। पुलिस अब अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों और आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि दंपती ने फर्जी पहचान पत्र और अधिकारी होने से जुड़े अन्य दस्तावेज कहां से हासिल किए। साथ ही, कथित ठगी में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को देखते हुए पुलिस उनके नेटवर्क और पुराने संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि बरामद नकदी, सोने के आभूषण, मोबाइल फोन, फर्जी पहचान पत्र और बैंकिंग लेनदेन समेत अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जा रहा है। गिरफ्तारी में शामिल पुलिस टीम को ₹25 हजार का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।
