Bombay High Court ने Samantha Ruth Prabhu के नाम, तस्वीर, आवाज और personality के कथित अनधिकृत इस्तेमाल वाले deepfake, morphed और AI-generated content पर अंतरिम रोक लगाई है।

सामंथा रुथ प्रभु: डीपफेक और एआई के गलत इस्तेमाल से परेशान अभिनेत्री पहुंचीं हाई कोर्ट; अदालत ने दिया ये आदेश

Team The420
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मुंबई। अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के गलत इस्तेमाल, डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभिनेत्री की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उनके नाम, तस्वीर, आवाज और पर्सनैलिटी से जुड़ी पहचान का कथित तौर पर अनधिकृत इस्तेमाल करने वाले आपत्तिजनक कंटेंट पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने ऐसे कंटेंट को हटाने का भी निर्देश दिया है।

डीपफेक और एआई से तैयार सामग्री को लेकर यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कई कलाकार अपनी तस्वीर, आवाज और डिजिटल पहचान के गलत इस्तेमाल को लेकर कानूनी कदम उठा रहे हैं। सामंथा ने भी अपनी याचिका में इंटरनेट पर मौजूद कई ऐसे कंटेंट की ओर अदालत का ध्यान दिलाया, जिनमें उनकी पहचान और व्यक्तित्व का कथित तौर पर बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया था।

सामंथा ने मांगी पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा

हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने अभिनेत्री की याचिका पर अंतरिम आदेश जारी किया। याचिका में सामंथा ने अपने ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ यानी अपनी पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़ी विशेषताओं के व्यावसायिक या अन्य अनधिकृत इस्तेमाल से सुरक्षा की मांग की थी।

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अभिनेत्री ने अदालत को बताया कि कई वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनकी पहचान से जुड़ी सामग्री कथित तौर पर बिना अनुमति प्रकाशित और प्रसारित की जा रही थी। इसमें मॉर्फ्ड तस्वीरों के अलावा डीपफेक और एआई की मदद से तैयार की गई सामग्री भी शामिल थी। याचिका में इस तरह की डिजिटल सामग्री को हटाने और भविष्य में उनके नाम तथा पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई।

एआई जनरेटेड आवाज और अश्लील वीडियो का भी आरोप

सामंथा की ओर से पेश वकील रश्मिन खांडेकर ने अदालत के सामने दलील दी कि इंटरनेट पर अभिनेत्री की मॉर्फ्ड तस्वीरें, एआई से तैयार आवाज और अश्लील वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं। याचिका में कहा गया कि इस तरह की सामग्री अभिनेत्री की पहचान का इस्तेमाल करते हुए उन्हें आपत्तिजनक तरीके से पेश करती है और उनकी पर्सनैलिटी को ‘ऑब्जेक्टिफाई’ करती है।

अदालत ने ऐसे कंटेंट के प्रकाशन और प्रसार पर अंतरिम रोक लगाते हुए अभिनेत्री के नाम, तस्वीर और आवाज के अनधिकृत इस्तेमाल को गंभीरता से लिया। आदेश का उद्देश्य इंटरनेट पर मौजूद ऐसी सामग्री के प्रसार को रोकना है, जिसमें अभिनेत्री की पहचान का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया है।

मौलिक अधिकारों से जुड़े हैं पर्सनैलिटी राइट्स

सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स को मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वादी के पर्सनैलिटी राइट्स उन मौलिक अधिकारों से संरक्षित हैं, जिनमें बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजता और मानवीय गरिमा शामिल हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि प्रतिवादियों की ओर से अभिनेत्री की पहचान और व्यक्तित्व से जुड़ी सामग्री का कथित अनधिकृत इस्तेमाल इन मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है। इसी आधार पर कोर्ट ने आपत्तिजनक सामग्री के प्रकाशन और प्रसार के खिलाफ अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।

डीपफेक से बढ़ी डिजिटल पहचान की चुनौती

एआई तकनीक के तेजी से इस्तेमाल के साथ डीपफेक ऐसी चुनौती बन गया है, जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या अन्य पहचान संबंधी विशेषताओं को डिजिटल तकनीक की मदद से बदलकर नई सामग्री तैयार की जा सकती है। मनोरंजन क्षेत्र से जुड़े लोगों के मामलों में यह चिंता और बढ़ जाती है, क्योंकि उनकी तस्वीरें और आवाज बड़ी मात्रा में इंटरनेट पर पहले से उपलब्ध रहती हैं।

सामंथा का मामला इसी व्यापक डिजिटल अधिकार बहस का हिस्सा है। अदालत के अंतरिम आदेश के बाद अब संबंधित प्लेटफॉर्म और प्रतिवादियों को अभिनेत्री की पहचान से जुड़े ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट के संबंध में अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा। मामला आगे की सुनवाई में भी पर्सनैलिटी राइट्स, निजता और एआई से तैयार डिजिटल सामग्री के अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़े कानूनी सवालों को सामने ला सकता है।

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