अम्बेडकरनगर में शराब कंपनी की बिक्री से मिली ₹84.11 लाख की रकम कथित तौर पर निजी खातों में जमा कराने के मामले में एजेंट, गोदाम इंचार्ज समेत 14 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

शराब कंपनी के एजेंट पर ₹84.11 लाख हड़पने का आरोप, गोदाम इंचार्ज समेत 14 पर केस; बिक्री की रकम निजी खातों में जमा कराने का दावा

Team The420
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अम्बेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में शराब कंपनी की बिक्री से मिली रकम कथित तौर पर कंपनी के खाते में जमा कराने के बजाय निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कराने का मामला सामने आया है। कंपनी की शिकायत पर पुलिस ने एजेंट, उसके परिवार के सदस्यों, गोदाम इंचार्ज समेत 14 नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। कंपनी ने कुल 84 लाख 11 हजार रुपये के गबन का आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

लखनऊ निवासी विकास जायसवाल की फर्म मेसर्स बिहााइव एल्कोहल कंपनी के पास अम्बेडकरनगर जिले में शराब वितरण का लाइसेंस है। कंपनी में राजेसुल्तानपुर निवासी अमित चंद्र एजेंट के तौर पर काम करता था। शिकायत के मुताबिक उसकी जिम्मेदारी शराब की दुकानों से बिक्री की रकम वसूलने और उसे कंपनी के अधिकृत बैंक खाते में जमा कराने की थी। आरोप है कि इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर उसने बिक्री की रकम कंपनी तक पहुंचाने के बजाय दूसरे खातों में जमा कराई।

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कंपनी की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अमित चंद्र ने अपने भाई रविचंद्र, राहुल चंद्र, पिता गुलाब चंद्र, मां शीला देवी, पत्नी रिया गोस्वामी और गोदाम इंचार्ज अमन गौड़ समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर रकम को कथित तौर पर इधर-उधर कराया। शिकायत के अनुसार, दुकानदारों से बिक्री की रकम रविचंद्र की फर्म मेसर्स रवि ट्रेडर्स से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में जमा कराई गई।

कंपनी ने जिन लेनदेन का उल्लेख किया है, उनमें पंजाब नेशनल बैंक के खाते में 37 लाख 7 हजार रुपये और एचडीएफसी बैंक के खाते में 13 लाख 87 हजार रुपये जमा किए जाने का दावा है। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में 6 लाख रुपये और करीब 10 लाख रुपये नकद लिए जाने का आरोप लगाया गया है। कंपनी के मुताबिक अलग-अलग लेनदेन और अन्य बकाया रकम को जोड़ने पर कथित गबन की राशि 84 लाख 11 हजार रुपये तक पहुंचती है।

मामले में सिर्फ रकम के लेनदेन ही नहीं, बल्कि शराब के स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, गोदाम की निगरानी करने वाले अमनदीप गौड़ और एजेंट अमित चंद्र ने बिना वैध बिल और गेट पास के शराब बाहर बेचने का काम किया। कंपनी ने आरोप लगाया कि गोदाम से निकलने वाले माल और बिक्री का सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया।

कंपनी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंप्यूटर सिस्टम के पासवर्ड का गलत इस्तेमाल कर फर्जी बिल तैयार किए गए और बाद में उन्हें सॉफ्टवेयर से डिलीट कर दिया गया। रजिस्टर में भी कथित तौर पर बदलाव किए गए। इन आरोपों की पुष्टि दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, स्टॉक रिकॉर्ड और कंप्यूटर सिस्टम की जांच के बाद ही हो सकेगी।

कंपनी के पार्टनर विकास जायसवाल के मुताबिक 15 सितंबर के बाद अमित चंद्र ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। कंपनी की ओर से उसके घर जाकर संपर्क करने की कोशिश की गई। आरोप है कि वहां मौजूद परिजनों ने रकम लौटाने से इनकार कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद कंपनी ने राजेसुल्तानपुर थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने 30 सितंबर को तहरीर के आधार पर अमित चंद्र, उसके परिजनों, गोदाम इंचार्ज अमन गौड़ समेत 14 नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस अब बैंक खातों में हुए लेनदेन, शराब के स्टॉक, बिक्री रिकॉर्ड, बिल और गेट पास की जांच कर रही है। विवेचना के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि कथित तौर पर निजी खातों में जमा रकम का इस्तेमाल किसने किया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

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