ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सिम बाइंडिंग नियमों पर ढील से इनकार किया। 6 घंटे बाद ऑटो लॉगआउट जारी।

सिम निकाली तो ऐप बंद: सरकार तय समय पर लागू करेगी सिम बाइंडिंग नियम

Team The420
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डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम कसने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सिम बाइंडिंग से जुड़े नए नियम तय समय पर लागू किए जाएंगे और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। केंद्रीय संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने बुधवार को स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसे किसी भी राजस्व हित से ऊपर रखा जाएगा।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए सख्त तकनीकी प्रावधान जरूरी हो गए हैं। सिम बाइंडिंग नियमों का उद्देश्य फर्जी खातों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना है। उन्होंने साफ किया कि नियमों के क्रियान्वयन की समयसीमा में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।

मंत्री ने वेब सेशन से जुड़े अनिवार्य लॉगआउट नियम पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि छह घंटे बाद ऑटोमैटिक लॉगआउट की व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी और इसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना था कि डिजिटल सुरक्षा के मानकों को कमजोर करने का सवाल ही नहीं उठता।

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क्या है सिम बाइंडिंग व्यवस्था

फिलहाल स्थिति यह है कि यदि किसी व्यक्ति ने WhatsApp या Telegram जैसे मैसेजिंग ऐप पर एक बार खाता बना लिया, तो बाद में फोन से सिम कार्ड निकाल देने पर भी ऐप कई मामलों में चलता रहता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए ट्रैकिंग और सत्यापन की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।

नए नियमों के तहत यह व्यवस्था बदल जाएगी। प्रस्तावित सिम बाइंडिंग प्रणाली के अनुसार, मैसेजिंग ऐप तभी सक्रिय रहेंगे जब संबंधित सिम कार्ड उसी डिवाइस में मौजूद और सक्रिय होगा, जिससे अकाउंट पंजीकृत है। यदि सिम कार्ड निकाल दिया जाता है, बदल दिया जाता है या निष्क्रिय हो जाता है, तो ऐप अपने आप काम करना बंद कर देगा।

सरकार का मानना है कि इससे फर्जी पहचान के जरिये संचालित खातों, अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। हाल के वर्षों में ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल निवेश घोटाले और सोशल मीडिया आधारित ठगी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। ऐसे मामलों में अक्सर अस्थायी सिम कार्ड या बदले गए डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है।

सुरक्षा बनाम सुविधा की बहस

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि सिम बाइंडिंग से उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, लेकिन इससे प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता बढ़ेगी। हालांकि कुछ उद्योग प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि इससे सेवा प्रदाताओं के लिए तकनीकी समायोजन की आवश्यकता होगी।

मंत्री ने इन आशंकाओं पर कहा कि जब सुरक्षा और राजस्व के बीच संतुलन की बात आती है तो सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि मानती है। उनका कहना था कि डिजिटल इकोसिस्टम जितना मजबूत होगा, उतना ही सुरक्षित लेनदेन और संचार संभव होगा।

सरकार का मानना है कि यह कदम साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले महीनों में संबंधित एजेंसियां दूरसंचार कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय कर नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करेंगी।

डिजिटल लेनदेन और संचार के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच सिम बाइंडिंग व्यवस्था को सरकार एक संरचनात्मक सुधार के रूप में देख रही है, जिसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है।

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