विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार ध्वस्त, ₹6 लाख करोड़ स्वाहा

Team The420
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मुंबई:    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव में भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए और निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹6 लाख करोड़ का नुकसान हो गया।

सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट

बीएसई सेंसेक्स 82,225.92 के स्तर पर बंद हुआ, जो 1,068.74 अंक या 1.28 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। दिन के कारोबार में सूचकांक एक समय 81,934 अंक तक गिर गया था, जिससे बाजार में व्यापक कमजोरी का संकेत मिला। इसी तरह एनएसई निफ्टी-50 भी दबाव में रहा और 25,424 पर बंद हुआ, जो 288.35 अंक या 1.12 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

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अमेरिकी व्यापार नीति से बढ़ी चिंता

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी व्यापार नीति से जुड़ी चिंताओं ने वैश्विक निवेश धारणा को प्रभावित किया है। हाल ही में अमेरिकी प्रशासन द्वारा लागू अस्थायी टैरिफ उपायों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्थिरता के लिए चुनौती माना जा रहा है। यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के बाद आया है जिसमें कुछ टैरिफ प्रस्तावों की वैधता पर सवाल उठाए गए थे। Supreme Court of the United States

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से जुड़े व्यापारिक संकेत भी वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का कारण बने हुए हैं। संरक्षणवादी व्यापार रणनीतियों के कारण उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

आईटी और हाई-वेटेज शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

घरेलू बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव और पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवा मॉडल पर इसके संभावित असर को लेकर सतर्क हो गए हैं। मार्जिन पर दबाव और तकनीकी सेवाओं की बदलती मांग ने प्रमुख आईटी कंपनियों की कारोबारी संभावनाओं को प्रभावित किया है।

कारोबारी सत्र के दौरान Tata Consultancy Services, Infosys Limited और HCL Technologies जैसे बड़े आईटी शेयरों में जोरदार बिकवाली दर्ज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक एआई विस्तार से आउटसोर्सिंग आधारित बिजनेस मॉडल पर दीर्घकालिक दबाव बन सकता है।

भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी अस्थिरता

भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार धारणा को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव, दूतावास कर्मचारियों की निकासी और सुरक्षा चेतावनियों ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को जोखिम से बचने की रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया है।

सेक्टोरल इंडेक्स में व्यापक गिरावट

सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और इसमें लगभग 4.7 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.5 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 1.3 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे व्यापक बाजार दबाव स्पष्ट हुआ।

कुछ सेक्टरों में सीमित खरीदारी

हालांकि कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी देखने को मिली। रक्षा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र के कुछ शेयरों में निवेशकों ने रुचि दिखाई। NTPC Limited, Hindustan Unilever Limited, Power Grid Corporation of India, Tata Steel Limited और Adani Ports and Special Economic Zone के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

वैश्विक बाजारों में भी दबाव

वैश्विक बाजारों में भी दबाव का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 1.1 प्रतिशत गिर गया जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।

अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों से निवेशकों की दूरी बढ़ने का असर दिखा। S&P 500 में 1.04 प्रतिशत, नैस्डैक कंपोजिट में 1.13 प्रतिशत और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

आगे भी रह सकती है अस्थिरता

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता आने वाले समय में भी बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे गुणवत्ता वाले शेयरों में चुनिंदा निवेश करें और जोखिम प्रबंधन रणनीति अपनाएं।

कुल मिलाकर यह कारोबारी सत्र वैश्विक मैक्रोइकोनॉमिक दबाव और तकनीकी सेक्टर से जुड़ी चिंताओं के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

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