धौरपुर (सरगुजा)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के साथ होम लोन के नाम पर ₹57.55 लाख की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पीड़ित को आसान होम लोन और किश्त खुद भरने के आश्वासन के नाम पर जाल में फंसाया गया, जिसके बाद उसके नाम पर विभिन्न बैंकों से लगभग ₹1.05 करोड़ का लोन स्वीकृत कराया गया और उसमें से लाखों रुपये धीरे-धीरे आरोपियों द्वारा निकाल लिए गए। मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित लालसाय राम बखला, निवासी लुण्ड्रा, जो ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, ने धौरपुर थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि वर्ष 2024 में उन्हें घर बनाने के लिए लोन की आवश्यकता थी। उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से ₹18 लाख के होम लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन बैंक ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसी दौरान उनके परिचित सुरेंद्र सिंह और संतोष दास ने उन्हें शिवशंकर दास नामक व्यक्ति से मिलवाया, जिसने खुद को लोन प्रक्रिया में मदद करने में सक्षम बताया।
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शिकायत के अनुसार, शिवशंकर दास ने पीड़ित को आश्वस्त किया कि वह उनके नाम पर लगभग ₹30 लाख का होम लोन स्वीकृत करवा सकता है और इसकी किश्तें वह स्वयं जमा करेगा। इसके बदले में पीड़ित को कोई आर्थिक परेशानी नहीं होगी। भरोसे में लेकर आरोपियों ने उनके दस्तावेज विभिन्न बैंकों में जमा कराए और ओटीपी प्राप्त कर लोन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
जांच में सामने आया कि लालसाय राम बखला के नाम पर अलग-अलग बैंकों से कुल मिलाकर ₹1.05 करोड़ से अधिक का होम लोन स्वीकृत कर उनके खातों में जमा कराया गया। इसके बाद आरोपियों ने उन्हें यह कहकर गुमराह किया कि वे लोन राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा वापस कर देंगे और बाकी की किस्तें स्वयं भर देंगे, जिससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी। साथ ही यह भी भरोसा दिलाया गया कि यदि किसी प्रकार की देनदारी बनी तो जमीन और मकान की जिम्मेदारी वे संभाल लेंगे।
पीड़ित ने आरोपियों के कहने पर आरटीजीएस और नकद के माध्यम से बड़ी रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दी। शिकायत के अनुसार, उन्होंने शिवशंकर दास, अरविंद कुमार और आशा मानिकपुरी के खातों में लगभग ₹41.05 लाख ट्रांसफर किए, जबकि ₹16.55 लाख नकद अलग-अलग समय पर सौंप दिए गए। शुरुआती चरण में आरोपियों ने कुछ समय तक बैंकों की किश्तें जमा कीं, जिससे पीड़ित को शक नहीं हुआ, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया गया।
किश्तें न भरने पर स्थिति बिगड़ गई और बैंक ने पीड़ित को लगातार नोटिस भेजने शुरू कर दिए। एसबीआई, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, ग्रामीण बैंक, एक्सिस बैंक और चोला मंडलम जैसे संस्थानों से वसूली नोटिस मिलने के बाद पीड़ित का सैलरी अकाउंट भी फ्रीज कर दिया गया। आर्थिक दबाव बढ़ने पर उन्होंने धौरपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले में शिवशंकर दास, सुरेंद्र सिंह, संतोष दास, अरविंद कुमार और आशा मानिकपुरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, मुख्य आरोपी शिवशंकर दास पहले भी इसी तरह के मामलों में संलिप्त पाया गया है और उस पर शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों से करोड़ों की ठगी के आरोप हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शिवशंकर दास ने “अनशिवआर्या फाउंडेशन ग्रुप” नाम से एक कथित संस्था भी बनाई थी, जिसके जरिए लोगों को होम लोन और वित्तीय सहायता का झांसा देकर ठगी की जाती थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी पहले से गिरफ्तार होकर जेल में है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
फिलहाल पुलिस पूरे वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसकी जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
