जयपुर। राजस्थान में सरकारी नौकरियों में स्पोर्ट्स कोटा के दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ है। राजस्थान पुलिस की विशेष अभियान समूह (SOG) ने ऐसे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर फर्जी खेल प्रमाणपत्र और जाली सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध कराकर उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी दिलाने में मदद करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जो नकली खेल उपलब्धियों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था।
मामला वर्ष 2021-22 की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्पोर्ट्स कोटा के तहत आरक्षण और अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर फर्जी ताइक्वांडो प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। इन दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नियुक्तियां हासिल किए जाने के आरोपों ने पूरे भर्ती तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कप्तान सिंह उर्फ गुर्जर कप्तान सिंह और विष्णु भाखरीवाल के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों के अनुसार कप्तान सिंह पिछले करीब दो वर्षों से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर ₹10,000 का इनाम घोषित था। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जहां उनसे पूछताछ जारी है।
जांच में आरोप है कि राष्ट्रीय ताइक्वांडो महासंघ के नाम से एक फर्जी ईमेल आईडी बनाई गई थी। इसी ईमेल का उपयोग कर कथित तौर पर नकली सत्यापन रिपोर्ट तैयार की गईं और उन्हें बीकानेर स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की नियुक्ति शाखा को भेजा गया। इन रिपोर्टों के जरिए फर्जी खेल प्रमाणपत्रों को असली साबित करने की कोशिश की गई, जिससे संबंधित उम्मीदवारों को स्पोर्ट्स कोटा का लाभ मिल सके।
अधिकारियों के मुताबिक जिन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया, उन्हें वर्ष 2017 में आयोजित भगवान महावीर ओपन नेशनल ताइक्वांडो चैंपियनशिप से संबंधित बताया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि इन दस्तावेजों के आधार पर कुछ उम्मीदवारों ने तृतीय श्रेणी शिक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली थी। मामले की शुरुआती जांच में मनोज कुमार गुर्जर, हेमलता गुर्जर और सियाराम गुर्जर को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि इन तीनों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल की थी।
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पूछताछ के दौरान गिरफ्तार उम्मीदवारों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने नकली खेल प्रमाणपत्र कप्तान सिंह के माध्यम से प्राप्त किए थे और इसके लिए लगभग ₹40,000 प्रति प्रमाणपत्र का भुगतान किया था। इन बयानों के आधार पर जांच एजेंसियों ने फर्जी दस्तावेजों की सप्लाई चेन का पता लगाते हुए अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई।
जांचकर्ताओं का दावा है कि कप्तान सिंह और विष्णु भाखरीवाल की मुलाकात वर्ष 2020 में सशस्त्र बलों की भर्ती की तैयारी के दौरान हुई थी। बाद में दोनों ने कथित तौर पर फर्जी खेल प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने का नेटवर्क खड़ा कर लिया। जांच के अनुसार विष्णु नकली प्रमाणपत्रों की व्यवस्था करता था, जबकि कप्तान सिंह उन्हें नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का काम करता था।
पुलिस के अनुसार यह भी पता चला है कि फर्जी प्रमाणपत्र कम कीमत पर खरीदे जाते थे और फिर उन्हें कई गुना अधिक राशि लेकर बेचा जाता था। जांच में आरोप है कि ऐसे प्रमाणपत्र लगभग ₹60,000 में प्राप्त किए जाते थे और उन्हें ₹1.20 लाख तक में बेचा जाता था। अधिकारियों का मानना है कि इस अवैध कारोबार से आरोपियों ने बड़ी मात्रा में आर्थिक लाभ अर्जित किया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आजकल दस्तावेजी धोखाधड़ी करने वाले गिरोह डिजिटल माध्यमों, फर्जी ईमेल पहचान और नकली सत्यापन प्रक्रियाओं का उपयोग कर दस्तावेजों को वास्तविक दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच, मूल जारीकर्ता संस्थाओं से सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की पड़ताल ऐसे मामलों का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फिलहाल SOG पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस रैकेट से और कितने उम्मीदवारों ने लाभ उठाया तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सत्यापित कराने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद ही भर्ती घोटाले के वास्तविक दायरे और इससे प्रभावित नियुक्तियों की संख्या स्पष्ट हो सकेगी।
