प्रयागराज सिविल लाइंस थाने में बृजेश पांडेय व 5 अन्य के खिलाफ ₹56 लाख फर्जी टोल निवेश ठगी का FIR दर्ज।

टोल प्रोजेक्ट में निवेश के नाम पर ₹56 लाख की ठगी, छह पर मुकदमा

Team The420
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टोल शुल्क संग्रह परियोजना में 50 प्रतिशत साझेदारी दिलाने और छह माह में डेढ़ गुना रिटर्न देने का झांसा देकर ₹56 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर में ठेकेदार बृजेश पांडेय, उसके भाई शैलेश पांडेय सहित छह लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और अन्य संभावित पीड़ितों की भी तलाश की जा रही है।

फर्जी टोल निवेश का जाल

एफआईआर के अनुसार, पीडी टंडन रोड स्थित एक सिविल कॉन्ट्रैक्टिंग फर्म के प्रोपराइटर से बृजेश पांडेय ने संपर्क किया और खुद को टोल कलेक्शन का ठेकेदार बताया। उसने दावा किया कि एनएच-30 के नैनी ब्रिज सेक्शन में उमापुर, मुंगारी और हरी टोल प्वाइंट्स पर शुल्क संग्रह का टेंडर निकला है, जिसका वार्षिक प्रेषण ₹69.40 करोड़ है। आरोप है कि बृजेश ने अपनी कंपनी एसबी मल्टीसर्विसेज की परियोजना में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बताकर निवेश का प्रस्ताव दिया।

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1.5x रिटर्न का लालच

प्रस्ताव को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपी ने शिकायतकर्ता की मुलाकात दो व्यक्तियों से कराई, जिन्हें उदयपुर स्थित कोरल एसोसिएट्स का अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया। कहा गया कि टोल प्लाजा का ठेका कोरल एसोसिएट्स के पास है और एसबी मल्टीसर्विसेज इसके साथ साझेदारी में काम कर रही है। निवेश करने पर छह माह में डेढ़ गुना राशि लौटाने का भरोसा दिया गया, जिसे टोल कलेक्शन की ऊंची दैनिक आमदनी से जोड़ा गया।

पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने परियोजना से संबंधित कथित दस्तावेज और आय का अनुमान दिखाए जाने के बाद दो किस्तों में ₹56 लाख जमा कर दिए। तय समय बीतने के बाद न तो मुनाफा मिला और न ही मूल धन वापस किया गया। बार-बार संपर्क करने पर टालमटोल जवाब मिलने लगे, जिससे उसे संदेह हुआ।

फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

इसके बाद शिकायतकर्ता ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से परियोजना की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि कोरल एसोसिएट्स के नाम से संबंधित टोल प्लाजा संग्रह के लिए कोई संविदा या अधिकृत साझेदारी नहीं की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, इससे स्पष्ट हो गया कि निवेश प्रस्ताव पूरी तरह फर्जी था।

पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच में उन व्यक्तियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने खुद को कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर बैठकों में भाग लिया था।

प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज, बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए राजस्व आंकड़े और सरकारी परियोजना से जुड़ाव का झूठा दावा कर एक उच्च मूल्य के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का भ्रम पैदा किया। बैंक खातों की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि रकम किन खातों में जमा हुई और क्या इस तरह के निवेश अन्य लोगों से भी लिए गए।

सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को निशाना बनाया और सरकारी टोल संचालन से जुड़े कम जोखिम वाले निवेश का दावा कर भरोसा जीता। निश्चित समय में तय रिटर्न का लालच योजना का मुख्य आकर्षण था।

पुलिस ने आरोपियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आवश्यकता पड़ने पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी। साथ ही, फर्जी कंपनियों या म्यूल खातों के उपयोग की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों ने निवेशकों को सलाह दी है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े किसी भी निवेश प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले आधिकारिक टेंडर पोर्टल और कंसेशन एग्रीमेंट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें, विशेषकर तब जब बिना औपचारिक समझौते के तय रिटर्न और साझेदारी का दावा किया जा रहा हो।

मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या आरोपियों ने इसी तरह के फर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट दिखाकर व्यापक निवेश घोटाला संचालित किया।

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