सस्ती दर पर नई बाइक दिलाने का झांसा देकर कम से कम 66 लोगों से करीब ₹38 लाख की ठगी करने के आरोप में एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) के एग्जीक्यूटिव को पोरबंदर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान धवल खुदाई के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के बाद उसे हिरासत में लिया गया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी राणावाव स्थित एक दोपहिया वाहन शोरूम में तैनात था और वाहन व पर्सनल लोन से जुड़े कार्य देखता था। पुलिस का कहना है कि वह ग्राहकों को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर बाइक देने का लालच देता था और पूरी रकम नकद में वसूल करता था।
राणावाव थाने के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपी लगभग ₹95,000 कीमत की बाइक ₹75,000 नकद में देने की पेशकश करता था। ग्राहकों से पूरी राशि लेने के बाद वह उनकी जानकारी के बिना उनके नाम पर दोपहिया वाहन का लोन प्रोसेस कर देता था।
Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology
पुलिस के अनुसार, शुरुआती शक से बचने के लिए आरोपी वसूली गई रकम का एक हिस्सा डाउन पेमेंट और कुछ शुरुआती ईएमआई भरने में इस्तेमाल करता था। लोन की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए वह ग्राहकों से ओटीपी साझा करने को कहता, यह बताते हुए कि यह वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि किसी ग्राहक को बैंक या फाइनेंस कंपनी से लोन संबंधी संदेश मिलता, तो वह उसे सिस्टम की त्रुटि बताकर टाल देता था।
यह घोटाला दो से तीन महीने बाद तब सामने आया, जब पीड़ितों को बैंकों से बकाया किस्तों की अदायगी के लिए कॉल आने लगे। इसके बाद कई लोगों ने पुलिस से संपर्क किया।
मामला राणावाव पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 338 और 340(2) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि अब तक 66 पीड़ितों की पहचान कर ली गई है, लेकिन जांच के दौरान और लोगों के सामने आने की संभावना है।
शिकायत में एक मामले का जिक्र है, जिसमें प्रकाश धनधास नामक व्यक्ति को अपनी 2024 मॉडल की फाइनेंस्ड बाइक बदलने का प्रस्ताव दिया गया। आरोपी ने कथित तौर पर दो अतिरिक्त किस्तें और ₹10,000 नकद देने पर नई बाइक दिलाने का भरोसा दिलाया और कहा कि कोई नया लोन नहीं लिया जाएगा। हालांकि, बाद में धनधास को पता चला कि नई बाइक पर करीब ₹80,000 का लोन उनके नाम से लिया गया है, जबकि पुरानी बाइक का कर्ज चुकाया ही नहीं गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने फर्जी एनओसी (नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) तैयार कर पुराना लोन चुकता दिखाया और बाद में पुरानी बाइक को एक सेकंड-हैंड वाहन दलाल को बेच दिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले चार महीनों से सुनियोजित तरीके से इस तरह की ठगी को अंजाम दे रहा था। फिलहाल बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क और संभावित सहयोगियों की पहचान की जा सके।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को इसी तरह की ठगी का संदेह हो तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही सलाह दी गई है कि बिना उचित रसीद के पूरी नकद राशि न दें और किसी भी वित्तीय लेनदेन से जुड़े ओटीपी साझा करने से बचें।
मामले की जांच जारी है और पुलिस यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस तरह की धोखाधड़ी अन्य स्थानों पर भी की गई है।
