पटना। बिहार के पटना सिटी में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इंटरनेशनल कॉल को डायवर्ट कर विदेशी नागरिकों से कंप्यूटर में तकनीकी समस्या और मालवेयर होने का डर दिखाते थे। इसके बाद कंप्यूटर ठीक करने के नाम पर उनसे डॉलर में रकम वसूलने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल, एटीएम कार्ड और नकदी समेत कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह विदेशी नागरिकों को अपना कथित ग्राहक बनाकर उनसे बातचीत करता था। आरोपी कंप्यूटर में समस्या आने या मालवेयर का खतरा होने की बात कहकर उन्हें तकनीकी सहायता देने का भरोसा दिलाते थे। इसके बाद कंप्यूटर ठीक करने या मालवेयर हटाने के नाम पर उनसे भुगतान कराया जाता था। ठगी की रकम विदेशी मुद्रा में हासिल की जाती थी और बाद में उसे भारतीय मुद्रा में बदले जाने का आरोप है।
पुलिस को गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के सत्यापन और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को भी पकड़ लिया। चारों से पूछताछ कर गिरोह के काम करने के तरीके और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में पुलिस को बड़ी संख्या में डिजिटल सामग्री भी मिली है। आरोपियों के पास से चार लैपटॉप और कई एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इसके अलावा सात एटीएम कार्ड और एक लाख से अधिक ईमेल आईडी भी मिली हैं। इतनी बड़ी संख्या में ईमेल आईडी मिलने के बाद पुलिस यह जांच कर रही है कि इनका इस्तेमाल विदेशी नागरिकों की पहचान करने, उनसे संपर्क स्थापित करने और कथित ठगी के लिए कैसे किया जाता था।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब ₹1.09 लाख नकद भी बरामद किए हैं। इसके अलावा एक बैंक खाते में मौजूद करीब ₹3.50 लाख की रकम को होल्ड कराया गया है। जांच एजेंसियां अब बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं, ताकि कथित ठगी से जुड़े पैसों के लेनदेन की पूरी जानकारी सामने आ सके।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह का निशाना मुख्य रूप से विदेशी नागरिक थे। आरोपी उनसे कंप्यूटर फिक्सिंग और मालवेयर हटाने जैसी सेवाओं के नाम पर पैसे लेते थे। इंटरनेशनल कॉल को डायवर्ट करने की व्यवस्था और बड़ी संख्या में ईमेल आईडी के इस्तेमाल से संकेत मिलता है कि गिरोह ने विदेशी ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए एक व्यवस्थित तरीका अपनाया था। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही गिरोह के नेटवर्क और कथित ठगी की कुल रकम का स्पष्ट पता चल सकेगा।
पुलिस अब बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन की तकनीकी जांच करा रही है। इन उपकरणों से ईमेल, कॉल, चैट, भुगतान संबंधी जानकारी और विदेशी नागरिकों से संपर्क के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। एटीएम कार्ड और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित ठगी की रकम किन खातों में पहुंचती थी और बाद में उसे किस तरह भारतीय मुद्रा में बदला जाता था।
चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित सदस्यों और उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाने में जुटी है। बरामद डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
