नई दिल्ली: भारत में साइबर अपराध के दर्ज मामलों ने वर्ष 2024 में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा पार कर लिया। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम ‘Crime in India 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 1,01,928 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2023 में यह संख्या 86,420 थी। यानी केवल एक वर्ष में दर्ज साइबर अपराधों में लगभग 17.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। NCRB के संदर्भ में साइबर अपराधों में वे अपराध शामिल हैं जिनमें कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट या अन्य संचार उपकरण अपराध के माध्यम अथवा लक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो साइबर अपराध के दर्ज मामलों का एक बड़ा हिस्सा कुछ राज्यों में केंद्रित दिखाई देता है। तेलंगाना में 27,230 मामले दर्ज हुए, जो देश के कुल मामलों का 26.71 प्रतिशत है। इस प्रकार 2024 में साइबर अपराध के सर्वाधिक दर्ज मामलों वाला राज्य तेलंगाना रहा।
इसके बाद कर्नाटक में 21,993 मामले यानी 21.58 प्रतिशत, जबकि उत्तर प्रदेश में 11,073 मामले यानी 10.86 प्रतिशत दर्ज किए गए। इन तीन राज्यों—तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश—में मिलाकर देश के लगभग 59.15 प्रतिशत साइबर अपराध मामले दर्ज हुए। यानी मोटे तौर पर भारत में दर्ज प्रत्येक पांच साइबर अपराध मामलों में से लगभग तीन मामले इन्हीं तीन राज्यों से सामने आए।
इसके बाद महाराष्ट्र में 9,922 मामले (9.73%), बिहार में 6,380 (6.26%) और तमिलनाडु में 5,793 मामले (5.68%) दर्ज किए गए।
केरल में 2,962 (2.91%), आंध्र प्रदेश में 2,528 (2.48%), ओडिशा में 2,501 (2.45%), हरियाणा में 1,815 (1.78%), गुजरात में 1,592 (1.56%), राजस्थान में 1,527 (1.50%), झारखंड में 1,423 (1.40%) और मध्य प्रदेश में 1,081 मामले (1.06%) दर्ज किए गए।
अन्य राज्यों में पंजाब में 888 (0.87%), छत्तीसगढ़ में 660 (0.65%), उत्तराखंड में 543 (0.53%), असम में 408 (0.40%), पश्चिम बंगाल में 282 (0.28%), हिमाचल प्रदेश में 148 (0.15%), मेघालय में 97 (0.10%), अरुणाचल प्रदेश में 78 (0.08%), गोवा में 77 (0.08%), मिजोरम में 50 (0.05%), त्रिपुरा में 33 (0.03%), सिक्किम में 15 (0.01%), नागालैंड में 14 (0.01%) और मणिपुर में केवल 5 मामले (0.01% से कम) दर्ज किए गए।
इस आधार पर 28 राज्यों में सबसे कम मामले मणिपुर (5), नागालैंड (14) और सिक्किम (15) में दर्ज हुए। हालांकि, कम पंजीकृत मामलों का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि वहां वास्तविक साइबर अपराध भी अनिवार्य रूप से कम हैं।
2024 की पूरी तस्वीर: राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, मामले और देश में हिस्सेदारी
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश दर्ज मामले भारत के कुल मामलों में हिस्सा
तेलंगाना 27,230 26.71%
कर्नाटक 21,993 21.58%
उत्तर प्रदेश 11,073 10.86%
महाराष्ट्र 9,922 9.73%
बिहार 6,380 6.26%
तमिलनाडु 5,793 5.68%
केरल 2,962 2.91%
आंध्र प्रदेश 2,528 2.48%
ओडिशा 2,501 2.45%
हरियाणा 1,815 1.78%
गुजरात 1,592 1.56%
राजस्थान 1,527 1.50%
झारखंड 1,423 1.40%
मध्य प्रदेश 1,081 1.06%
पंजाब 888 0.87%
छत्तीसगढ़ 660 0.65%
उत्तराखंड 543 0.53%
असम 408 0.40%
दिल्ली (केंद्र शासित प्रदेश) 404 0.40%
पश्चिम बंगाल 282 0.28%
हिमाचल प्रदेश 148 0.15%
पुडुचेरी (केंद्र शासित प्रदेश) 142 0.14%
चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) 116 0.11%
जम्मू-कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश) 114 0.11%
मेघालय 97 0.10%
अरुणाचल प्रदेश 78 0.08%
गोवा 77 0.08%
मिजोरम 50 0.05%
त्रिपुरा 33 0.03%
अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह 28 0.03%
सिक्किम 15 0.01%
नागालैंड 14 0.01%
मणिपुर 5 <0.01%
दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव 5 <0.01%
लद्दाख 1 <0.01%
लक्षद्वीप 0 0.00%
पूरे भारत में 1,01,928 100%
इस तालिका में मामलों की संख्या NCRB 2024 के आंकड़ों पर आधारित है, जिन्हें गृह मंत्रालय द्वारा भी प्रस्तुत किया गया है। प्रतिशत की गणना 1,01,928 मामलों के राष्ट्रीय कुल के आधार पर की गई है। NCRB के अनुसार 28 राज्यों में 1,01,118 मामले और आठ केंद्र शासित प्रदेशों में 810 मामले दर्ज किए गए।
साइबर अपराध में Fraud एक बड़ी चुनौती
राष्ट्रीय आंकड़े यह भी बताते हैं कि साइबर अपराध के पीछे किस प्रकार के अपराध प्रमुख हैं। NCRB के अनुसार 2024 में ‘Fraud’ श्रेणी के तहत 29,758 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में इनकी संख्या 19,466 थी। यानी केवल एक वर्ष में इस श्रेणी में लगभग 52.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इसके अतिरिक्त ‘Cheating’ के 19,296 मामले दर्ज हुए। Computer-related offences की संख्या 36,920 रही, जबकि अश्लील अथवा sexually explicit सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से जुड़े 6,990 मामले दर्ज किए गए।
अन्य श्रेणियों में महिलाओं और बच्चों की Cyber Stalking/Bullying के 1,240 मामले, Forgery के 702, Cyber Blackmailing/Threatening के 601, सोशल मीडिया पर Fake News से संबंधित 483, Fake Profile के 266 और Data Theft के 88 मामले दर्ज किए गए। NCRB ने Cyber Terrorism के 18 तथा नई सूचीबद्ध Organised Cybercrime श्रेणी के 60 मामले भी दर्ज किए।
चार वर्षों में दोगुने से अधिक हुए मामले
साइबर अपराध के दीर्घकालिक आंकड़े और भी महत्वपूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। भारत में वर्ष 2020 में 50,035, 2021 में 52,974, 2022 में 65,893, 2023 में 86,420 और 2024 में 1,01,928 साइबर अपराध मामले दर्ज किए गए।
इस प्रकार 2020 से 2024 के बीच दर्ज साइबर अपराधों की संख्या में लगभग 104 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यानी केवल चार वर्षों में दर्ज मामलों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई।
Cybercrime Complaints और FIR एक ही चीज नहीं
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है। Cybercrime complaint और NCRB में दर्ज criminal case/FIR को एक ही आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
गृह मंत्रालय के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच NCRP/CFCFRMS के माध्यम से Financial Fraud की 65.89 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें रिपोर्ट की गई राशि ₹55,050 करोड़ से अधिक थी। इन शिकायतों के संबंध में 1.95 लाख से अधिक FIR दर्ज की गईं।
सरकार के अनुसार, 30 जून 2026 तक Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System के माध्यम से 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से अधिक की राशि बचाने में सहायता मिली। ऑनलाइन वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग के लिए राष्ट्रीय 1930 हेल्पलाइन भी संचालित की जा रही है।
Cybercrime Policing Infrastructure का भी विस्तार
भारत ने साइबर अपराध से निपटने के लिए संस्थागत और तकनीकी ढांचे का भी विस्तार किया है। सरकार के अनुसार, Samanvaya Platform और उसके Pratibimb Module का इस्तेमाल interstate cybercrime analytics और अपराधियों की mapping में किया जा रहा है।
इन व्यवस्थाओं से 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी में सहायता मिलने की जानकारी सरकार ने दी है।
जून 2026 तक 1.63 लाख से अधिक पुलिस और न्यायिक अधिकारियों ने CyTrain प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया था, जबकि 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में Cyber Forensic-cum-Training Laboratories स्थापित की जा चुकी थीं।
क्या सबसे अधिक मामले दर्ज होने का अर्थ सबसे अधिक साइबर अपराध है?
इन आंकड़ों की व्याख्या सावधानी से करनी चाहिए। केवल NCRB में दर्ज मामलों के आधार पर तेलंगाना, कर्नाटक या उत्तर प्रदेश को सीधे भारत का “सबसे अधिक साइबर अपराध-प्रवण” राज्य कहना पूरी तस्वीर प्रस्तुत नहीं करता।
NCRB के आंकड़े मुख्य रूप से कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा दर्ज मामलों को दर्शाते हैं। वे देश में वास्तव में घटित प्रत्येक साइबर अपराध का पूर्ण माप नहीं हैं।
किसी राज्य में दर्ज मामलों की संख्या वहां की जनसंख्या, इंटरनेट उपयोग, डिजिटल बैंकिंग और UPI की पहुंच, लोगों में जागरूकता, पीड़ितों की शिकायत दर्ज कराने की प्रवृत्ति, Cyber Police Stations की उपलब्धता, पुलिस की जांच क्षमता और ऑनलाइन शिकायतों को FIR में परिवर्तित करने की प्रक्रिया से भी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए किसी राज्य में अधिक मामले दर्ज होना वहां साइबर अपराध की अधिक घटनाओं के साथ-साथ बेहतर reporting और registration mechanism का परिणाम भी हो सकता है। इसी प्रकार बहुत कम FIR दर्ज होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस राज्य में साइबर अपराध बहुत कम है।
फिर भी एक तथ्य उल्लेखनीय है—2024 में पूरे भारत में दर्ज साइबर अपराधों के लगभग 59.15 प्रतिशत मामले अकेले तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश से आए। दूसरी ओर, 28 राज्यों में मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम में सबसे कम मामले दर्ज किए गए।
भारत का एक लाख वार्षिक मामलों की सीमा पार करना पुलिस, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, टेलीकॉम कंपनियों, फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और अभियोजन एजेंसियों के सामने बढ़ती चुनौती को रेखांकित करता है।
अब चुनौती केवल अधिक FIR दर्ज करने की नहीं है। Financial Fraud की तुरंत reporting, fraudulent transactions को शीघ्र freeze करना, digital evidence को सुरक्षित रखना, interstate police coordination, cryptocurrency tracing, मजबूत digital forensics, mule accounts की त्वरित पहचान और प्रभावी prosecution आने वाले वर्षों में भारत की साइबर अपराध से लड़ने की क्षमता के प्रमुख आधार होंगे।
स्रोत: National Crime Records Bureau (NCRB), Crime in India 2024; गृह मंत्रालय, भारत सरकार, संसदीय उत्तर, 21 जुलाई 2026।
Centre for Police Technology (CPT) | सेंटर फॉर पुलिस टेक्नोलॉजी

