टेलीग्राम से कथित तौर पर क्रेडिट कार्ड ग्राहकों का डेटा खरीदकर बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने का आरोप; ओटीपी हासिल कर फर्जी क्लाउड किचन के जरिए रकम अपने खाते में मंगाता था, चार मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप बरामद

पहले खरीदा क्रेडिट कार्ड का लीक डेटा, फिर बनाया फर्जी रेस्टोरेंट; 52 लोगों से ₹30 लाख की कथित ठगी

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By Roopa
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गाजियाबाद। क्रेडिट कार्ड ग्राहकों का कथित लीक डेटा खरीदकर उन्हें बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने और फिर फर्जी रेस्टोरेंट के जरिये रकम अपने खाते में पहुंचाने के आरोप में गाजियाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने करीब 10 महीने में 52 क्रेडिट कार्ड धारकों को निशाना बनाकर लगभग ₹30 लाख की कथित ठगी की। जांच में सामने आया है कि ठगी के लिए उसने टेलीग्राम से क्रेडिट कार्ड संबंधी डेटा खरीदा और ऑनलाइन खाद्य आपूर्ति मंच पर फर्जी क्लाउड किचन बनाकर कार्ड से निकाली गई रकम को अपने बैंक खाते तक पहुंचाने का तरीका अपनाया।

पुलिस ने शुक्रवार रात आरोपी को कौशांबी से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से चार मोबाइल फोन, एक टैबलेट और एक लैपटॉप बरामद किए गए हैं। आरोपी मूल रूप से हरियाणा के रोहतक का रहने वाला बताया गया है और फिलहाल वैशाली सेक्टर-3 में रह रहा था। वह बीकॉम तक पढ़ा है और पहले एक निजी कंपनी में ग्राहक सेवा अधिकारी के तौर पर काम कर चुका है।

पूछताछ में पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने यूट्यूब पर एक वीडियो देखने के बाद ऑनलाइन खाद्य आपूर्ति मंच के जरिये ठगी करने का तरीका सीखा। इसके बाद उसने टेलीग्राम के एक चैनल से एक बैंक के ग्राहकों का कथित लीक क्रेडिट कार्ड डेटा खरीदा। इस डेटा के आधार पर वह कार्डधारकों की पहचान और संपर्क संबंधी जानकारी हासिल कर उन्हें निशाना बनाता था।

ठगी की रकम को अपने खाते तक पहुंचाने के लिए आरोपी ने फर्जी रेस्टोरेंट का पूरा ढांचा तैयार किया। पुलिस के अनुसार, उसने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के कथित फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र तैयार किए और ऑनलाइन मंच पर अलग-अलग नामों से तीन फर्जी क्लाउड किचन पंजीकृत कराए। इन रेस्टोरेंट में उसने अपना मोबाइल नंबर और बैंक खाता जोड़ा था, ताकि ऑर्डर और भुगतान से जुड़ी रकम पर उसका नियंत्रण रहे।

पुलिस के अनुसार, आरोपी डेटा में मौजूद जानकारी के आधार पर क्रेडिट कार्ड धारकों को कॉल करता था। कॉलिंग ऐप की मदद से वह खुद को बैंक का ग्राहक सेवा अधिकारी बताता और कार्ड से जुड़ी समस्या या शुल्क का हवाला देकर बातचीत शुरू करता था। कई मामलों में वह वीडियो कॉल के जरिये भी पीड़ितों से बात करता था, ताकि बैंक कर्मचारी होने का भरोसा पैदा किया जा सके।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

इसके बाद वह सेवा शुल्क या विलंब शुल्क माफ कराने का झांसा देकर पीड़ित से ओटीपी हासिल करने का आरोप है। ओटीपी मिलते ही आरोपी कथित तौर पर पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से अपने ही फर्जी रेस्टोरेंट पर महंगे खाने के ऑर्डर करता था। इसके बाद फर्जी डिलीवरी दिखाकर ऑनलाइन खाद्य आपूर्ति मंच से भुगतान अपने बैंक खाते में मंगाने का आरोप है। इस तरह कार्ड से निकाली गई रकम को खरीदारी और फर्जी डिलीवरी की आड़ में अपने खाते तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि शिकायतें बढ़ने पर आरोपी रेस्टोरेंट का नाम बदल देता था। पहले बनाए गए रेस्टोरेंट पर शिकायतें आने के बाद उसने दूसरा नाम इस्तेमाल किया। जब दूसरे रेस्टोरेंट पर भी कार्रवाई हुई तो तीसरे नाम से नया क्लाउड किचन पंजीकृत कराया। पुलिस के अनुसार, इसी तीसरे रेस्टोरेंट के जरिये 17 सितंबर 2026 को एक व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड से ₹38 हजार की कथित ठगी की गई।

मामले की शुरुआत ऑनलाइन खाद्य आपूर्ति मंच की जोखिम प्रबंधन टीम की शिकायत से हुई। शिकायत में फर्जी क्लाउड किचन के जरिये क्रेडिट कार्ड से ऑर्डर किए जाने और फर्जी डिलीवरी दिखाकर भुगतान हासिल करने की जानकारी दी गई थी। तकनीकी जांच के दौरान लेनदेन, मोबाइल नंबर और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े सुराग जुटाए गए। इन्हीं के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया।

जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से बड़ी मात्रा में कथित ग्राहक डेटा मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि डेटा कहां से लीक हुआ और उसे टेलीग्राम तक पहुंचाने में कौन लोग शामिल थे। जांच में बैंक ग्राहकों और अन्य संवेदनशील जानकारी की कथित खरीद-फरोख्त करने वाले नेटवर्क के संकेत भी मिले हैं।

पुलिस के अनुसार, टेलीग्राम पर डेटा की कीमत उसकी श्रेणी और उपयोगिता के आधार पर तय होती थी। कुछ डेटा ₹1,000 में उपलब्ध होने की बात सामने आई है, जबकि अधिक संवेदनशील या उपयोगी जानकारी के लिए कीमत लाखों रुपये तक पहुंच सकती थी। आरोपी कथित तौर पर क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान कर डेटा खरीदता था।

पुलिस अब आरोपी से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और कथित डेटा खरीद के भुगतान की जांच कर रही है। संबंधित टेलीग्राम चैनल की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर डेटा बेचने वाले लोगों तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जाएगी। मामले में फर्जी दस्तावेज, ग्राहक डेटा के इस्तेमाल और क्रेडिट कार्ड से रकम निकालने के पूरे तरीके की भी जांच जारी है।

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