साइबर ठगी के खिलाफ बड़े पैमाने पर चलाए गए ‘ऑपरेशन बजरंग’ के तहत मथुरा पुलिस ने शेरगढ़ क्षेत्र के जंघावली और विशंभरा गांवों में तड़के पांच घंटे तक सर्च अभियान चलाकर 34 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद 45 आरोपी खेतों और जंगल के रास्ते फरार होने में सफल रहे, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस के अनुसार, अभियान में करीब 250 पुलिसकर्मी, पीएसी बल, चार सर्किल अधिकारी स्तर की टीमें और 13 थानों की फोर्स शामिल रही। दोनों गांवों की चारों ओर से घेराबंदी कर घर-घर तलाशी ली गई। इस दौरान करीब 85 मकानों में दबिश देकर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों को हिरासत में लिया गया। कार्रवाई के दौरान गांव में भगदड़ जैसे हालात बन गए और कई आरोपी छतों से कूदकर या खेतों के रास्ते भाग निकले।
Certified Cyber Crime Investigator Course Launched by Centre for Police Technology
बरामदगी में एक दर्जन से अधिक फर्जी आधार कार्ड, तीन दर्जन से अधिक मोबाइल फोन, चार मोटरसाइकिल और एक कार शामिल है। पुलिस का कहना है कि जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर ठगी के नेटवर्क, बैंक खातों और पीड़ितों की पहचान की जाएगी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी संगठित तरीके से साइबर ठगी का सिंडीकेट चलाते थे। यह गिरोह फर्जी सिम, फर्जी पहचान पत्र और म्यूल खातों के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम देता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कॉल-आधारित फ्रॉड, ओटीपी ठगी, फर्जी लोन ऑफर और निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों को निशाना बनाते थे।
सूत्रों के अनुसार, प्रतिबिंब पोर्टल और साइबर मॉनिटरिंग के आधार पर इन गांवों को हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया था। पिछले एक महीने से संदिग्ध मोबाइल नंबर, डिजिटल ट्रैफिक और बैंकिंग पैटर्न की निगरानी की जा रही थी, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन की योजना बनाई गई।
पुलिस ने बताया कि जंघावली गांव से 11 आरोपी गिरफ्तार किए गए जबकि 17 फरार हो गए। दूसरी ओर विशंभरा गांव से 23 आरोपी पकड़े गए और 28 मौके से भाग निकले। कुल मिलाकर 34 गिरफ्तारी हुई है। फरार आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमों का गठन किया गया है और संभावित ठिकानों पर दबिश जारी है।
अभियान के दौरान कुछ स्थानों पर महिलाओं द्वारा विरोध किया गया, जिन्हें महिला पुलिस ने समझाकर शांत कराया। अधिकारियों का कहना है कि तलाशी प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के तहत की गई और स्थानीय प्रशासन को भी इसकी सूचना दी गई थी।
पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संगठित अपराध से संबंधित धारा 111(3), साइबर धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोपियों के बैंक खातों, लेनदेन और डिजिटल फुटप्रिंट की जांच की जा रही है, ताकि नेटवर्क के वित्तीय स्रोत और लाभार्थियों की पहचान हो सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह गांव स्तर पर छोटे-छोटे मॉड्यूल में काम करता था, जहां अलग-अलग सदस्य सिम उपलब्ध कराने, कॉल करने, बैंक खातों के प्रबंधन और रकम निकालने की जिम्मेदारी निभाते थे। इस तरह की संरचना के कारण कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी जल्दी स्थान बदल लेते थे और नकद लेनदेन को प्राथमिकता देते थे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले दिसंबर में गोवर्धन क्षेत्र के चार गांवों में चलाए गए अभियान में 37 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था और कई इनामी आरोपियों को मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया था। अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और हॉटस्पॉट गांवों में निगरानी बढ़ाई जाएगी।
जांच एजेंसियां अब जब्त मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आईपी लॉग और बैंक ट्रांजेक्शन का विश्लेषण कर रही हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम किन खातों में गई और किन राज्यों के लोगों को निशाना बनाया गया। इसके आधार पर अंतरराज्यीय कनेक्शन और संभावित मास्टरमाइंड की भूमिका भी सामने आ सकती है।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अनजान कॉल, फर्जी लोन ऑफर, केवाईसी अपडेट और निवेश के नाम पर मांगी गई जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर दें।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और उनके बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सर्च ऑपरेशन के बाद क्षेत्र में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। हॉटस्पॉट गांवों में नियमित वेरिफिकेशन, किरायेदारों का सत्यापन और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का मानना है कि स्थानीय स्तर पर चल रहे साइबर सिंडीकेट को तोड़ने के लिए लगातार दबाव बनाना जरूरी है, ताकि ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
