ओडिशा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब ₹3 करोड़ की वित्तीय ठगी से जुड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया है और इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई राज्य में संगठित डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे साइबर सुरक्षा अभियान के तहत की गई।
पुलिस के अनुसार, यह गिरफ्तारी कई महीनों तक चली तकनीकी निगरानी और जांच के बाद CID-क्राइम ब्रांच के “साइबर कवच” अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और जिला साइबर सेल से मिली खुफिया जानकारी पर आधारित थी।
जांच में सामने आया कि यह ठगी गिरोह कई बैंक खातों का इस्तेमाल कर अवैध रूप से प्राप्त पैसे को ट्रांसफर करने के लिए वित्तीय चैनल के रूप में उपयोग कर रहा था। पुलिस ने संदिग्ध लेनदेन का विश्लेषण करते हुए कई बैंकों के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की जांच की और खातों को संचालित करने वाले लोगों की पहचान की।
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नुआपाड़ा के पुलिस अधीक्षक अमृतपाल सिंह ने बताया कि छापेमारी से पहले विशेष साइबर टीम ने डिजिटल ट्रैकिंग, बैंक खातों के सत्यापन और फील्ड स्तर की जांच की। आरोपियों पर फर्जी म्यूएल खातों को नियंत्रित करने और ठगी के पैसे निकालने-ट्रांसफर करने में मदद करने का आरोप है।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने छह मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन रिकॉर्ड, एटीएम कार्ड, वित्तीय दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी सीधे तौर पर फर्जी खातों का संचालन करते थे, जबकि अन्य तीन मध्यस्थ के रूप में अवैध धन के प्रवाह में मदद करते थे।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस गिरोह द्वारा करीब ₹3 करोड़ की वित्तीय क्षति पहुंचाई गई हो सकती है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय संबंध भी हो सकते हैं और आगे की जांच जारी है।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों द्वारा संदिग्धों के संचार रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट की भी जांच की जा रही है।
एसपी ने कहा कि नुआपाड़ा जिले को साइबर अपराधियों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं बनने दिया जाएगा और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त निगरानी जारी रहेगी।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, म्यूएल बैंक खाते आधुनिक साइबर ठगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपराधी अक्सर फर्जी पहचान का उपयोग करके ऐसे खाते बनाते या किराए पर लेते हैं ताकि अवैध धन के स्रोत को छिपाया जा सके और जांच से बचा जा सके।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अनजान ऑनलाइन निवेश ऑफर, सोशल मीडिया वित्तीय योजनाओं और संदिग्ध धन ट्रांसफर अनुरोधों से सतर्क रहें। किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक विवरण या व्यक्तिगत पहचान जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
पुलिस ने चेतावनी दी है कि बैंक खाते किराए पर देने या बेचने में शामिल लोगों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई हो सकती है क्योंकि यह गतिविधि संगठित साइबर अपराध को बढ़ावा देती है।
अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी एक संगठित ठगी तंत्र का हिस्सा थे और जांच के आगे बढ़ने पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साइबर यूनिट बैंक नेटवर्क और मोबाइल संचार रिकॉर्ड का विश्लेषण कर पूरे गिरोह का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
देशभर में बढ़ते साइबर ठगी मामलों के बीच यह कार्रवाई हुई है, जिसके बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियां डिजिटल निगरानी और जन जागरूकता अभियान तेज कर रही हैं।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को सूचना दें। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और डिजिटल सतर्कता है।
