मुंबई। आर्थिक राजधानी मुंबई से एक सनसनीखेज ठगी और जबरन वसूली का मामला सामने आया है, जहां एक कारोबारी को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर पहले जाल में फंसाया गया और बाद में उसे बंधक बनाकर करोड़ों रुपये वसूल लिए गए। मामले में कुल ₹3.25 करोड़ की धोखाधड़ी सामने आई है और 10 आरोपियों की तलाश जारी है।
शिकायत के मुताबिक, पूरा घटनाक्रम जुलाई से अगस्त 2025 के बीच रचा गया। पीड़ित कारोबारी आयुष नकरा से कुछ लोगों ने संपर्क किया और खुद को बड़े निवेश नेटवर्क से जुड़ा बताते हुए भारी मुनाफे का भरोसा दिलाया। आरोपियों ने दावा किया कि उनका पैसा कम समय में कई गुना बढ़ जाएगा और निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
प्रारंभिक चरण में भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने कारोबारी को एक फर्म में निवेश करने के लिए राजी किया। इसी दौरान करीब ₹1 करोड़ की रकम एक कथित संस्था में ट्रांसफर करवाई गई। आरोपियों ने इसे निवेश प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए जल्द रिटर्न मिलने का भरोसा दिया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाया गया, जिससे पीड़ित का विश्वास और मजबूत होता गया।
FCRF Academy Launches Premier Anti-Money Laundering Certification Program
हालांकि, जब कारोबारी ने लेन-देन को लेकर सवाल उठाने शुरू किए और वादे के मुताबिक रिटर्न नहीं मिला, तो आरोपियों का रवैया अचानक बदल गया। शिकायत में कहा गया है कि 28 अगस्त 2025 को मुख्य आरोपी उमेश कुमार सुमन उर्फ सुबोध रंजन अपने कई साथियों के साथ कारोबारी के पास पहुंचा। इस दौरान कारोबारी और उसकी कंपनी के महाप्रबंधक पंकज रावत को कथित तौर पर बंधक बना लिया गया।
घटना के दौरान आरोपियों ने दोनों को पीटा और उन पर पिस्तौल तान दी। जान से मारने की धमकी देते हुए उनसे जबरन और पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया गया। डर और दबाव के बीच कारोबारी ने अपनी कंपनी के खाते से एक अन्य संस्था के नाम ₹2.25 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। इस तरह कुल वसूली ₹3.25 करोड़ तक पहुंच गई।
मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर 10 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और उनकी तलाश में कई टीमें जुटी हुई हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने जिन संस्थाओं के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराए, वे कथित तौर पर एक बड़े निवेश घोटाले का हिस्सा हो सकती हैं। अधिकारियों को शक है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था।
जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के आपसी संबंधों की गहराई से जांच कर रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या यह गिरोह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो अलग-अलग शहरों में इसी तरह की ठगी को अंजाम दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में ठग पहले भरोसा जीतते हैं और फिर धीरे-धीरे पीड़ित को जाल में फंसा लेते हैं। प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, “आज के अपराधी केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान का भी इस्तेमाल करते हैं। निवेश के नाम पर लालच देना और फिर डर के जरिए पैसे निकलवाना एक सोची-समझी रणनीति होती है। लोग जब तक सतर्क नहीं होंगे, ऐसे गिरोह लगातार सक्रिय रहेंगे।”
यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि निवेश के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्ताव कितने खतरनाक हो सकते हैं। बिना जांच-पड़ताल के किसी भी योजना में पैसा लगाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
