पूर्व महिला कर्मचारी का दावा—कंपनी को आर्थिक संकट से उबारने के लिए वर्षों तक दिए ‘फ्रेंडली लोन’; रकम लौटाने से बचने के लिए कथित तौर पर फर्जी विदेशी कानूनी दस्तावेज का सहारा लिया गया

‘दोस्ती’, लोन और फर्जी दस्तावेज का विवाद: हेल्थ-टेक स्टार्टअप CEO पर ₹33.94 लाख हड़पने का आरोप, FIR दर्ज

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By Roopa
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मुंबई। मुंबई के एक हेल्थ-टेक स्टार्टअप से जुड़ा वित्तीय विवाद अब आपराधिक जांच का विषय बन गया है। एक पूर्व महिला कर्मचारी की शिकायत पर कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी समेत कई गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने कई वर्षों तक व्यक्तिगत विश्वास और मित्रता के आधार पर कंपनी प्रमुख को लाखों रुपये उधार दिए, लेकिन बाद में न केवल रकम वापस नहीं की गई बल्कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए देनदारी से बचने की कोशिश भी की गई।

मामला एक 37 वर्षीय महिला से जुड़ा है, जो वर्ष 2017 में मुंबई स्थित एक हेल्थ-टेक स्टार्टअप में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में कार्यरत थी। शिकायत के अनुसार, नौकरी के दौरान उसकी कंपनी के संस्थापक डॉ. नीरज रमेश शेठ से घनिष्ठ मित्रता हो गई थी। उस समय कंपनी कथित तौर पर वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही थी और कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने में भी कठिनाइयां आ रही थीं।

महिला का दावा है कि अक्टूबर 2017 में कंपनी छोड़ने के बावजूद दोनों के बीच व्यक्तिगत संबंध बने रहे। इसके बाद वर्ष 2018 में कंपनी प्रमुख ने कथित तौर पर व्यवसायिक जरूरतों का हवाला देते हुए आर्थिक सहायता मांगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, लंबे समय से बने विश्वास और व्यक्तिगत संबंधों के कारण उसने सहायता देने का निर्णय लिया और अगले कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों से धनराशि उपलब्ध कराती रही।

शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच बैंक ट्रांसफर, नकद भुगतान और क्रेडिट कार्ड लेनदेन के माध्यम से कुल ₹50.25 लाख दिए गए। महिला का आरोप है कि यह राशि अस्थायी सहायता और मित्रतापूर्ण ऋण के रूप में दी गई थी, जिसे बाद में लौटाने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि समय बीतने के साथ केवल ₹16.31 लाख की राशि ही वापस की गई, जबकि ₹33.94 लाख अब भी बकाया रह गए।

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब बकाया रकम को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद गहरा गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उसने शेष धनराशि की मांग की तो उसे भुगतान करने के बजाय विभिन्न बहाने बनाए गए। बाद में कथित तौर पर एक ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत किया गया, जिसे विदेशी कानूनी संस्था द्वारा जारी बताया गया था। महिला का दावा है कि जांच-पड़ताल के दौरान उस दस्तावेज की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हुए और उसे संदेह हुआ कि कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज का उपयोग कर भुगतान से बचने की कोशिश की जा रही है।

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जांच एजेंसियों के अनुसार, शिकायत के साथ कई दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ऑडियो बातचीत और डिजिटल डेटा उपलब्ध कराया गया है। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है। जांचकर्ता अब वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों की उत्पत्ति और दोनों पक्षों के बीच हुए संचार का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं।

मामले में दर्ज आरोपों में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, धोखाधड़ी के उद्देश्य से जाली दस्तावेज तैयार करना, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से कथित फर्जी दस्तावेज का उपयोग करना तथा कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि व्यक्तिगत संबंधों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े विवादों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, बैंकिंग रिकॉर्ड, ई-मेल, चैट, क्लाउड दस्तावेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण जांच सामग्री बन जाते हैं। यदि किसी वित्तीय विवाद में डिजिटल दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठते हैं, तो फॉरेंसिक जांच अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर होने वाले अनौपचारिक वित्तीय लेनदेन अक्सर बाद में जटिल कानूनी विवादों का रूप ले सकते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता या निवेश को उचित दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत दर्ज करना आवश्यक है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। जांच एजेंसियां उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही हैं तथा दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल की जा रही है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला केवल वित्तीय विवाद है या फिर कथित धोखाधड़ी और जालसाजी का संगठित प्रकरण।

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