AI-first रणनीति के तहत Meta में 20 मई से संभावित बड़ी छंटनी की रिपोर्ट, करीब 8,000 नौकरियों पर खतरे की आशंका।

AI की आंधी में ‘मानव वर्कफोर्स’ पर वार: 20 मई को मेटा में 8 हजार नौकरियों पर संकट

Team The420
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नई दिल्ली। वैश्विक टेक इंडस्ट्री में छंटनी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब इस कड़ी में Meta Platforms भी बड़े फैसले की ओर बढ़ती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 20 मई को अपने इतिहास की सबसे बड़ी छंटनियों में से एक को अंजाम दे सकती है, जिसमें पहले चरण में करीब 8,000 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। यह आंकड़ा कंपनी के कुल वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग 10% माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह कदम किसी वित्तीय संकट की वजह से नहीं, बल्कि कंपनी के रणनीतिक बदलाव का हिस्सा है। Mark Zuckerberg की अगुवाई में मेटा अब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है, जहां कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने की दिशा में कंपनी अपने ढांचे को पुनर्गठित कर रही है।

AI पर दांव, कर्मचारियों पर दबाव

मेटा की इस संभावित छंटनी के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका ‘AI-फर्स्ट’ विजन माना जा रहा है। कंपनी इस साल AI टेक्नोलॉजी के विस्तार पर लगभग 135 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है, जबकि 2028 तक यह निवेश 600 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह संकेत साफ है कि आने वाले समय में कंपनी का फोकस पारंपरिक मानव श्रम से हटकर मशीन आधारित दक्षता पर रहेगा।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल मेटा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में एक नई दिशा तय कर रहा है। AI के बढ़ते प्रभाव के चलते कंपनियां अब उन भूमिकाओं को कम कर रही हैं जिन्हें ऑटोमेशन से बदला जा सकता है।

कंपनी के भीतर शुरू हो चुकी है तैयारी

मेटा ने इस संभावित छंटनी से पहले आंतरिक स्तर पर कई बड़े बदलाव भी शुरू कर दिए हैं। कंपनी कर्मचारियों को नए विभागों में ट्रांसफर कर रही है ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुसार जरूरी प्रतिभाओं को बनाए रखा जा सके। इसी रणनीति के तहत एक नई ‘Applied AI’ यूनिट बनाई गई है, जहां चुनिंदा इंजीनियर्स को तैनात किया गया है।

यह टीम ऐसे एडवांस्ड AI एजेंट्स विकसित कर रही है, जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के कोडिंग और जटिल कार्यों को अंजाम दे सकें। इसके अलावा, कुछ कर्मचारियों को ‘Meta Small Business’ यूनिट में भी शिफ्ट किया गया है। इन कदमों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि कंपनी पहले अपने कोर टैलेंट को सुरक्षित कर रही है और उसके बाद बाकी विभागों में कटौती की तैयारी है।

किन पदों पर सबसे ज्यादा खतरा

हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर किसी विशेष पद का नाम नहीं लिया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सबसे ज्यादा असर नॉन-एआई रोल्स पर पड़ेगा। इसमें प्रोडक्ट ऑपरेशंस, सपोर्ट फंक्शंस और पारंपरिक टेक भूमिकाएं शामिल हो सकती हैं।

इसके साथ ही मिडिल मैनेजमेंट भी कंपनी के रडार पर है। मेटा अब एक ‘फ्लैट ऑर्गनाइजेशन’ मॉडल की ओर बढ़ रही है, जहां मैनेजमेंट की परतें कम होंगी। हाल के उदाहरणों में देखा गया है कि कंपनी के कुछ AI प्रोजेक्ट्स में एक मैनेजर के अधीन 50 तक कर्मचारी काम कर रहे हैं। यह बदलाव संकेत देता है कि भविष्य में मैनेजमेंट की कई परतें समाप्त की जा सकती हैं।

2026 में छंटनी का बढ़ता ग्राफ

इस वर्ष मेटा पहले ही कई चरणों में कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी है। जनवरी में रियलिटी लैब्स डिवीजन में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को हटाया गया, जबकि मार्च में सेल्स और रिक्रूटिंग टीम में भी कटौती की गई। अब 20 मई को प्रस्तावित यह कदम 2026 की सबसे बड़ी छंटनी साबित हो सकता है।

अगर वर्ष की दूसरी छमाही में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहती है, तो कुल छंटनी का आंकड़ा 2022-23 के ‘Year of Efficiency’ को भी पार कर सकता है, जब कंपनी ने करीब 21,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था।

इस बार हालात क्यों अलग हैं

पिछली छंटनियों के विपरीत, इस बार मेटा आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति में है। कंपनी मुनाफे में है और उसके शेयर भी स्थिर बने हुए हैं। इसके बावजूद यह कदम उठाया जा रहा है, जो बताता है कि यह मजबूरी नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

विश्लेषकों का कहना है कि मेटा अब एक ऐसे भविष्य की तैयारी कर रही है जहां कम संख्या में कर्मचारी, लेकिन अधिक तकनीकी क्षमता के साथ काम करेंगे। AI के साथ तालमेल बिठाने वाली यह नई संरचना कंपनी को तेज, लचीला और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि यह छंटनी केवल एक शुरुआत है या टेक इंडस्ट्री में एक बड़े बदलाव की नींव।

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