लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शालीमार कॉर्प लिमिटेड से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। कंपनी के कर्मचारियों और स्क्रैप ठेकेदारों की मिलीभगत से करीब ₹4.74 करोड़ का स्क्रैप हड़पने का आरोप लगाया गया है। मामले में आठ कर्मचारियों और दो ठेकेदारों समेत 10 लोगों के खिलाफ गोमतीनगर विस्तार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि वर्ष 2018 से स्क्रैप की बिक्री में अनियमितताएं की जा रही थीं। कंपनी की आंतरिक जांच में गोपनीय टेंडर की जानकारी ठेकेदारों तक पहुंचाने, स्क्रैप के वजन में कथित हेराफेरी करने और इसके बदले कमीशन लेने की बात सामने आई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शालीमार कॉर्प लिमिटेड के प्रतिनिधि सुमंत सिंह की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई। बताया गया कि पूर्वी क्षेत्र की पुलिस उपायुक्त के निर्देश पर मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। शिकायत में कंपनी की परियोजनाओं से निकलने वाले स्क्रैप की बिक्री में कथित अनियमितताओं और कर्मचारियों तथा ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। कंपनी का दावा है कि इस कथित गड़बड़ी से उसे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
ऑडियो रिकॉर्डिंग से सामने आया कथित खेल
शिकायत के अनुसार, गोमतीनगर विस्तार स्थित शालीमार वन वर्ल्ड टाउनशिप से स्क्रैप उठाने का ठेका मिक्स न्यू इंडिया स्टील के मालिक चांद बाबू और रेयांश ट्रेडर्स तथा शाहिद एंटरप्राइजेज के मालिक सैयद फैजल अली को दिया गया था। स्क्रैप की बिक्री और उठान की प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर कंपनी को संदेह हुआ।
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मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब ठेकेदार चांद बाबू और अयोध्या रोड स्थित शालीमार मन्नत परियोजना के स्टोर असिस्टेंट पंकज शुक्ला के बीच हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस रिकॉर्डिंग से स्क्रैप के लेनदेन में कथित गड़बड़ी से जुड़े कुछ अहम तथ्य सामने आए। इसके बाद कंपनी ने मामले की आंतरिक जांच कराई और संबंधित कर्मचारियों तथा ठेकेदारों की भूमिका की पड़ताल की।
गोपनीय टेंडर की जानकारी लीक करने का आरोप
कंपनी की आंतरिक जांच में कथित तौर पर पाया गया कि स्क्रैप की बिक्री से जुड़ी अनियमितताएं वर्ष 2018 से चल रही थीं। आरोप है कि कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया। स्क्रैप की बिक्री के लिए जारी होने वाले गोपनीय टेंडर की जानकारी पहले ही ठेकेदारों तक पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है।
शिकायत में परचेज ऑफिसर आलोक त्रिपाठी और विलायत हसन पर टेंडर से संबंधित गोपनीय जानकारी ठेकेदारों को उपलब्ध कराने का आरोप है। दावा किया गया है कि इस जानकारी के आधार पर ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया में फायदा मिलता था। इसके बाद स्क्रैप के वजन की तौल में कथित हेराफेरी कर कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता था।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि इस पूरे कथित खेल में संबंधित कर्मचारियों को कमीशन दिया जाता था। शिकायत के मुताबिक, आलोक त्रिपाठी को ₹5 लाख और विलायत हसन को ₹1 लाख दिए जाने का आरोप है। अन्य संबंधित कर्मचारियों को भी कमीशन की रकम मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
आठ कर्मचारी और दो ठेकेदार जांच के दायरे में
मामले में कंपनी के परचेज ऑफिसर आलोक त्रिपाठी, विलायत हसन और देवेंद्र सिंह के अलावा हेड स्टोर आनंद यादव, वासुदेव परीदा, पवनजीत सिंह, नितिन सैनी और बहादुर वारिस के नाम शिकायत में सामने आए हैं। इन कर्मचारियों पर कथित रूप से स्क्रैप ठेकेदारों के साथ मिलकर कंपनी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।
इसके अलावा ठेकेदार चांद बाबू और सैयद फैजल अली को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। पुलिस को अब यह पता लगाना है कि स्क्रैप की खरीद-बिक्री, टेंडर प्रक्रिया, वजन की पर्चियों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं। साथ ही, कथित कमीशन के भुगतान और कंपनी को हुए नुकसान की वास्तविक राशि का भी सत्यापन किया जाएगा।
पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी, जांच जारी
गोमतीनगर विस्तार थाने के प्रभारी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों के निर्देश पर आठ कर्मचारियों और दो ठेकेदारों समेत 10 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूरे मामले की विवेचना की जा रही है। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और कंपनी के दस्तावेजों के आधार पर आरोपों की जांच करेगी। जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जाएगी।
फिलहाल, ₹4.74 करोड़ के कथित स्क्रैप घोटाले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। प्राथमिकी दर्ज होने से किसी आरोपी का दोष सिद्ध नहीं होता। पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
