Ballia के Rasra में मंदिर और पोखरे की करीब साढ़े छह बीघा जमीन को कथित तौर पर private property दिखाकर registry कराने के मामले में court order पर 18 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

मंदिर और पोखरे की साढ़े छह बीघा जमीन पर फर्जीवाड़े का आरोप, 50 करोड़ की संपत्ति की रजिस्ट्री मामले में 18 पर मुकदमा

Team The420
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बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा कस्बे में मंदिर और पोखरे की करीब साढ़े छह बीघा बेशकीमती जमीन को कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने का मामला सामने आया है। श्री ठाकुर जी और श्री महादेव जी मंदिर की संपत्ति को निजी जमीन दर्शाकर उसकी रजिस्ट्री अलग-अलग लोगों के पक्ष में कराए जाने का आरोप है। बाजार भाव के अनुसार इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामले में न्यायालय के आदेश पर रसड़ा कोतवाली पुलिस ने 18 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों में जमीन की रजिस्ट्री कराने और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर करने के आरोप झेल रहे लोग शामिल हैं।

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मंदिर के सर्वराहाकार रिखीलाल ने इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम, बलिया की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर और पोखरे के नाम दर्ज जमीन को सुनियोजित तरीके से निजी संपत्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके लिए नगर पालिका परिषद रसड़ा के गृहकर रजिस्टर में कथित रूप से फर्जी मकान नंबर दर्ज कराए गए, ताकि सरकारी अभिलेखों में जमीन पर निजी स्वामित्व का आभास पैदा किया जा सके। इसके बाद इसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री अलग-अलग व्यक्तियों के पक्ष में करा दी गई।

गृहकर रजिस्टर में मकान नंबर दर्ज कराकर जमीन बेचने का आरोप

शिकायत के अनुसार, संबंधित जमीन सरकारी अभिलेखों में श्री ठाकुर जी, श्री महादेव जी और पोखरे की संपत्ति के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद आरोप है कि मनौवर अली और उनके परिवार के सदस्यों ने कथित रूप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और पोखरे से संबंधित जमीन पर मकान नंबर दर्ज करवा दिए। इन प्रविष्टियों का इस्तेमाल संपत्ति को निजी बताने के लिए किया गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर पालिका के गृहकर रजिस्टर में नाम और मकान नंबर दर्ज होने के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री 28 और 30 जुलाई को अलग-अलग व्यक्तियों के पक्ष में कराई गई। इनमें पुष्पराज वर्मा, संजीत कुमार प्रसाद, सरफराज अंसारी और उषा वर्मा समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। आरोप है कि मंदिर की संपत्ति को निजी जमीन के रूप में पेश करने के लिए दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और इस तरह जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई गई।

रिखीलाल ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि मंदिर की संपत्ति को सामान्य निजी संपत्ति की तरह बेचने का अधिकार किसी व्यक्ति को नहीं है। इसके बावजूद कथित साजिश के तहत दस्तावेज तैयार कराकर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। उन्होंने इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

सात भूखंडों और पोखरे की जमीन का मामला

प्रार्थना पत्र में मंदिर की संपत्ति के रूप में दर्ज कई भूखंडों का विवरण दिया गया है। इनमें 0.121 हेक्टेयर, 0.360 हेक्टेयर, 0.267 हेक्टेयर, 0.134 हेक्टेयर, 0.227 हेक्टेयर, 0.154 हेक्टेयर और 0.004 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले भूखंड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पोखरे की 0.361 हेक्टेयर जमीन का भी उल्लेख किया गया है।

इन सभी भूखंडों का कुल क्षेत्रफल 1.628 हेक्टेयर बताया गया है, जो करीब साढ़े छह बीघे के बराबर है। यह जमीन रसड़ा कस्बे के मुख्य बाजार में पुलिस चौकी के पास स्थित है। व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान पर होने के कारण इसकी कीमत काफी अधिक आंकी जा रही है।

शिकायत में बाजार भाव के आधार पर एक बीघा जमीन की कीमत करीब छह करोड़ रुपये बताई गई है। इस हिसाब से साढ़े छह बीघा जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 39 करोड़ रुपये बैठता है। हालांकि, पूरे भूखंड का मूल्य करीब 50 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। यह बाजार आधारित अनुमान है, आधिकारिक मूल्यांकन नहीं। जमीन के वास्तविक मूल्य का निर्धारण संबंधित अभिलेखों और मूल्यांकन के आधार पर किया जा सकता है।

इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी

न्यायालय के आदेश पर दर्ज प्राथमिकी में इजहार अहमद, वकील अहमद, आफताब अहमद, शाबरा खातून, मुहम्मद अहमद, अमजद अली, सद्दाम हुसैन, शमशेर आलम, मुहम्मद गोरी, पुष्पराज वर्मा, संजीत कुमार प्रसाद, सरफराज अंसारी, उषा वर्मा, पल्लू वर्मा, ठाकुरजी वर्मा, पारस नाथ गुप्ता और सुरेश कुमार समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। उपलब्ध विवरण में नामजद आरोपियों की सूची में 17 नाम हैं, जबकि प्राथमिकी को 18 लोगों के खिलाफ दर्ज बताया गया है।

पुलिस के अनुसार, न्यायालय के आदेश पर नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की विवेचना की जा रही है। जांच में दस्तावेजों की प्रामाणिकता, नगर पालिका के गृहकर रजिस्टर में की गई प्रविष्टियों, जमीन के स्वामित्व संबंधी राजस्व अभिलेखों और रजिस्ट्री की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।

करीब दो दशक से विवादित है जमीन

मंदिर और पोखरे से जुड़ी यह संपत्ति पिछले करीब दो दशकों से विवाद में बताई जा रही है। मुख्य बाजार में स्थित होने के कारण जमीन का व्यावसायिक महत्व भी काफी अधिक है। अब प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच का प्रमुख पहलू यह होगा कि गृहकर रजिस्टर में मकान नंबर और नाम किस आधार पर दर्ज किए गए तथा जमीन की रजिस्ट्री के लिए किन दस्तावेजों का सहारा लिया गया।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। पुलिस की जांच और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल से ही कथित फर्जीवाड़े की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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