चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों में करीब ₹200 करोड़ के मैनपावर और सिक्योरिटी सर्विसेज टेंडरों में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने फर्म संचालक संदीप मलिक समेत दो लोगों से पूछताछ की है। जांच का मुख्य केंद्र सरकारी ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट और अन्य तकनीकी दस्तावेजों का इस्तेमाल करना है। इसके साथ ही टेंडरों की अवधि समाप्त होने के बाद करोड़ों रुपये के ठेकों को आगे बढ़ाने में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
जांच के दायरे में चार फर्मों के तीन संचालक संदीप मलिक, रेखा और सतीश कुमार तथा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारी हैं। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से गलत दस्तावेजों के आधार पर कंपनियों को सरकारी ठेकों के लिए पात्र कैसे घोषित किया गया और टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में किन अधिकारियों ने भूमिका निभाई। जांच टीम संबंधित विभागों के कार्यालयों में जाकर टेंडर से जुड़े रिकॉर्ड, अनुभव प्रमाणपत्रों और कार्य निष्पादन प्रमाणपत्रों की जांच करेगी।
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इस मामले में सीबीआई ने 13 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की थी। यह कार्रवाई एजुकेशन डिपार्टमेंट ग्रुप-डी एम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष रंजीत मिश्रा की ओर से 29 सितंबर 2026 को दी गई शिकायत के बाद की गई। मामले की जांच सीबीआई के एक उपाधीक्षक के नेतृत्व में चल रही है। जांच एजेंसी इससे पहले तीनों फर्म संचालकों के कार्यालयों और आवासों पर तलाशी लेकर लैपटॉप और कंप्यूटर सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर चुकी है। इन उपकरणों में मौजूद दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के जरिए टेंडर प्रक्रिया से संबंधित साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
जीएमएसएच-16 के ₹25 करोड़ के टेंडर पर विशेष नजर
जांच का एक प्रमुख हिस्सा सेक्टर-16 स्थित सरकारी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल (जीएमएसएच-16) में बीएससी नर्सिंग सेवाओं के लिए जारी दो वर्षीय मैनपावर आउटसोर्सिंग टेंडर है। करीब ₹25 करोड़ का यह टेंडर नवंबर 2025 में जारी किया गया था। इसमें जेम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल के माध्यम से 392 कंपनियों ने बोली लगाई थी।
आरोप है कि करीब ₹75 करोड़ के मैनपावर कार्यों का अनुभव दर्शाने वाले प्रमाणपत्रों के आधार पर एक ही परिवार से जुड़ी तीन कंपनियों को पात्र घोषित किया गया, जबकि बाकी 389 कंपनियां अयोग्य करार दी गईं। यह ठेका संदीप मलिक की कंपनी एटूजेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विस को मिला था। सीबीआई की जांच में इस टेंडर के लिए जमा किए गए अनुभव प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता पर सवाल उठे हैं। एजेंसी यह भी जांचेगी कि दस्तावेजों के आधार पर कंपनियों की पात्रता तय करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
इससे पहले इसी टेंडर से संबंधित कार्य जाहरवीर मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विस ने दो साल तक किया था। अब इस कंपनी की ओर से प्रस्तुत प्रमाणपत्रों और संबंधित कार्यों के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टेंडर प्रक्रिया में अनुभव और कार्य निष्पादन से जुड़े मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
जेल से कॉलेज तक कई विभागों के ठेके जांच के घेरे में
सीबीआई की जांच केवल जीएमएसएच-16 तक सीमित नहीं है। मॉडल जेल बुड़ैल में मैनपावर और सुरक्षा सेवाओं के करीब ₹9 करोड़ के टेंडर से संबंधित दस्तावेज भी जांचे जाएंगे। स्पोर्ट्स और सोशल वेलफेयर विभागों में ₹20 करोड़ से अधिक के टेंडरों के आवंटन में इस्तेमाल किए गए प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल होगी।
सेक्टर-42 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज (पीजीजीसी) का मामला भी जांच के दायरे में है। यहां ₹3 करोड़ से अधिक के टेंडर के लिए 195 कंपनियों ने आवेदन किया था। आरोप है कि जांच प्रक्रिया में एक ही परिवार की तीन कंपनियों को पात्र घोषित किया गया। सीबीआई यह पता लगाएगी कि अन्य आवेदक कंपनियों को अयोग्य ठहराने के पीछे क्या आधार था और क्या सभी आवेदकों के दस्तावेजों का मूल्यांकन समान मानकों के तहत किया गया था।
समयसीमा समाप्त होने के बाद ठेके बढ़ाने की भी पड़ताल
जांच एजेंसी करीब ₹15-15 करोड़ के उन टेंडरों की भी जांच करेगी, जिन्हें मूल अवधि समाप्त होने के बाद एक साल या उससे अधिक समय के लिए बढ़ाया गया। इसमें मॉडल जेल बुड़ैल के मैनपावर टेंडर का मामला शामिल है। आरोप है कि एक पीसीएस अधिकारी ने अपने स्तर पर इस टेंडर की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी थी। जेल अधीक्षक प्रमोद कुमार ने इस विस्तार को लेकर सीबीआई में अलग शिकायत दी थी। यह शिकायत दूसरे उपाधीक्षक के पास लंबित बताई गई है और इसे मौजूदा जांच में शामिल किए जाने की संभावना है।
स्पोर्ट्स विभाग में संदीप मलिक के परिवार से जुड़ी कंपनी के ₹15 करोड़ से अधिक के टेंडर को एक साल के लिए बढ़ाए जाने की भी जांच होगी। एजेंसी यह पता लगाएगी कि विस्तार देने के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी ली गई थी या नहीं और क्या इस दौरान निर्धारित खरीद प्रक्रिया का पालन किया गया।
जांच में जेम पोर्टल के नियमों के तहत टेंडर विस्तार की वैधता भी महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, तीन महीने से अधिक अवधि तक ठेका बढ़ाने पर प्रतिबंध से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन की जांच की जाएगी। सीबीआई यह भी परखेगी कि दोबारा निविदा आमंत्रित किए बिना कंपनियों को लंबे समय तक काम जारी रखने का अवसर कैसे मिला और इससे सरकारी खजाने या प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ा या नहीं।
फिलहाल जांच एजेंसी दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के आधार पर साक्ष्य जुटा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
