गोरखपुर। नेपाल से सोनौली सीमा के रास्ते बिहार भेजे जा रहे गांजे की बड़ी खेप राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने बरामद की है। कार्रवाई के दौरान ट्रक में छिपाकर रखे गए 591.3 किलोग्राम गांजे के 81 पैकेट मिले। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब तीन करोड़ रुपये बताई गई है। तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है। मामले में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
डीआरआई के दिल्ली मुख्यालय को सूचना मिली थी कि नेपाल से गांजे की एक बड़ी खेप सोनौली सीमा के रास्ते भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद गोरखपुर होते हुए बिहार पहुंचाई जाने वाली है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय ने लखनऊ स्थित इकाई को सतर्क किया। इसके बाद गोरखपुर की टीम ने संदिग्ध वाहनों की निगरानी शुरू कर दी। अभियान के दौरान नेपाल सीमा से आने वाले वाहनों की आवाजाही पर विशेष नजर रखी गई, ताकि मादक पदार्थों की खेप को गंतव्य तक पहुंचने से पहले पकड़ा जा सके।
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तस्करी के इस संभावित मार्ग पर निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए डीआरआई की लखनऊ, पटना और वाराणसी इकाइयों के साथ भी समन्वय स्थापित किया गया। जांच टीमों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया, जिससे संदिग्ध ट्रक की गतिविधियों का पता लगाने और उसके बिहार की ओर आगे बढ़ने से पहले कार्रवाई करने में मदद मिल सके।
टोल डेटा और सीसीटीवी से ट्रक की पहचान
संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए डीआरआई गोरखपुर की टीम ने चार घंटे से अधिक समय तक निगरानी की। इस दौरान विभिन्न टोल प्लाजा से मिले डेटा और सीसीटीवी फुटेज की मदद से ट्रक की आवाजाही पर नजर रखी गई। वाहन के संभावित मार्ग और उसकी गतिविधियों का मिलान करने के बाद टीम ने गोरखपुर-कुशीनगर मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी।
रविवार सुबह अभियान के दौरान फोरलेन के किनारे एक संदिग्ध ट्रक खड़ा दिखाई दिया। टीम ने वाहन की जांच शुरू की। शुरुआती निरीक्षण के बाद ट्रक के अलग-अलग हिस्सों की बारीकी से तलाशी ली गई। इसी दौरान अधिकारियों को उसमें तस्करी के लिए बनाए गए दो गुप्त चैंबर मिले। इन चैंबरों में मादक पदार्थ छिपाकर ले जाने की व्यवस्था की गई थी, ताकि सामान्य जांच के दौरान खेप आसानी से पकड़ में न आए।
बोनट और चालक की सीट के पीछे छिपाए थे पैकेट
जांच में सामने आया कि ट्रक के बोनट के ऊपर एक गुप्त चैंबर बनाया गया था, जबकि दूसरा चालक की सीट के ठीक पीछे तैयार किया गया था। दोनों स्थानों की तलाशी लेने पर कुल 81 पैकेट बरामद हुए। इनमें गांजा भरा हुआ था, जिसका कुल वजन 591.3 किलोग्राम निकला। अधिकारियों ने मौके पर फील्ड टेस्टिंग किट से बरामद पदार्थ की जांच की। प्रारंभिक परीक्षण में पदार्थ के गांजा होने की पुष्टि हुई।
इसके बाद डीआरआई ने बरामद मादक पदार्थ और तस्करी में इस्तेमाल किए गए ट्रक को जब्त कर लिया। मामले में स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) के तहत कार्रवाई की गई है। जांच का दायरा अब उन लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने खेप की व्यवस्था की, उसे ट्रक में छिपाया या सीमा पार से बिहार तक पहुंचाने की योजना बनाई थी।
तस्करी के नेटवर्क की पड़ताल में जुटी टीम
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की खेप नेपाल में कहां से लाई गई थी, इसे किस स्थान पर ट्रक में छिपाया गया और बिहार में इसकी आपूर्ति किसे की जानी थी। ट्रक के इस्तेमाल, उसके संभावित मार्ग और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी आरोपी की गिरफ्तारी या तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है।
नेपाल से सटी सोनौली सीमा के रास्ते गोरखपुर होते हुए बिहार तक जाने वाले मार्ग पर इस कार्रवाई को मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के अभियान के तहत अहम माना जा रहा है। गुप्त चैंबरों में बड़ी मात्रा में गांजा छिपाकर ले जाने का तरीका इस बात की ओर संकेत करता है कि खेप को सामान्य वाहन जांच से बचाने की तैयारी की गई थी। अब जांच एजेंसी की प्राथमिकता तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाना और खेप के स्रोत तथा उसके संभावित खरीदारों की पहचान करना है।
