करनाल: हरियाणा के करनाल में गोल्ड लोन ट्रांसफर कराने के नाम पर ₹13.50 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि अर्बन एस्टेट सेक्टर-7 निवासी आकाश ने मण्णापुरम गोल्ड लोन फाइनेंस लिमिटेड के कर्मचारियों को विश्वास में लेकर बताया कि उसका गोल्ड लोन IIFL Finance में चल रहा है और वह उसे मण्णापुरम में ट्रांसफर कराना चाहता है। कंपनी ने लोन बंद कराने के लिए ₹13.50 लाख की रकम निर्धारित खाते में भेजी, लेकिन भुगतान की राशि वापस आकाश के खाते में पहुंचने के बाद उसने कथित तौर पर कंपनी के कर्मचारियों के फोन उठाने बंद कर दिए और मोबाइल भी बंद कर लिया। शिकायत और दस्तावेजों की जांच के बाद थाना शहर करनाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, पुरानी सब्जी मंडी स्थित मण्णापुरम गोल्ड लोन फाइनेंस लिमिटेड के ब्रांच मैनेजर रोहित कुमार ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आकाश कंपनी के पास पहुंचा था और उसने IIFL Finance में चल रहे अपने गोल्ड लोन को मण्णापुरम में ट्रांसफर कराने की इच्छा जताई थी। उसने संबंधित लोन की क्लोजिंग राशि ₹13.50 लाख बताई और कंपनी से इस रकम का भुगतान कराने को कहा। उसके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर कंपनी ने लोन ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
शिकायत के मुताबिक, 29 जुलाई 2026 को मण्णापुरम की ओर से ₹13.50 लाख की रकम इंडसइंड बैंक के माध्यम से IIFL Finance के वर्चुअल अकाउंट नंबर पर RTGS की गई। इस भुगतान का उद्देश्य IIFL Finance में चल रहे आकाश के गोल्ड लोन की बकाया राशि चुकाना था। इसके बाद वहां गिरवी रखा सोना छुड़ाकर उसे मण्णापुरम कंपनी के पास जमा कराया जाना था। हालांकि, किसी कारण से भुगतान की रकम 30 जुलाई को वापस आकाश के बैंक खाते में रिफंड हो गई।
रकम वापस आने के बाद कंपनी के कर्मचारियों ने जब आकाश से संपर्क करने की कोशिश की तो उसने कथित तौर पर फोन उठाना बंद कर दिया। बाद में उसका मोबाइल नंबर भी बंद मिला। कंपनी के कर्मचारी 30 जुलाई को उसके घर पहुंचे। वहां परिवार के सदस्यों से पूछताछ करने पर पता चला कि आकाश सुबह घर से निकला था और वापस नहीं आया था। इसके बाद कंपनी की ओर से पुलिस को शिकायत देकर ₹13.50 लाख की रकम वापस दिलाने और मामले में कार्रवाई की मांग की गई।
पुलिस जांच के दौरान शिकायत के साथ कई दस्तावेज सामने आए। इनमें कंपनी और आकाश के बीच हुआ समझौता, चेक, बाउंस चेक, ऑनलाइन बैंक स्टेटमेंट और आरोपी के घर पर कंपनी कर्मचारियों की विजिट से संबंधित तस्वीरें शामिल थीं। इसके अलावा IIFL Finance में गिरवी रखे सोने की पर्चियां तथा आकाश के आधार कार्ड और PAN कार्ड की प्रतियां भी जांच के लिए उपलब्ध कराई गईं। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने लेनदेन और कथित धोखाधड़ी की परिस्थितियों की पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों को नोटिस जारी किए। पुलिस के अनुसार, बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद आकाश जांच में शामिल नहीं हुआ। वहीं ब्रांच मैनेजर रोहित कुमार थाने पहुंचे और अपना बयान दर्ज कराया। पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
पुलिस का आरोप है कि आकाश ने कंपनी को यह भरोसा दिलाया था कि उसके खाते से जुड़ी लोन प्रक्रिया पूरी होने के बाद IIFL Finance का बकाया भुगतान किया जाएगा और वहां गिरवी रखा सोना छुड़ाकर मण्णापुरम के पास जमा कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार, रकम वापस उसके खाते में आने के बाद उसने कथित तौर पर उसे निकालकर IIFL Finance में भुगतान किया और गिरवी रखा सोना छुड़ा लिया। इसके बाद उसने मण्णापुरम कंपनी को इसकी जानकारी नहीं दी और संपर्क से बाहर हो गया।
मामले की जांच अब बैंकिंग लेनदेन और गोल्ड लोन से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ₹13.50 लाख की रकम वापस होने की प्रक्रिया कैसे हुई, रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और IIFL Finance से सोना छुड़ाने के बाद उसकी स्थिति क्या है। जांच में संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
यह मामला गोल्ड लोन ट्रांसफर की प्रक्रिया में वित्तीय संस्थानों के सामने आने वाले जोखिम को भी सामने लाता है। जब किसी पुराने ऋण को नए ऋणदाता के पास स्थानांतरित किया जाता है, तब भुगतान, लोन क्लोजर और गिरवी संपत्ति के हस्तांतरण की प्रत्येक प्रक्रिया का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी होता है। किसी भी चरण में भुगतान की स्थिति बदलने पर संबंधित संस्था को तत्काल पुष्टि करनी चाहिए।
करनाल पुलिस ने आरोपी आकाश के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस उसके बैंक खातों, मोबाइल नंबर और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा रही है। आरोपी की भूमिका और बरामदगी से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
