मुंबई: महाराष्ट्र के वसई ईस्ट में एक लॉज का कमरा कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का संचालन केंद्र बना हुआ था। पुलिस ने छापेमारी कर गुजरात के तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने नौ राज्यों में लोगों को निशाना बनाकर ₹20 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी की। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 20 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप और फर्जी आधार व पैन कार्ड बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित ठगी की रकम में से करीब ₹1.5 करोड़ दो बैंक खातों में जमा हुए थे, जो गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, लॉज में ठहरे युवकों की गतिविधियां वहां काम करने वाले एक कर्मचारी को संदिग्ध लगीं। तीनों करीब एक महीने से लॉज में रह रहे थे। वे दिनभर कमरे के अंदर रहते और लगातार फोन कॉल करते थे, जबकि रात में बाहर जाने के बजाय कमरे में ही शराब पीने में समय बिताते थे। उनकी गतिविधियों पर संदेह होने के बाद कर्मचारी ने पुलिस को इसकी जानकारी दी।
सूचना के आधार पर वालिव पुलिस ने बुधवार को लॉज के कमरे पर छापा मारा। वहां तीनों आरोपी मौजूद मिले। पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि कमरे से ही साइबर ठगी से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्जी पहचान दस्तावेज मिले, जिसके बाद आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू की गई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वडोदरा निवासी शेख आफताब अहमद (28), शेख मोहम्मद सैफ (21) और शाहरुख पठान (30) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आफताब पेशे से ड्राइवर और शाहरुख डिलीवरी एजेंट है, जबकि तीसरा आरोपी भी वडोदरा का रहने वाला है। तीनों पर सेक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट और अन्य तरह के साइबर फ्रॉड में कथित रूप से शामिल होने का आरोप है।
जांच में पुलिस को पता चला कि गिरोह कथित तौर पर अलग-अलग राज्यों में मौजूद लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा पीड़ितों को संदिग्ध या दुर्भावनापूर्ण APK फाइलें भेजी जाती थीं। इसके अलावा लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर फोन कॉल किए जाते थे और उन्हें कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों का नेटवर्क देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद कथित म्यूल बैंक खाताधारकों से भी जुड़ा था। इन खातों के जरिए रोजाना लाखों रुपये की संदिग्ध लेनदेन होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इन बैंक खातों के वास्तविक संचालकों और उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिनके खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया गया।
जांच में दो बैंक खातों से जुड़े लेनदेन विशेष रूप से सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, इन खातों में करीब ₹1.5 करोड़ की संदिग्ध रकम जमा हुई। अलग-अलग स्थानों पर इन खातों से संबंधित 25 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। इससे जांचकर्ताओं को संदेह है कि गिरोह का नेटवर्क केवल वसई या गुजरात तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ था।
पुलिस अब बैंक खातों की पूरी लेनदेन श्रृंखला, मोबाइल नंबरों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और आरोपियों के संपर्कों की जांच कर रही है। बरामद पांच लैपटॉप और 20 मोबाइल फोन से गिरोह के संचालन, पीड़ितों की जानकारी, भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य संभावित आरोपियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिलने की उम्मीद है। फर्जी आधार और पैन कार्ड की बरामदगी से यह भी जांच का विषय बन गया है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक खाते, मोबाइल कनेक्शन या अन्य सेवाएं हासिल करने में किया गया था या नहीं।
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब गिरोह से जुड़े चार अन्य कथित सदस्यों की तलाश कर रही हैं। साथ ही उन म्यूल खाताधारकों और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है, जिनका संबंध इस नेटवर्क से हो सकता है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कथित साइबर नेटवर्क की पूरी संरचना और ठगी की वास्तविक रकम का पता लगाना है। इसके लिए आरोपियों के डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों और संपर्कों की जांच की जा रही है। जांच से यह स्पष्ट करने की कोशिश भी होगी कि नौ राज्यों में कथित रूप से फैले इस नेटवर्क में प्रत्येक सदस्य की क्या भूमिका थी और ठगी की रकम किन-किन खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे भेजी जाती थी।
