लखनऊ: आशियाना क्षेत्र में कम ब्याज पर गोल्ड लोन दिलाने के नाम पर एक महिला से करीब 267 ग्राम सोने के जेवर हड़पने का मामला सामने आया है। आरोप है कि परिचितों ने महिला को कम ब्याज पर ₹5 लाख का गोल्ड लोन दिलाने का भरोसा दिया और उसे एक फाइनेंस कंपनी की शाखा में ले जाकर जेवर गिरवी रखवा दिए। शिकायत के मुताबिक, लोन की प्रक्रिया में जेवरों की रसीद महिला के नाम के बजाय एक आरोपी के नाम पर बनवाई गई। बाद में आरोपी कथित तौर पर जेवर छुड़ाकर ले गए। विरोध करने पर महिला को पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी देने और सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराने का भी आरोप है। पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
लोन की जरूरत के दौरान आरोपियों से हुई मुलाकात
जानकीपुरम क्षेत्र की रहने वाली डॉ. मीनाक्षी त्रिपाठी के अनुसार, वर्ष 2019 में उन्हें इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े काम के लिए करीब ₹5 लाख की जरूरत थी। इसी दौरान उनके परिचित निहिल मोहन श्रीवास्तव ने उनकी मुलाकात सुरेंद्र पाल सिंह उर्फ मोनू, गुरप्रीत सिंह जोरावर और गगनप्रीत सिंह से कराई। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे कम ब्याज दर पर गोल्ड लोन की व्यवस्था करा सकते हैं।
महिला का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें आशियाना स्थित मुथूट फाइनेंस की शाखा में ले जाकर सोने के जेवर गिरवी रखने की प्रक्रिया पूरी कराई। मार्च 2019 में करीब 267 ग्राम सोने के जेवर ₹5 लाख के लोन के लिए गिरवी रखे गए। हालांकि, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में जेवरों की रसीद महिला के नाम पर बनवाने के बजाय गुरप्रीत सिंह के नाम पर जारी कराई गई।
जेवर छुड़ाने पहुंची तो सामने आया मामला
पीड़िता के अनुसार, कुछ समय बाद जब वह अपने सोने के जेवर वापस लेने के लिए फाइनेंस कंपनी पहुंचीं तो उन्हें पता चला कि आरोपी पहले ही जेवर छुड़ाकर ले जा चुके थे। शिकायत के मुताबिक, महिला को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके नाम पर गिरवी रखे गए जेवर किसी अन्य व्यक्ति के नाम से दर्ज हैं और उन्हें उसके पहुंचने से पहले ही निकाल लिया गया।
महिला ने आरोप लगाया कि उसने जब इस मामले में आरोपियों से जवाब मांगा और अपने जेवर वापस करने की बात कही तो विवाद बढ़ गया। शिकायत के अनुसार, 16 अक्टूबर 2020 को आरोपी उसके घर पहुंचे और कथित तौर पर पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उस पर सादे कागजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया गया।
फाइनेंस कंपनी की भूमिका की भी जांच की जरूरत
मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि महिला के सोने के जेवर किस प्रक्रिया के तहत किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर गिरवी रखे गए और बाद में उन्हें किस आधार पर रिलीज किया गया। पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों, लोन रिकॉर्ड, गिरवी रसीद, भुगतान विवरण और फाइनेंस कंपनी के रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि पूरी प्रक्रिया में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी और जेवर छुड़ाने के लिए कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि महिला की पहचान और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित न रहकर आपराधिक साजिश, धमकी और दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग से जुड़े पहलुओं तक भी जा सकता है।
छह साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा
मामला वर्ष 2019 की घटना से जुड़ा है, जबकि पुलिस में शिकायत और मुकदमा अब दर्ज किया गया है। पीड़िता ने पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुलिस अब आरोपियों से जुड़े रिकॉर्ड, फाइनेंस कंपनी के दस्तावेजों और जेवरों के लेनदेन से संबंधित जानकारी जुटा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि शिकायत में नामजद लोगों के बीच आपसी भूमिका क्या थी और महिला को लोन दिलाने के नाम पर बनाई गई पूरी व्यवस्था किस तरह संचालित हुई।
जांच के बाद साफ होगी आरोपों की तस्वीर
मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 267 ग्राम सोने के जेवरों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और यह निर्धारित करना है कि उन्हें किसने और किस प्रक्रिया के तहत छुड़ाया। इसके साथ ही कथित धमकी और सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराने के आरोपों की भी जांच की जाएगी।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले में विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान फाइनेंस कंपनी के रिकॉर्ड, आरोपियों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोपों से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
