रायपुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पिछले साल सामने आए ₹21.15 लाख के साइबर फ्रॉड की जांच अब एक बड़े अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े 23 लोगों को आठ राज्यों से गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में 38 फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल, हजारों यूजर्स, म्यूल बैंक खाते, फिनटेक पेमेंट गेटवे, हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम को विदेश भेजे जाने के संकेत मिले हैं।
मामला उस समय शुरू हुआ जब अंबिकापुर साइबर पुलिस के पास एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि दो फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए उससे 84 अलग-अलग लेनदेन में ₹21.15 लाख की ठगी की गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पिछले साल 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बाद में शिकायतकर्ता ने अदालत का रुख किया, क्योंकि उसका आरोप था कि पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित साइबर फ्रॉड के पीछे एक संगठित नेटवर्क के संचालन के संकेत मिले। जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग नामों और छद्म पहचान का इस्तेमाल करते थे। इसके लिए वर्चुअल नंबर और दूसरे लोगों के नाम पर लिए गए मोबाइल नंबरों का भी इस्तेमाल किया जाता था। नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने, उनका संचालन करने, बैंक खाते उपलब्ध कराने, भुगतान प्रक्रिया संभालने और रकम को आगे ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी बांटी गई थी।
जांच में दो फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े महज चार महीने के क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन का मूल्य ₹1,880 करोड़ से अधिक पाया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग पूरक चार्जशीट में सामने आए तथ्यों ने इस मामले को स्थानीय साइबर ठगी से आगे बढ़ाकर कथित बड़े डब्बा ट्रेडिंग और फिनटेक मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का रूप दे दिया।
जांच से जुड़े एक लेजर में दो महीने से भी कम अवधि में ₹601.90 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग फ्लो का रिकॉर्ड मिला। वहीं अक्टूबर 2025 में अकेले पेमेंट गेटवे के जरिए ₹275.41 करोड़ से अधिक की कलेक्शन का पता चला। बाकी 36 पोर्टलों की जांच अभी जारी है। एक फिनटेक पेमेंट नेटवर्क से करीब ₹690 करोड़ गुजरने की जानकारी मिली है, हालांकि जांचकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक रकम इससे अधिक हो सकती है।
जांच में एक ऐसे वर्चुअल आईडी का भी पता चला, जिसके जरिए एक ही दिन में 822 लेनदेन में ₹8.86 करोड़ की रकम प्रोसेस किए जाने का दावा है। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क में डिजिटल माध्यम से रकम इकट्ठा करने के बाद उसे नकद, हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अलग-अलग स्तरों पर भेजा जाता था।
दिल्ली में कथित तौर पर कैश मैनेजमेंट और हवाला नेटवर्क के जरिए रोजाना ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक की नकदी की आवाजाही होती थी। जांच में यह भी सामने आया कि दुबई में रुपये की रकम को यूएई दिरहम में बदले जाने का आरोप है। इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए चीन स्थित कुछ विक्रेताओं को रकम भेजे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। कथित तौर पर इन पैसों का इस्तेमाल बेटिंग या गेमिंग बैलेंस और सर्वर से जुड़े खर्चों के लिए किया जाता था।
इस पूरे मामले ने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ रिश्वत के आरोपों को भी सामने ला दिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जांच रोकने के लिए एक IPS अधिकारी ने दो अन्य पुलिसकर्मियों के माध्यम से ₹1.5 करोड़ की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से ₹1 करोड़ दिए जाने का दावा किया गया। संबंधित IPS अधिकारी ने आरोपों से इनकार करते हुए उन्हें निराधार बताया है और कहा है कि मामला अदालत में विचाराधीन है तथा उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह नेटवर्क केवल हाल की अवधि में सक्रिय नहीं हुआ, बल्कि इसके 2022 से संचालित होने की आशंका है। ऐसे में मौजूदा जांच में सामने आई रकम और नेटवर्क का आकार अंतिम आंकड़ा नहीं हो सकता। पुलिस अब बाकी फर्जी पोर्टलों, उनके संचालकों, पेमेंट चैनलों और विदेशों तक पहुंची रकम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। मामले की जांच यह भी स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग तकनीकी संचालन, बैंकिंग व्यवस्था, हवाला और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे।
