नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने चीन से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह विदेशी साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने, SIM कार्ड की व्यवस्था करने और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसका मनी ट्रेल छिपाने में मदद करता था। जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह से जुड़े लोग कथित तौर पर साइबर अपराध से हासिल रकम को USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन आधारित ठगों तक पहुंचाने के बदले कमीशन लेते थे।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गीता सिंह (29), ध्रुव (21), अनुज शर्मा (27) और गगन यादव (26) के रूप में हुई है। आरोपियों को हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई एक ऐसे साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान हुई, जिसमें एक व्यक्ति को वर्क फ्रॉम होम जॉब का झांसा देकर कथित तौर पर ₹12 लाख की ठगी की गई थी।
वर्क फ्रॉम होम जॉब के नाम पर शुरू हुई ठगी
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले आकर्षक रिटर्न का लालच दिया गया था। शुरुआत में उससे ऑनलाइन काम शुरू करने के लिए सिक्योरिटी राशि जमा कराई गई। इसके बाद कथित ठगों ने उसे मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाते हुए लगातार रकम जमा करने के लिए कहा।
जब पीड़ित ने अपने कथित earnings को निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने अलग-अलग कारण बताकर उससे अतिरिक्त भुगतान की मांग शुरू कर दी। निकासी नहीं होने और लगातार रकम जमा कराने के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इस मामले में 17 जुलाई को ई-FIR दर्ज की गई और पुलिस ने डिजिटल कम्युनिकेशन तथा बैंकिंग लेनदेन की जांच शुरू की।
IP एड्रेस से चीन कनेक्शन का सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने कथित ठगों के साथ हुई बातचीत और इस्तेमाल किए गए डिजिटल IDs का तकनीकी विश्लेषण किया। पुलिस के अनुसार, इन IDs से जुड़े IP addresses की geolocation चीन में मिली। इसके बाद जांचकर्ताओं ने ठगी की रकम के मनी ट्रेल का विश्लेषण किया।
जांच में पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा गगन यादव के बैंक खाते में पहुंचा था। पुलिस के अनुसार, यही बैंक खाता विदेशी ठगों ने पीड़ित को रकम जमा कराने के लिए उपलब्ध कराया था। तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस गीता सिंह तक पहुंची।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में सिंह ने चीन स्थित साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। आरोप है कि वह साइबर फ्रॉड से हासिल रकम को कमीशन के बदले USDT में बदलने में भी मदद करता था। उसके मोबाइल फोन से चीन आधारित कथित साइबर ठगों के साथ हुई चैट भी बरामद होने की बात कही गई है।
नौ बैंक पासबुक और पांच SIM कार्ड बरामद
पुलिस के अनुसार, सिंह ने पूछताछ में बताया कि बैंक खाता ध्रुव के जरिए उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद पुलिस ने गाजियाबाद में छापेमारी कर ध्रुव को गिरफ्तार किया। उसके पास से नौ बैंक पासबुक, पांच SIM कार्ड और एक रजिस्टर बरामद किया गया। पुलिस के मुताबिक, रजिस्टर में बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले मिले कमीशन का रिकॉर्ड दर्ज था।
जांच में ध्रुव ने कथित तौर पर बताया कि अनुज शर्मा ने गगन यादव के लिए बैंक खाता खुलवाने और उससे जुड़ा SIM कार्ड उपलब्ध कराने में मदद की थी। इसके बाद पुलिस ने नोएडा से शर्मा को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल फोन से कमीशन भुगतान से संबंधित चैट मिलने का दावा किया गया है।
इसके बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश के इटावा से गगन यादव को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, यादव ने कथित तौर पर सिंडिकेट को अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले कमीशन लेने की बात स्वीकार की।
म्यूल खातों से क्रिप्टो तक पहुंचाई जा रही थी रकम
पुलिस का आरोप है कि यह नेटवर्क साइबर ठगी की पूरी रकम को छिपाने के लिए कई स्तरों पर काम करता था। इसमें म्यूल बैंक खातों की व्यवस्था, SIM कार्ड उपलब्ध कराना, ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करना और उसे layer करना शामिल था। इसके बाद रकम को USDT में बदलकर उसके स्रोत और अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने वाले मनी ट्रेल को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
ऐसे नेटवर्क में बैंक खाते सीधे वास्तविक साइबर ठगों के नाम पर नहीं होते। दूसरे लोगों के खातों का इस्तेमाल रकम प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए किया जाता है। इससे जांच एजेंसियों के लिए रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम प्राप्तकर्ता तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
दिल्ली पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, SIM कार्ड, चैट और क्रिप्टो लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने इससे पहले कितने बैंक खाते उपलब्ध कराए और इस नेटवर्क के जरिए कितने साइबर फ्रॉड की रकम को आगे भेजा गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में विदेशी संपर्कों और अन्य संभावित सदस्यों की पहचान की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा नेटवर्क में और लोग भी शामिल हो सकते हैं। मामले में आगे की जांच के आधार पर अन्य गिरफ्तारियां और साइबर ठगी की रकम से जुड़े लेनदेन का खुलासा होने की संभावना है।
