कानपुर। लगभग ₹3200 करोड़ के कथित अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद अब तीन निजी बैंकों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस कमिश्नर ने मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को पत्र भेजकर संबंधित बैंकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई पर विचार करने का अनुरोध किया है।
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, संदिग्ध लेनदेन का नेटवर्क कई बैंक खातों और कथित फर्जी व्यावसायिक संस्थाओं के माध्यम से संचालित किया गया। आरोप है कि बड़ी मात्रा में वित्तीय गतिविधियां होने के बावजूद संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (Suspicious Transaction Report-STR) समय पर दर्ज नहीं की गईं, जबकि कई मामलों में लेनदेन की प्रकृति और दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल मौजूद थे।
पुलिस जांच के अनुसार, 12 विभिन्न बैंकों में खोले गए 68 खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन खातों का इस्तेमाल कथित रूप से फर्जी कारोबार और वित्तीय गतिविधियों को वैध दिखाने के लिए किया गया।
मामले की जांच के दौरान करीब 128 संदिग्ध फर्मों का पता चला है। इनमें 74 फर्में कथित रूप से पशु वध या संबंधित कारोबार से जुड़ी बताई गई हैं, जबकि 54 फर्में स्क्रैप कारोबार से संबंधित बताई गई हैं। इन संस्थाओं को नोटिस जारी कर उनके वित्तीय रिकॉर्ड, कारोबार की प्रकृति और बैंकिंग लेनदेन के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, कई मामलों में कृषि उपज मंडी समिति के कथित फर्जी प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर कारोबार का कृत्रिम रूप से बड़ा टर्नओवर दर्शाया गया और उसी आधार पर बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन किए गए। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था और क्या नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
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मामले का केंद्र जाजमऊ क्षेत्र के निवासी महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी को माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक उपलब्ध साक्ष्यों से हजारों करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क सामने आया है। इस प्रकरण में महफूज आलम, एक जीएसटी अधिवक्ता फिरोज खान समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
हालांकि जांच अभी जारी है और कई अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, महफूज आलम के पुत्र फैज के अलावा नूर आलम, शीबू और रिजवान अभी भी जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर हैं। उनकी भूमिका और संभावित वित्तीय संबंधों की जांच की जा रही है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि प्रारंभिक जांच में कुछ बैंकिंग प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर गंभीर प्रश्न सामने आए हैं। उनके अनुसार, मामले में संबंधित संस्थानों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, इसलिए रिजर्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को विस्तृत पत्राचार किया गया है।
यह मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि बैंकिंग अनुपालन, केवाईसी प्रक्रियाओं, संदिग्ध लेनदेन निगरानी प्रणाली और नियामकीय नियंत्रण तंत्र की प्रभावशीलता को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर रहा है। फिलहाल विभिन्न एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेजों, फर्मों की वास्तविक गतिविधियों और धन के स्रोतों की विस्तृत जांच में जुटी हुई हैं।
