RBI ने डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड पीड़ितों को राहत देने के लिए नया मुआवजा ढांचा जारी किया है, जिसके तहत पात्र ग्राहकों को ₹25,000 तक मुआवजा मिल सकेगा।

डिजिटल ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत: ₹50,000 तक के साइबर फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा, RBI ने जारी किया नया ढांचा

Team The420
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नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर ठगी के मामलों से जूझ रहे ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने छोटे मूल्य के डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड पीड़ितों के लिए मुआवजा ढांचे को अंतिम रूप दे दिया है। नई व्यवस्था के तहत धोखाधड़ी वाली इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ₹50,000 तक का नुकसान उठाने वाले पात्र ग्राहकों को अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकेगा। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी और उसी तारीख के बाद होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर प्रभावी रहेगी।

RBI के अनुसार, यह ढांचा डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत करने और बैंकों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसके तहत किसी व्यक्ति या एकल स्वामित्व वाले व्यवसाय को जीवनकाल में एक बार मुआवजा प्राप्त करने की पात्रता होगी। मुआवजे की राशि ग्राहक के शुद्ध नुकसान की 85 प्रतिशत या ₹25,000, जो भी कम हो, होगी।

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इस सुविधा का लाभ लेने के लिए ग्राहक को धोखाधड़ी की घटना की जानकारी मिलने के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर अपने बैंक को सूचना देनी होगी। इसके साथ ही शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर भी दर्ज करानी होगी। निर्धारित समयसीमा के भीतर शिकायत नहीं करने पर मुआवजे की पात्रता प्रभावित हो सकती है।

नए ढांचे में नुकसान की राशि के आधार पर मुआवजे की व्यवस्था तय की गई है। यदि किसी ग्राहक का नुकसान ₹29,412 से कम है तो उसे शुद्ध नुकसान की 85 प्रतिशत राशि मिलेगी। ऐसे मामलों में नुकसान का बड़ा हिस्सा RBI वहन करेगा, जबकि ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक भी निर्धारित अनुपात में योगदान देंगे। वहीं ₹29,412 से अधिक और ₹50,000 तक के नुकसान वाले मामलों में मुआवजा ₹25,000 की अधिकतम सीमा तक सीमित रहेगा।

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करने का भार बैंक पर होगा। यदि बैंक यह साबित नहीं कर पाता कि ग्राहक की लापरवाही के कारण धोखाधड़ी हुई, तो ग्राहक को नियमानुसार सुरक्षा और राहत मिल सकती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहकों के लिए पहले से मौजूद ‘जीरो लायबिलिटी’ प्रावधान जारी रहेगा। यदि धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही, सुरक्षा प्रणाली की कमी, तकनीकी विफलता, सुरक्षा उल्लंघन या आंतरिक धोखाधड़ी के कारण हुई है, तो ग्राहक पर किसी प्रकार की वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी। इसी प्रकार तीसरे पक्ष से जुड़े अनधिकृत लेनदेन की सूचना यदि पांच दिनों के भीतर दे दी जाती है, तो ग्राहक को भी पूर्ण सुरक्षा का लाभ मिल सकता है।

बैंकों को भी नए नियमों के तहत अपनी व्यवस्था मजबूत करनी होगी। सभी बैंकों को ग्राहकों के लिए 24 घंटे उपलब्ध शिकायत और रिपोर्टिंग चैनल उपलब्ध कराने होंगे, ताकि कार्ड खोने या संदिग्ध लेनदेन की स्थिति में तत्काल सूचना दी जा सके। इसके अलावा ₹500 से अधिक के प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर तुरंत एसएमएस अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा। जिन ग्राहकों ने ईमेल पंजीकृत कराया है, उन्हें ईमेल अलर्ट भी भेजना होगा।

शिकायत निपटान के लिए भी स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की गई है। घरेलू धोखाधड़ी मामलों में बैंकों को 45 दिनों के भीतर जांच पूरी कर जवाब देना होगा, जबकि सीमा-पार या अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी मामलों में यह अवधि 60 दिन तक हो सकती है।

क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहकों को अतिरिक्त राहत देते हुए RBI ने “शैडो रिवर्सल” की व्यवस्था भी अनिवार्य की है। इसके तहत शिकायत मिलने के पांच दिनों के भीतर विवादित राशि के बराबर अस्थायी राहत ग्राहक को दी जाएगी, जिससे जांच पूरी होने तक उस पर ब्याज या अतिरिक्त शुल्क का बोझ नहीं पड़ेगा।

इस बीच, प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में यह पहल साइबर अपराध पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकती है। उनके अनुसार, साइबर ठगी के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम होते हैं और यदि पीड़ित तुरंत बैंक तथा हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराते हैं तो धन की रिकवरी और अपराधियों तक पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से किसी भी संदिग्ध लिंक, फर्जी निवेश योजना, स्क्रीन-शेयरिंग ऐप और ओटीपी साझा करने से बचने की अपील करते हुए कहा कि जागरूकता और त्वरित रिपोर्टिंग ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की यह पहल डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों का भरोसा और मजबूत करेगी तथा बैंकों को साइबर सुरक्षा और ग्राहक संरक्षण उपायों को और सशक्त बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

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